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सेप्सिस की समय पर पहचान और इलाज जरूरी : डॉ. नरेंद्र
Sun, 13 Sep 2026 11:20 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 13 Sep 2026 11:20 PM IST
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रेवाड़ी। सभी स्वास्थ्य संस्थानोें में रविवार को विश्व सेप्सिस दिवस मनाया गया। इस दौरान डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और आम लोगों को सेप्सिस के लक्षण, बचाव और समय पर इलाज के बारे में जागरूक किया गया।
सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि सेप्सिस संक्रमण के कारण शरीर में पैदा होने वाली जानलेवा स्थिति है। समय पर इसकी पहचान और उपचार नहीं होने पर मरीज की जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सेप्सिस से बचाव के लिए संक्रमण की रोकथाम, लक्षणों की जल्द पहचान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि तेज बुखार, सांस लेने की गति बढ़ना और ब्लड प्रेशर कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। उन्होंने हाथों की नियमित सफाई रखने, साफ-सफाई पर ध्यान देने और समय पर सभी जरूरी टीके लगवाने की सलाह दी।
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डॉ. दहिया ने कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां और विशेष रूप से एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए। एंटीबायोटिक का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार और उचित मात्रा में किया जाना चाहिए।
उन्होंने सभी एसएमओ, मेडिकल अधिकारियों और नर्सिंग स्टाफ को स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण रोकथाम के नियमों, हाथ धोने की व्यवस्था, बायोमेडिकल वेस्ट के उचित प्रबंधन और एंटीबायोटिक के तर्कसंगत इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि सेप्सिस संक्रमण के कारण शरीर में पैदा होने वाली जानलेवा स्थिति है। समय पर इसकी पहचान और उपचार नहीं होने पर मरीज की जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सेप्सिस से बचाव के लिए संक्रमण की रोकथाम, लक्षणों की जल्द पहचान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।
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उन्होंने लोगों से अपील की कि तेज बुखार, सांस लेने की गति बढ़ना और ब्लड प्रेशर कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। उन्होंने हाथों की नियमित सफाई रखने, साफ-सफाई पर ध्यान देने और समय पर सभी जरूरी टीके लगवाने की सलाह दी।
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डॉ. दहिया ने कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां और विशेष रूप से एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए। एंटीबायोटिक का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार और उचित मात्रा में किया जाना चाहिए।
उन्होंने सभी एसएमओ, मेडिकल अधिकारियों और नर्सिंग स्टाफ को स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण रोकथाम के नियमों, हाथ धोने की व्यवस्था, बायोमेडिकल वेस्ट के उचित प्रबंधन और एंटीबायोटिक के तर्कसंगत इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।