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पठानों के बसाए गुड़ियानी में वर्षों पुरानी हवेलियां बताती हैं संपन्नता की कहानियां

Fri, 12 Mar 2021 12:52 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 12:52 AM IST
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village gudiani story
कोसली। गांव गुड़ियानी का बाबा ठाकुरजी का मंदिर। - फोटो : Rewari
कोसली। रेवाड़ी से कोसली मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक गांव गुड़ियानी करीब एक हजार साल पूर्व बसाया गया था। आजादी से पूर्व यह गांव पठानों का गांव रहा है। यहां बेर फल के पेड़ अधिक अधिक हैं, इसलिए इस गांव को बेरों के लिए भी पहचाना जाता है। फिलहाल यादव व अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव में छत्तीस बिरादरी के लोग रहते हैं।
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आजादी के बाद पाकिस्तान से भी कुछ परिवार यहां आकर बस गए थे, जिन्हें जमीन भी अलॉट की गई थी, लेकिन बदलते समय के साथ अधिकांश परिवार गांव छोड़कर शहरों में जाकर बस गए हैं। करीब 8000 से अधिक आबादी वाले इस गांव में 3800 से अधित मतदाता है। गांव में आज भी सही हालत में खड़ी पुरानी हवेलियां इस बात का प्रमाण हे कि यह गांव शुरूआत से ही काफी खुशहाल रहा है। देश के प्रसिद्ध राष्ट्र कवि बाबू बालमुकुंद का जन्म भी इसी गांव में ही हुआ था। जिन्होंने अपनी कलम के माध्यम से देश की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुविधाओं के नाम पर गांव में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, कन्या उच्च विद्यालय, पशु अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व आंगनबाड़ी केंद्र है।
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आजादी से पहले से ही उनके गांव को बेर वाले गांव के नाम से भी जाना जाता है। गांव में बेर फल के पेड़ों की संख्या बहुत अधिक है। गांव में घोड़ों का भी व्यापारी किया जाता था। इसकी प्रसिद्धि इतनी थी की यहां पर विदेशों से भी लोग खरीदारी करने के लिए आते थे। गांव के लोग काफी धार्मिक प्रवृत्ति के हैं।
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-हरदयाल
गांव का इतिहास काफी पुराना है। सभी ग्रामीण आपस में मिलजुल कर रहते हैं। विकास के मामले में भी आसपास के गांवों में काफी आगे है। यहीं कारण है कि उनका गांव आदर्श गांवों में सूची में शामिल रह चुका है।
-नत्थूराम
मुझे बेहद खुशी है कि मेरे गांव को आदर्श गांव का दर्जा मिला है। गांव में जन्में राष्ट्र कवि बाबू बालमुकुंद गुप्त ने देश की आजादी में अपनी महत्वपूर्ण निभाई। उनके गांव में 36 बिरादरी के लोग आपस में मिलजुल कर रहते हैं।
-अशोक कुमार
गांव का इतिहास बहुत पुराना है। हमारे पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्षों पूर्व बनाई गई ऐतिहासिक हवेलियां गांव के संपन्न होने का प्रमाण है। इसके अलावा गांव के अधिकांश लोग धर्म-कर्म में भी विश्वास रखते हैं।
-मंदीप यादव
भले ही मेरा गांव आदर्श गांवों की श्रेणी में शामिल है, लेकिन गांव में जगह-जगह गंदगी के ढेर मिल जाएंगे। गांव में न तो अब सफाई होती और न ही गंदे पानी की निकासी के कोई विशेष इंतजाम हैं।

-गुरदयाल
गांव में आपसी भाईचारे के साथ साथ हर धर्म व जाति के लोग रहते हैं। सभी में आपस में बेहद प्रेम है। ग्रामीणों के आपसी भाईचारे के कारण ही गांव सभी मूलभूत सुविधाएं है।
-सहीराम
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