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Rewari News: पारिवारिक उपेक्षा व गलत संगत में पड़कर तीन किशोरों ने की डकैती, कोर्ट ने सुनाई 5-5 साल की कठोर कारावास की सजा

Tue, 25 Nov 2025 12:07 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 25 Nov 2025 12:07 AM IST
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Three teenagers, owing to family neglect and bad company, committed robbery; the court sentenced them to 5 years rigorous imprisonment.
जिला न्यायालय रेवाड़ी। संवाद
रेवाड़ी। पारिवारिक उपेक्षा व गलत संगत में पड़कर तीन किशोरों के डकैती करने पर कोर्ट ने अहम आदेश पारित करते हुए 5-5 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जतिन गर्ग की अदालत ने हाईवे पर मारपीट कर मोटरसाइकिल लूटने के मामले में दोषी पाए गए तीन बाल आरोपियों को धारा 394/34 व 395/34 आईपीसी के तहत पांच-पांच वर्ष की कठोर कारावास की दो सजाएं सुनाई हैं जो एक साथ चलेंगी। 15 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।
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जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट 2015 की धारा 18 (डी) के अनुसार लगाया गया जुर्माना बच्चों के माता-पिता देंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तीनों को 21 वर्ष की आयु पूरी होने तक प्लेस ऑफ सेफ्टी में रखा जाएगा और उसके बाद जेल में भेजा जाएगा।
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वहीं अदालत के समक्ष पेश सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में सामने आया कि तीनों ही बालक पारिवारिक उपेक्षा, आर्थिक तंगी, सामाजिक दबाव और गलत संगत से प्रभावित थे। कुछ ने घर में मानसिक तनाव, झगड़े और मारपीट का भी उल्लेख किया।
अदालत ने जिला बाल संरक्षण इकाई और लीगल-कम-प्रोबेशन अधिकारी को निर्देश दिया कि तीनों के लिए व्यक्तिगत देखभाल योजना तैयार की जाए जिसमें शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, काउंसिलिंग, थेरेपी, सामाजिक पुनर्वास और नियमित निगरानी शामिल हो।
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वर्ष 2023 का था मामला

मामला वर्ष 2023 का है जब तीनों बाल आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर रात में हाईवे पर शिकायतकर्ता बिल्लू और उसके साथी पर हमला कर उनकी मोटरसाइकिल लूट ली थी। वारदात के दौरान शिकायतकर्ता को चोट भी आई थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया और तीनों बालकों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश किया। वारदात के समय बच्चों की उम्र 16 साल से ज़्यादा थी और अब उनकी उम्र लगभग 18 साल है।
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तीनों बोले- गरीब परिवार से, इकलौते कमाने वाले

सजा पर सुनवाई के दौरान तीनों ने अदालत से कहा कि वे मजदूरी करते हैं, बेहद गरीब परिवारों से आते हैं और अपने घरों के इकलौते कमाने वाले सदस्य हैं। उन्होंने दया की अपील करते हुए कहा कि उन्हें प्रोबेशन का मौका दिया जाए। बचाव पक्ष ने भी तर्क दिया कि वे पहली बार अपराध में फंसे हैं और उनका पुनर्वास संभव है। सरकारी अधिवक्ता ने विरोध करते हुए कहा कि बालक जानबूझकर डकैती में शामिल हुए थे और अपराध बेहद गंभीर है। इसलिए उन्हें कठोर सजा दिए जाने की आवश्यकता है ताकि ऐसा कृत्य समाज में दोहराया न जाए।
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रिपोर्ट में आई थीं ये बातें सामने
लीगल-कम-प्रोबेशन ऑफिसर द्वारा जमा की गई सीसीएल की सोशल इन्वेस्टिगेशन की रिपोर्ट में पहले किशोर को लेकर बताया गया है कि बच्चे ने 7 तक पढ़ाई की है और स्कूल छोड़ने का कारण स्कूल की एक्टिविटीज में दिलचस्पी न होना है। दोस्तों के प्रति बच्चे का रवैया पॉजिटिव और अच्छा है। सहकर्मी समूह का असर है, समस्याओं का संभावित कारण मां बाप की लापरवाही है और आखिर में यह बताया गया है कि बच्चा यह अपराध कर सकता है। दूसरे बच्चे की रिपोर्ट में बताया गया कि उसने 8वीं से नीचे की पढ़ाई की है। स्कूल छोड़ने का कारण सहकर्मी समूह है। समस्याओं का संभावित कारण मां बाप की लापरवाही है और आखिर में यह बताया गया है कि बच्चा यह अपराध कर सकता है। तीसरे बच्चे की साइकोलॉजिकल रिपोर्ट के अनुसार जब पूछा गया कि क्या 10 से 15 साल की उम्र के बीच उसके माता-पिता उसे बहुत मारते थे, उसने इस सवाल का जवाब हां में दिया।

गंभीर अपराध में किशारों को माना जाता है व्यस्क
जो गंभीर अपराध होते हैं, इसमें 16 से 18 के बीच की उम्र के किशोरों को व्यस्क आरोपियों की तरह सजा सुनाई जाती है। इनके आचरण, व्यवहार व व्यक्तित्व की भी जांच की जाती है। इस आधार पर सजा का निर्णय लिया जाता है। वैसे बहुत की कम मामले किशोरों के सजा के सामने आते हैं। -अश्विनी तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता
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