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500 किसान पहुंचेंगे खेड़ा बार्डर, मजबूत करेंगे किसान आंदोलन
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बावल(रेवाड़ी)। जिले के खेड़ा बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध में पिछले साढ़े 11 माह से चल रहे किसानों के धरने को मजबूती देने के लिए बुधवार को चेन्नई, महाराष्ट्र और राजस्थान से भारी संख्या में किसान पहुंचेंगे। इनमें महाराष्ट्र से 100 महिला किसान भी अपनी भागीदारी दर्ज कराएंगी। ये जानकारी संयुक्त किसान मोर्चा की स्थानीय समिति के नेताओं ने दी।
किसान नेता पवन दुग्गल ने बताया कि किसान आंदोलन को तेज करने के लिए चेन्नई से लगभग 300 से अधिक किसान, राजस्थान के गंगानगर से 100 किसान जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर पर पहुंचकर किसान आंदोलन को मजबूती देंगे। इसके अलावा रेवाड़ी जिले में महिला किसानों की भागीदारी भी बढ़ेगी। महाराष्ट्र से 100 से अधिक महिला किसानों का जत्था रेवाड़ी के लिए रवाना हो चुका है।
बुधवार तक यह जत्था खेड़ा बार्डर पर पहुंच जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान संगठनों की ओर से गांव-गांव जाकर किसानों को नए कृषि कानूनों के दुष्प्रभाव के बारे में अवगत कराया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर कृषि कानून पूरी तरह से लागू हो गए तो कृषि पर पूरी तरह से पूंजीपतियों का कब्जा हो जाएगा। किसान बंधुआ मजदूर बन जाएंगे। सरकार पूंजीपतियों के हाथों किसानों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। देश के विभिन्न हिस्सों में 700 से अधिक किसान जान गवां चुके है। लेकिन सरकार झुकने का नाम नहीं ले रही है। उनका कहना है कि 26 नवंबर को किसान नेताओं द्वारा खेड़ा बार्डर पर विचार विमर्श कर आंदोलन को तेज किया जाएगा। जब तक सरकार कृषि कानूनों को वापिस नही ले लेती यह आंदोलन जारी रहेगा।
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किसान नेता पवन दुग्गल ने बताया कि किसान आंदोलन को तेज करने के लिए चेन्नई से लगभग 300 से अधिक किसान, राजस्थान के गंगानगर से 100 किसान जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर पर पहुंचकर किसान आंदोलन को मजबूती देंगे। इसके अलावा रेवाड़ी जिले में महिला किसानों की भागीदारी भी बढ़ेगी। महाराष्ट्र से 100 से अधिक महिला किसानों का जत्था रेवाड़ी के लिए रवाना हो चुका है।
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बुधवार तक यह जत्था खेड़ा बार्डर पर पहुंच जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान संगठनों की ओर से गांव-गांव जाकर किसानों को नए कृषि कानूनों के दुष्प्रभाव के बारे में अवगत कराया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर कृषि कानून पूरी तरह से लागू हो गए तो कृषि पर पूरी तरह से पूंजीपतियों का कब्जा हो जाएगा। किसान बंधुआ मजदूर बन जाएंगे। सरकार पूंजीपतियों के हाथों किसानों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। देश के विभिन्न हिस्सों में 700 से अधिक किसान जान गवां चुके है। लेकिन सरकार झुकने का नाम नहीं ले रही है। उनका कहना है कि 26 नवंबर को किसान नेताओं द्वारा खेड़ा बार्डर पर विचार विमर्श कर आंदोलन को तेज किया जाएगा। जब तक सरकार कृषि कानूनों को वापिस नही ले लेती यह आंदोलन जारी रहेगा।
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