फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   There is no supply of oral vaccine for animals for six months, fear of spreading disease

छह महीने से पशुओं के मुंहखुर टीके की नहीं हो रही सप्लाई, बीमारी फैलने का डर

Wed, 13 Oct 2021 11:42 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 13 Oct 2021 11:42 PM IST
विज्ञापन
There is no supply of oral vaccine for animals for six months, fear of spreading disease
बावल स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय। - फोटो : Rewari
पशुओं को मुंहखुर बीमारी से बचाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा हर साल टीकाकरण अभियान चलाया जाता है। छह महीने पहले घोषणा भी हुई थी कि पूरे प्रदेश में अभियान चलाया जाएगा। जिसमें रेवाड़ी जिला भी शामिल था, लेकिन टीके की सप्लाई नहीं होने के कारण यह अभियान ठंडे बस्ते में जाता हुआ दिखाई दे रहा है। स्थानीय अधिकारियों की मजबूरी भी है कि उनके पास पशुओं को लगाने के लिए टीके तक नहीं है। स्थानीय विभाग द्वारा चार बार पत्र लिखा जा चुका है कि जल्द से जल्द मुंहखुर बीमारी रोकने के लिए टीके की सप्लाई की जाए, लेकिन अभी तक कोई कुछ नहीं हुआ है। हालांकि कुछ राहत ये है कि स्थानीय अधिकारियों के पास एक पत्र अवश्य आया है, जिसमें कहा गया है कि अगले 20 से 25 दिनों में टीके की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में अगले महीने से जिले में पशुओं को मुंहखुर बीमारी से बचाने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलेगा।
विज्ञापन

टीका सप्लाई होने में छह महीने की हुई देरी
इस बार पशुओं को मुंहखु र(एफएमडी) के टीके लगने में 6 महीने से अधिक की देरी हो चुकी है। इसका बड़ा कारण हरियाणा के पशु अस्पतालों में मुंहखुर के टीके की सप्लाई न होना है। पशुओं में मुंहखुर के टीके न लगने से पशुपालक काफी परेशान हैं। क्योंकि बरसाती दिनों में पशुओं में मुंहखुर फैलने का खतरा बढ़ जाता है। जिले में पशुओ का मुंहखुर का टीकाकरण नहीं होने से रोष पाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले भी पशुओं में मुंहखुर बीमारी फैलती रही है। जिससे काफी संख्या में पशुओं की मौत भी हुई है। 6 महीने का समय बीत चुका है। अभी तक उनके पशुओं को मुंहखुर का टीकाकरण नहीं लगा है। उनका डर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसलिए सरकार को जल्दी से जल्दी पशुओं को मुंहखुर के टीके लगाने चाहिए।
विज्ञापन

रोग के लक्षण
पशु के मुंह से अत्यधिक लार का टपकना
जीभ और तलवे पर छालों का उभरना एवं जीभ का बाहर आ जाना
पशु के जुगाली करना बंद कर देना
दूध उत्पादन में करीब 80 प्रतिशत की कमी।
पशुओं का गर्भपात होना।
बछड़ों में अत्यधिक बुखार आने पर मृत्यु हो जाना।
ऐसे करें बचाव
रोग का पता लगने पर पशु को अन्य पशुओं से तुरंत दूर किया जाए
दूध निकालने वाले व्यक्ति को हाथ और मुंह साबुन से धोना चाहिए
प्रभावित क्षेत्र को सोडियम कार्बोनेट घोल पानी मिलाकर धोना चाहिए
चिकित्सकों की सलाह लेकर पशु के तुरंत टीका लगवाने के साथ नियमित उपचार कराएं।
स्वस्थ एवं बीमार पशु को अलग-अलग रखें
पशु के ठीक हो जाने पर 20 दिन बाद ही उसे दूसरे पशुओं के पास लाना चाहिए।
जिले में 2 लाख 33 हजार पशु है। टीके लगाने के लिए सरकार की तरफ आर्डर आ चुके है। उम्मीद है कि 25 अक्तूबर से पशुओं को टीके लगने शुरू हो जाएंगे। जिसके बाद अभियान शुरू किया जाएगा। बीमे को लेकर अभी कोई सूचना नहीं आई है। -डॉ. नसीब सिंह, उप निदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed