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Rewari News: ऑनलाइन कोर्स की बढ़ती उपयोगिता पर किया प्रशिक्षित
Sat, 23 May 2026 05:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 23 May 2026 05:45 PM IST
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कार्यशाला में जानकारी देते प्रोफेसर रमेश चंद्र शर्मा। स्रोत : विवि
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता और प्रत्यायन प्रकोष्ठ की तरफ से सभी शिक्षकों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। कुआलालम्पुर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मलेशिया से प्रोफेसर रमेश चंद्र शर्मा ने शिक्षकों को प्रशिक्षित किया। कार्यशाला दो चरणों में आयोजित की गई। प्रथम चरण में ओपन ऑनलाइन रिसोर्सेज के बारे में बताया गया जिसमें अलग-अलग वेबसाइट और अपना स्वयं का कोर्स विकसित करने के लिए आवश्यक शिक्षण सामग्री की उपलब्धता के संबंध में शिक्षकों को अवगत कराया गया। दूसरे चरण में मुख्य फोकस अपना स्वयं का कोर्स विकसित करने की आवश्यकता एवं उसकी प्रक्रिया के संबंध में था।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह भी उपस्थित रहे। इन्होंने आज के समय में ऑनलाइन कोर्स की आवश्यकता एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कोविड के समय में लोगों ने मजबूरी में इन कोर्सेज को अपनाया था लेकिन आज ये सभी शिक्षकों के लिए सीखने आवश्यक हो गए हैं।
आइक्यूएसी प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर विकास बत्रा ने बताया कि यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार अब 40% तक के क्रेडिट ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से प्राप्त किया जा सकते हैं। कार्यशाला को सफल बनाने में संयोजक डॉ. रीना हुड्डा, भौतिकी विभाग से डॉ. कविता, अर्थशास्त्र विभाग से डॉ. रितु, वाणिज्य विभाग से डॉ. प्रियंका रंगा एवं इतिहास विभाग से डॉ. बीरेंद्र सिंह का योगदान रहा।
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कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह भी उपस्थित रहे। इन्होंने आज के समय में ऑनलाइन कोर्स की आवश्यकता एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कोविड के समय में लोगों ने मजबूरी में इन कोर्सेज को अपनाया था लेकिन आज ये सभी शिक्षकों के लिए सीखने आवश्यक हो गए हैं।
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आइक्यूएसी प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर विकास बत्रा ने बताया कि यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार अब 40% तक के क्रेडिट ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से प्राप्त किया जा सकते हैं। कार्यशाला को सफल बनाने में संयोजक डॉ. रीना हुड्डा, भौतिकी विभाग से डॉ. कविता, अर्थशास्त्र विभाग से डॉ. रितु, वाणिज्य विभाग से डॉ. प्रियंका रंगा एवं इतिहास विभाग से डॉ. बीरेंद्र सिंह का योगदान रहा।
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