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Rewari News: सड़क के निर्माण में बाधक नहीं बनेंगे पेड़, 500 एकड़ में होगा पौधारोपण

Mon, 01 Apr 2024 03:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Mon, 01 Apr 2024 03:00 AM IST
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Trees will not become a hindrance in road construction, plantation will be done in 500 acres
रेवाड़ी। सड़क के बीच में आने वाले पेड़-पौधे कई बार निर्माण कार्य लंबे समय तक अटक जाते हैं। अब ऐसा नहीं होगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों को 500 एकड़ जमीन तलाशने के आदेश दिए हैं।
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दरअसल, लोक निर्माण विभाग को जब नई सड़क बनानी होती है या चौड़ी करनी होती है तो वहां पर पेड़-पौधे लगे होते हैं। इनको काटने के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना पड़ता है। ऐसे मामलों में औपचारिकताएं पूरी करने में कई बार समय लग जाता है, जिससे काम को पूरा करने में देरी होती है। इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए लोक निर्माण विभाग एडवांस में ही अपनी भूमि पर वन लगा देगा, ताकि कार्य भी पूरा हो जाए और परेशानी भी न हो। इससे फायदा यह भी होगा कि अपने समय पर प्रोजेक्ट भी पूरे हो जाएंगे। इसका उपयोग भविष्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए किया जा सकता है, जिससे मौजूदा पेड़ों को काटने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रक्रिया में तेजी आएगी।
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10 साल में 30 हजार से अधिक पेड़ काटे

दूसरी तरफ विकास के नाम पर जिले में 8 साल में 20 हजार से अधिक पेड़ को काटा जा चुका है। इतने बड़े तादाद में हरे वृक्षों को काटने की जो भरपाई की गई है वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। विभाग भी मानता है कि एक पौधे को वृक्ष बनने में करीब 20 साल लग जाते हैं। इस प्रकार समाज और अन्य को इसका क्या नुकसान हो सकता है, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह भी उस स्थिति में जब प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए 33 फीसदी जमीन पर पेड़ होने चाहिए, जबकि जिले में केवल 3.50 प्रतिशत भूमि पर ही पेड़-पौधे हैं।
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निर्माण कार्य के लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई

पिछले कुछ साल में रेवाड़ी-महेंद्रगढ़, रेवाड़ी-धारूहेड़ा, रेवाड़ी-बेरली, रेवाड़ी-नारनौल सहित कई रोड बने हैं। इनमें रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ रोड पर करीब चार हजार तो रेवाड़ी-धारूहेड़ा रोड के समय करीब 2 हजार पेड़ काटे गए। हालांकि वन विभाग हर वर्ष पौधरोपण कर इस कमी को पूरी करने का दावा करता है, लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले कई साल में वन क्षेत्र न के बराबर ही बढ़ा है। वन विभाग ने हर वर्ष रेवाड़ी में साढ़े चार लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा होता है। गत वर्ष भी इतने ही पौधे जिले में लगाए थे। वन विभाग का यह भी मानना है कि इनमें से करीब तीस फीसदी पौधे विभिन्न कारणों से खराब हो जाते हैं।

नहीं चढ़ सकी योजना सिरे

सरकार ने पेड़ों को लेकर कई तरह की योजनाएं शुरू की। इनमें एक योजना ग्रीन हाईवे पॉलिसी रही। इसमें हाईवे बनाते समय जब पेड़ काटे जाते हैं तो उस बेल्ट को छोड़कर समीप ग्रीन बेल्ट विकसित की जाती है। कई जगह समीप में ऐसी कोई जगह नहीं होने के कारण यह मामला कोर्ट में चला जाता है। वहीं एक अन्य स्कीम के तहत वन विभाग की जमीन पर जहां पेड़ समाप्त हो रहे हैं, वहां पौधे लगाए जाते हैं। इसके तहत सड़क बनाने वाली एजेंसी जितनी जमीन डायवर्ट करती है, उसके बदले दोगुनी जमीन वन विभाग को पौधे लगाने के लिए देनी पड़ती है। वन विभाग ने एक योजना भी शुरू की। इसमें खेतों में दो से तीन लाइनों में पेड़ लगाकर वन विभाग एक साल तक उनकी परवरिश भी करता है। अधिक मुनाफा नहीं दिखने के कारण किसानों ने इस योजना में अधिक रुचि नहीं दिखाई।


हर साल होते हैं पौधारोपण कार्यक्रम

साल 2022 में वन विभाग की ओर से जो पेड़-पौधे क्षेत्र में ठीक से पनप सकते हैं, उन्हीं की पौध 9 नर्सरी में तैयार की गई। पौधरोपण कार्यक्रम के तहत वन विभाग जिले में वन क्षेत्रों, सड़कों, नहर के किनारे, पंचायत भूमि, सरकारी संस्थान तथा कृषि भूमि के तहत लगभग 3 लाख 25 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही जल शक्ति अभियान, पौधागिरी स्कीम तथा फ्री सप्लाई के तहत 3 लाख 20 हजार पौधे वितरित किए गए। अधिकतर कार्य पूरा होने के लिए है। साथ ही जिले में 4 लाख पौधे मनरेगा स्कीम के तहत भी तैयार किए जाते हैं।

जमीन तलाशने के निर्देश जैसे ही मिलेंगे, उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। -आदित्य, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी।
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