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Rewari News: हर वर्ष रोपे जाते हैं दो लाख पौधे, 70% हो जाते हैं नष्ट
Wed, 04 Jun 2025 12:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 04 Jun 2025 12:34 AM IST
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फोटो : 2नेहरू पार्क में सूखा हुआ पौधा। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में हर वर्ष बारिश के मौसम में दो लाख पौधे रोपे जाते हैं लेकिन देखरेख के अभाव में 70 फीसदी पौधे नष्ट हो जाते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष पौधरोपण के बाद भी जिले में अपेक्षित हरियाली नहीं आई।
पिछले वर्ष 2 लाख से अधिक अधिक पौधे पार्कों, स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, विभिन्न सेक्टरों, पंचायतों में बांटे गए थे। सभी पौधे रोपे भी गए लेकिन देखरेख न होने के कारण 70 प्रतिशत पौधे नष्ट हो चुके हैं। इनमें 20 प्रतिशत पौधें ठीक अवस्था में हैं। 10 प्रतिशत पौधों का ठीक से विकास हुआ है।
पार्कों व सार्वजनिक स्थलों पर 50% से अधिक पौधरोपण किया गया था। देखरेख के अभाव में पौधे दम तोड़ चुके हैं। इन पौधों को नर्सरी में तैयार करने पर भी काफी खर्च आता है, ऐसे में पैसा भी बर्बाद जा रहा है।
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दरअसल, मानसून के दिनों में बड़े पैमाने पर जिले में पौधरोपण अभियान विभिन्न संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिकारियों व कर्मचारियों की तरफ से चलाया जाता है लेकिन पौधों की सुरक्षा और देखरेख का इंतजाम नहीं किया जाता है। इसकी वजह से पौधे नष्ट हो जाते हैं।
रोपे गए पौधोें पर नहीं दिया जाता ध्यान : कमल
राष्ट्रीय पर्यावरण प्रकृति संरक्षण एवं संवर्धन संस्था के राष्ट्रीय संयोजक कमल यादव ने कहा कि पौधरोपण का लक्ष्य पूरा करने के लिए पौधे बांटे जाते हैं। रोपे गए पौधे सुरक्षित हैं या नहीं, इसका ध्यान बिल्कुल भी नहीं रखा जाता है। पौधे को बच्चों की तरह पालना चाहिए, जब तक वह बड़ा नहीं हो जाता तब तक ध्यान रखना चाहिए। जो पौधे रोपे जाते हैं इनमें से 90 प्रतिशत बिल्कुल नष्ट हो जाते हैं।
जिले का 4 प्रतिशत है वन आवरण क्षेत्र :
रेवाड़ी जिले की बात करें तो मौजूदा समय में सड़कों के जाल और बढ़ती आबादी की बसावट के बावजूद जिले में वन आवरण क्षेत्र (फोरेस्ट कवर एरिया) में कुछ हद तक बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्र 1594 वर्ग किलोमीटर में 4 प्रतिशत वन आवरण क्षेत्र है। एक दशक दौरान करीब दस वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ा है। झाबुआ, नाहड़ फॉरेस्ट के साथ ही अरावली क्षेत्र से जिले में वन क्षेत्र को बढ़ावा मिल रहा है। निकट भविष्य में अरावली की सुरक्षा मजबूत होने से वन क्षेत्र को फायदा मिला है।
वर्जन:
हर सीजन ने 2 लाख से अधिक पौधे बांटे जाते हैं। विभाग की जिम्मेदारी पौधे बांटने की है। पौधरोपण करने वाले लोगों को पौधों की देखरेख करनी चाहिए। अगर पौधे पेड़ बनेंगे तभी पर्यावरण को फायदा होगा।-दीपक प्रभाकर, वन मंडल अधिकारी, रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। जिले में हर वर्ष बारिश के मौसम में दो लाख पौधे रोपे जाते हैं लेकिन देखरेख के अभाव में 70 फीसदी पौधे नष्ट हो जाते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष पौधरोपण के बाद भी जिले में अपेक्षित हरियाली नहीं आई।
पिछले वर्ष 2 लाख से अधिक अधिक पौधे पार्कों, स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, विभिन्न सेक्टरों, पंचायतों में बांटे गए थे। सभी पौधे रोपे भी गए लेकिन देखरेख न होने के कारण 70 प्रतिशत पौधे नष्ट हो चुके हैं। इनमें 20 प्रतिशत पौधें ठीक अवस्था में हैं। 10 प्रतिशत पौधों का ठीक से विकास हुआ है।
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पार्कों व सार्वजनिक स्थलों पर 50% से अधिक पौधरोपण किया गया था। देखरेख के अभाव में पौधे दम तोड़ चुके हैं। इन पौधों को नर्सरी में तैयार करने पर भी काफी खर्च आता है, ऐसे में पैसा भी बर्बाद जा रहा है।
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दरअसल, मानसून के दिनों में बड़े पैमाने पर जिले में पौधरोपण अभियान विभिन्न संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिकारियों व कर्मचारियों की तरफ से चलाया जाता है लेकिन पौधों की सुरक्षा और देखरेख का इंतजाम नहीं किया जाता है। इसकी वजह से पौधे नष्ट हो जाते हैं।
रोपे गए पौधोें पर नहीं दिया जाता ध्यान : कमल
राष्ट्रीय पर्यावरण प्रकृति संरक्षण एवं संवर्धन संस्था के राष्ट्रीय संयोजक कमल यादव ने कहा कि पौधरोपण का लक्ष्य पूरा करने के लिए पौधे बांटे जाते हैं। रोपे गए पौधे सुरक्षित हैं या नहीं, इसका ध्यान बिल्कुल भी नहीं रखा जाता है। पौधे को बच्चों की तरह पालना चाहिए, जब तक वह बड़ा नहीं हो जाता तब तक ध्यान रखना चाहिए। जो पौधे रोपे जाते हैं इनमें से 90 प्रतिशत बिल्कुल नष्ट हो जाते हैं।
जिले का 4 प्रतिशत है वन आवरण क्षेत्र :
रेवाड़ी जिले की बात करें तो मौजूदा समय में सड़कों के जाल और बढ़ती आबादी की बसावट के बावजूद जिले में वन आवरण क्षेत्र (फोरेस्ट कवर एरिया) में कुछ हद तक बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्र 1594 वर्ग किलोमीटर में 4 प्रतिशत वन आवरण क्षेत्र है। एक दशक दौरान करीब दस वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ा है। झाबुआ, नाहड़ फॉरेस्ट के साथ ही अरावली क्षेत्र से जिले में वन क्षेत्र को बढ़ावा मिल रहा है। निकट भविष्य में अरावली की सुरक्षा मजबूत होने से वन क्षेत्र को फायदा मिला है।
वर्जन:
हर सीजन ने 2 लाख से अधिक पौधे बांटे जाते हैं। विभाग की जिम्मेदारी पौधे बांटने की है। पौधरोपण करने वाले लोगों को पौधों की देखरेख करनी चाहिए। अगर पौधे पेड़ बनेंगे तभी पर्यावरण को फायदा होगा।-दीपक प्रभाकर, वन मंडल अधिकारी, रेवाड़ी।