Rewari: छत से कूदकर बाल देखरेख संस्थान से भागे दो किशोर, तलाश में जुटी पुलिस
भागने वाले बच्चों में एक झज्जर जिले का तो दूसरा पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। जबकि दूसरा 10 साल का सोहेल पश्चिम बंगाल का है।
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हरियाणा के रेवाड़ी शहर स्थित बाल देखरेख संस्थान से दो बच्चे भाग गए। इसकी भनक तब लगी जब शनिवार की सुबह बच्चों की गिनती शुरू हुई। इसके बाद संस्थान के अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दी। शहर थाना पुलिस दोनों बच्चों की तलाश में जुटी है। दोनों रात में खिड़की खोलकर छत के रास्ते भाग गए।
भागने वाले बच्चों में एक झज्जर जिले का तो दूसरा पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। झज्जर का रहने वाला 15 साल का मंजीत 8 जुलाई को ही रेवाड़ी बाल देखरेख संस्थान पहुंचा था। जबकि दूसरा 10 साल का सोहेल पश्चिम बंगाल का है। बाल देखरेख संस्थान में फिलहाल 31 बच्चों को रखा गया था। शनिवार सुबह जब गिनती की गई तो 29 की बच्चे मिले।
इसके बाद हर बच्चे को नाम के साथ आवाज लगाई गई। जिसके बाद दो बच्चों के भागने की जानकारी मिली तो वहां हड़कंप मच गया। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। सूचना के बाद पुलिस की एक टीम जांच के लिए बाल देखरेख संस्थान भी पहुंची। साथ ही शहर थाना पुलिस दोनों बच्चों की तलाश करने में जुटी है। अभी दोनों बच्चों का सुराग नहीं लग पाया है।
बता दें कि रेवाड़ी स्थित बाल देखरेख संस्थान से बच्चों के भागने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहां से कई बार बच्चे फरार हो चुके हैं, जिसमें स्टाफ की बड़ी लापरवाही भी देखने को मिलती रही। एक बार फिर बच्चे के भागने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।
बच्चों के भागने पर एक नजर
- 6 फरवरी 2018 को बाल देखरेख संस्थान से देर रात खिड़की तोड़कर पांच बच्चे भाग निकले। मौके पर पहुंची पुलिस ने केस दर्ज कर बच्चों की तलाश शुरू कर दी थी। पुलिस टीम ने जंगले के सरिए तोड़कर फरार बच्चों को शहर से 7 किलोमीटर दूर भवाड़ी की ढ़ाणी से बरामद कर लिया था। पकड़े जाने के बाद बच्चों ने कर्मचारियों पर मारपीट का आरोप भी लगाया था।
- 17 जुलाई 2018 को बाल देखरेख संस्थान में रह रहे दो बच्चे स्कूल से लौटते समय गायब हो गए थे। उनकी तलाशी की जा रही थी। वहीं दो दिन बाद बच्चे खुद ही लौट आए थे।
- एक अगस्त 2018 को फिर दो बच्चे दीवार फांदकर भाग गए। सुबह बच्चों के नहीं मिलने पर कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। तलाश करने के बाद एक बच्चा दोपहर को ट्रामा सेंटर में बैठा मिला। दूसरे को देर शाम को गुरुग्राम में जीआरपी ने पकड़ा।
- 17 दिसंबर 2018 को बाल देखरेख संस्थान से एक 14 साल का एक लड़का लापता हो गया। इसकी सूचना पुलिस को दी गई थी।
हाईकोर्ट की जज भी कर चुकी निरीक्षण
6 मार्च 2021 को पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय की न्यायाधीश लीजा गिल ने शहर के बाल देखरेख संस्थान का निरीक्षण किया था। उन्होंने बच्चों से मुलाकात की थी। जिला बाल कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए थे कि बच्चों की सुरक्षा और उनके रहने आदि पर विशेष ध्यान जाए। उनको किसी भी तरह की परेशानी न आने दें।
1994 में शुरू हुआ था आस्था कुंज
जिला बाल कल्याण अधिकारी वीरेंद्र यादव ने बताया कि बाल देखरेख संस्थान की स्थापना सन 1994 में हुई थी। जिले में बच्चों के पालन-पोषण के लिए तीन अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई है। कैटेगरी में 0 से 4 साल के 4 बच्चे, बाल गृह में 6 से 18 साल तक के 29 लड़के व धारूहेड़ा स्थित आशा किरण में 34 लड़कियां रहती हैं। इन सभी बच्चों का खाने-पीने व पढ़ाई का खर्च महिला एवं बाल विकास विभाग वहन करता है। सभी बच्चे यहां के अग्रसेन स्कूल में पढ़ते हैं। बाल देखरेख संस्थान में 15 लोगों का स्टाफ है जो बच्चों की देखरेख करता है।
केंद्र से सुबह सूचना मिली थी कि दो बच्चे कहीं चले गए हैं। इनकी तलाशी के लिए पुलिस को शिकायत दी गई है। ये दोनों बच्चे ही कुछ दिन पहले ही यहां आए थे। - मुग्धा यादव, केंद्र अधीक्षक, बाल देखरेख संस्थान
मंजीत को सिंगर बनने का शौक
बाल देखरेख संस्थान की अधीक्षक मुग्धा यादव ने बताया कि झज्जर जिले का रहने वाला मंजीत 8 जुलाई को ही आया था। बच्चा पहले भी कई बार घर से भाग चुका है। सिंगर बनने के लिए वह मुंबई भाग गया था। किसी संस्था की मदद से वह यहां पहुंचा। उसके बाद से ही वापस जाने की जिद कर रहा था। इसके परिजनों को भी कई बार बुलाया गया, लेकिन वे उसे लेने नहीं पहुंचे। रात के वक्त सभी बच्चे सोए हुए थे। तभी वह 10 साल के दूसरे बच्चे सोहेल को बहला फुसलाकर खिड़की के रास्ते भाग निकला। इसकी शिकायत पुलिस को दे दी गई है।