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जनजातीय समाज में शोध की आवश्यकता : कुलपति
Fri, 28 Mar 2025 12:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 28 Mar 2025 12:00 AM IST
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फोटो : 13कार्यक्रम में पहुंचे कुलपति प्रो. जेपी यादव का स्वागत करते हुए। स्रोत : विवि
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय और वनवासी कल्याण आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में जनजातीय समाज में शोध की आवश्यकता, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी के दृष्टिकोण विषय पर विचार गोष्ठी विश्वविद्यालय में हुई।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, समाजसेवियों और छात्रों ने भाग लिया। संगोष्ठी का उद्देश्य जनजातीय समाज की परंपराओं, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर शोध को बढ़ावा देना था। ताकि उनके आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक उत्थान को गति दी जा सके।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी यादव ने कहा कि हरियाणा में जनजातीय समाज का अध्ययन एक उपेक्षित विषय रहा है, जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस पर कई शोध हुए हैं। हरियाणा में इस दिशा में ठोस प्रयास नहीं हुए। अपने वनवासी समुदायों की परंपराओं, समस्याओं और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान को पहचानने और संरक्षित करने की आवश्यकता है। यह शोध केवल ऐतिहासिक महत्व के लिए नहीं, बल्कि वर्तमान समय में नीति निर्माण और सामाजिक समरसता के लिए भी आवश्यक है।
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अजय मित्तल ने कहा कि आज शोध की जरूरत इसलिए भी अधिक है क्योंकि जनजातीय समाज अपनी पहचान बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। हम देखते हैं कि औद्योगीकरण, शहरीकरण और बदलते आर्थिक परिदृश्य में उनकी पारंपरिक आजीविका खतरे में है। शोध के माध्यम से हमें यह समझने की जरूरत है कि कैसे उनकी सांस्कृतिक जड़ें और आधुनिक विकास के अवसर एक साथ जुड़े रह सकते हैं। इस मौके पर कुलसचिव दिलबाग सिंह, प्रदीप, आशु विकास, सुनील भार्गव, महेंद्र छाबड़ा, जुगनू गोयल, त्रिभुवन व अन्य मौजूद थे।
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रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय और वनवासी कल्याण आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में जनजातीय समाज में शोध की आवश्यकता, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी के दृष्टिकोण विषय पर विचार गोष्ठी विश्वविद्यालय में हुई।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, समाजसेवियों और छात्रों ने भाग लिया। संगोष्ठी का उद्देश्य जनजातीय समाज की परंपराओं, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर शोध को बढ़ावा देना था। ताकि उनके आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक उत्थान को गति दी जा सके।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी यादव ने कहा कि हरियाणा में जनजातीय समाज का अध्ययन एक उपेक्षित विषय रहा है, जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस पर कई शोध हुए हैं। हरियाणा में इस दिशा में ठोस प्रयास नहीं हुए। अपने वनवासी समुदायों की परंपराओं, समस्याओं और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान को पहचानने और संरक्षित करने की आवश्यकता है। यह शोध केवल ऐतिहासिक महत्व के लिए नहीं, बल्कि वर्तमान समय में नीति निर्माण और सामाजिक समरसता के लिए भी आवश्यक है।
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अजय मित्तल ने कहा कि आज शोध की जरूरत इसलिए भी अधिक है क्योंकि जनजातीय समाज अपनी पहचान बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। हम देखते हैं कि औद्योगीकरण, शहरीकरण और बदलते आर्थिक परिदृश्य में उनकी पारंपरिक आजीविका खतरे में है। शोध के माध्यम से हमें यह समझने की जरूरत है कि कैसे उनकी सांस्कृतिक जड़ें और आधुनिक विकास के अवसर एक साथ जुड़े रह सकते हैं। इस मौके पर कुलसचिव दिलबाग सिंह, प्रदीप, आशु विकास, सुनील भार्गव, महेंद्र छाबड़ा, जुगनू गोयल, त्रिभुवन व अन्य मौजूद थे।