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दो साल तक बिना शिक्षक पढ़ती रहीं 55 छात्राएं

Sun, 06 Nov 2016 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 06 Nov 2016 12:23 AM IST
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 नियामतपुर गांव में कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल का निर्माण शुरू भी नहीं हुआ, इससे पहले विभाग ने दाखिला प्रक्रिया शुरू कर दी। विभिन्न सुविधाओं की उम्मीद में पहले साल करीब 35 दाखिले हुए, दूसरे साल 21 छात्राओं ने पंजीकरण कराया। अबकी बार एक भी दाखिला नहीं हुआ। जिसका कारण स्कूल में भवन, शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होना है।  
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सरकार द्वारा ड्रॉप आउट छात्राओं को शिक्षित करने की योजना बनाई गई थी। जिसके मुताबिक नियामतपुर में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मंजूर हुआ है, जिसमें 6-14 साल की ड्रॉप आउट छात्राओं के दाखिले किए जाएंगे। जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा 2013  में ड्रॉप आउट छात्राओं की सर्वे करवाई गई थी। सर्वे में करीब 150 छात्राएं  विभिन्न कारणों के चलते शिक्षा से वंचित मिली। सर्वाधिक छात्राएं  नियामतपुर के आसपास गांवों में मिली। जिनकी सुविधा के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल स्वीकृति दी गई है। दाखिला लेने पर बालिकाओं को हॉस्टल, पाठ्य सामाग्री, भोजन व अन्य सुविधाएं निशुल्क मिलेंगी। निर्माण शुरू करने से पहले ही विभाग ने दाखिला प्रक्रिया शुरू कर दी थी। बेहतर सुविधा व शिक्षा की उम्मीद में 35 अभिभावकों ने बेटियों का दाखिला करवाया, लेकिन शिक्षकों  की नियुक्ति नहीं की गई। छात्राएं सालभर नजदीकी मिडिल स्कूल में बैठकर टाइम पास करती रही। दूसरे साल चंद महीने में भवन व शिक्षक उपलब्ध होने का झांसा दिया गया। जिससे 21 बालिकाओं के दाखिले कर लिए गए, लेकिन विभाग ने अध्यापक भेजना उचित नहीं समझा। पूरी साल भवन निर्माण कार्य बंद रहा, जिससे अभिभावकों का बेहतर शिक्षा मिलने का सपना टूट गया। आरटीई के नियमानुसार  सभी छात्राओं को उत्तीर्ण कर दिया। परीक्षा परिणाम घोषित होते ही अभिभावकों ने बेटियों के नाम कटवाने शुरू कर दिए। एकमात्र छात्रा ने भी पिछले महीने एसएलसी ले ली। जिससे सरकार की महत्वपूर्ण योजना को खतरा उत्पन्न हो गया।
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33 साल के पट्टे पर 4 एकड़ जमीन
सरपंच  बलबीर रावत ने बताया कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के लिए पंचायत द्वारा 4 एकड़ जमीन 33 साल के पट्टे पर विभाग को मुहैया करवा दी। बदले में पंचायत को एक रुपए प्रति एकड़ सालाना किराया मिलेगा। करीब तीन साल बीतने के बावजूद विभाग ने कंप्लीट निर्माण नहीं करवाया। जिस कारण सैकड़ों छात्राएं सुविधाजनक पढ़ाई से वंचित हैं।
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दिसंबर 2014 तक होना था निर्माण पूरा
स्कूल कैंपस में तीन कमरे, स्टाफ रूम, कार्यालय भवन, छात्रावास के लिए चार बड़े हॉल निर्माणाधीन हैं। टेंडर की शर्तानुसार निर्माण कार्य दिसंबर 2014 में पूरा होना था। किंतु आर्थिक अव्यवस्था के चलते विभाग ने टेंडर अवधि तीन महीने (31 मार्च तक) बढ़ा दी। जिसे खत्म हुए करीब डेढ़ साल बीत चुका, अभी तक स्थिति यथावत बनी हुई है।
1.25 करोड़ का टेंडर, 18 लाख अटके
सर्व शिक्षा मिशन के कनिष्ठ अभियंता इंद्रपाल ने बताया कि कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल निर्माण करवाने के लिए 1.25 करोड़ का टेंडर निकाला गया था। निर्माण कार्य लगभग संपन्न हो चुका है। केवल पलंबर, फिटिंग व थोड़ा कंस्ट्रक्शन वर्क पेंडिंग है। अभी ठेकेदार ने निर्माण कार्य बंद कर रखा है। शुरू करने पर दो महीने में संपूर्ण हो जाएगा।

जल्द होगी शिक्षकों की व्यवस्था
खंड शिक्षा अधिकारी सुनील यादव ने बताया कि कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल का निर्माण पूरा नहीं हुआ, शिक्षक भी नहीं मिले। अगले 2-3 महीने में शिक्षक नियुक्त हो जाएंगे। इसके बाद दाखिला प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी। अगले साल अच्छे दाखिले होने की उम्मीद है। 
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