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Rewari News: जिले में आठ खेलों के कोच नहीं, खिलाड़ी खुद करते हैं अभ्यास
Mon, 30 Sep 2024 12:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 30 Sep 2024 12:44 AM IST
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रेवाड़ी। राव तुलाराम स्टेडियम में तैयारी करते खिलाड़ी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में बैडमिंटन, कबड्डी, क्रिकेट, बास्केटबॉल, स्विमिंग, लॉन टेनिस, जिम्नास्टिक और तीरंदाजी के कोच नहीं हैं। इसकी वजह से खिलाड़ियों को खुद अभ्यास करना पड़ता है।
प्रशिक्षकों की कमी के चलते बास्केटबॉल, क्रिकेट, स्विमिंग, लॉन टेनिस व बैडमिंटन में खिलाड़ी अपेक्षित पदक नहीं जीत रहे हैं। इन खेलोें के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। वहीं खिलाड़ी दूसरे खेलों को अपना रहे हैं। जिले में खिलाड़ियों ने सर्वाधिक मेडल तलवारबाजी में जीते हैं। इसमें 60 मेडल नेशनल और 100 से ज्यादा मेडल स्टेट स्तर पर खिलाड़ियों ने जीते हैं। एथलेटिक्स में 10 से ज्यादा खिलाड़ियों ने नेशनल में पदक जीता है। राव तुलाराम स्टेडियम में बास्केटबॉल के दो कोर्ट बने हैं लेकिन दो साल से भी ज्यादा समय से कोच नहीं है। सीमेंटेड कोर्ट खराब हो रहे हैं। गोल पोस्ट की जालियां भी गायब हैं।
जिले में बैडमिंटन, कबड्डी, क्रिकेट, बास्केटबॉल, स्विमिंग, लॉन टेनिस, जिम्नास्टिक व तीरंदाजी के कोच की जरूरत है। फिलहाल हैंडबॉल के 2, बॉक्सिंग के 2, एथलेटिक्स के 2, फुटबॉल के 2, वालीबॉल के 2, कुश्ती का एक, वुशू का एक, तलवारबाजी का एक, खो-खो का एक, टेबल टेनिस के कोच कार्यरत हैं।
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सिंथेटिक ट्रैक बने, बॉक्सिंग रिंग के लिए हॉल हो
शहर के राव तुलाराम स्टेडियम में बॉक्सिंग रिंग लगाने के लिए हॉल नहीं है। खुले आसमान के नीचे रिंग लगाया गया । खिलाड़ी टीन शेड में अभ्यास करते हैं। स्विमिंग की भी कोई सुविधा नहीं है। सिंथेटिक ट्रैक नहीं बन पाया है। सिंथेटिक ट्रैक के लिए टेंडर हुआ है लेकिन वर्क ऑर्डर नहीं हुआ है। राज्य के गुड़गांव, फरीदाबाद, रोहतक, अंबाला, सोनीपत, पानीपत, भिवानी, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, हिसार और जींद के नरवाना में सिंथेटिक ट्रैक बनाए गए हैं।
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राजीव गांधी खेल परिसर भी बदहाल
जिले में 5 राजीव गांधी खेल परिसर हैं। इनमें गांव आशियाकी पांचौर, मनेठी, गुरावड़ा, धारूहेड़ा व कोसली में स्थित राजीव गांधी केल परिसर में कहीं गेट नहीं है तो कहीं पर बिल्डिंग जर्जर है। धारूहेड़ा खेल परिसर औद्योगिक क्षेत्र के बीच है जिससे खिलाड़ी अभ्यास के लिए नहीं पहुंच पाते है। धारूहेड़ा स्टेडियम की हालत खराब है। परिसर के आसपास कूड़ा-कचरे का ढेर लगा हुआ है। इन परिसरों की दशा सुधारने के लिए बजट स्वीकृत तो हो गया, लेकिन अभी पैसा नहीं मिला है। हॉकी के मिनी स्टेडियम कंवाली का भी ऐसा ही हाल है। यहां की बिल्डिंग ही अधूरी है।
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वर्जन:
निदेशालय को रिपोर्ट बनाकर भेजी गई है। अनुमति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।- मदनपाल सिंह, जिला खेल अधिकारी
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रेवाड़ी। जिले में बैडमिंटन, कबड्डी, क्रिकेट, बास्केटबॉल, स्विमिंग, लॉन टेनिस, जिम्नास्टिक और तीरंदाजी के कोच नहीं हैं। इसकी वजह से खिलाड़ियों को खुद अभ्यास करना पड़ता है।
प्रशिक्षकों की कमी के चलते बास्केटबॉल, क्रिकेट, स्विमिंग, लॉन टेनिस व बैडमिंटन में खिलाड़ी अपेक्षित पदक नहीं जीत रहे हैं। इन खेलोें के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। वहीं खिलाड़ी दूसरे खेलों को अपना रहे हैं। जिले में खिलाड़ियों ने सर्वाधिक मेडल तलवारबाजी में जीते हैं। इसमें 60 मेडल नेशनल और 100 से ज्यादा मेडल स्टेट स्तर पर खिलाड़ियों ने जीते हैं। एथलेटिक्स में 10 से ज्यादा खिलाड़ियों ने नेशनल में पदक जीता है। राव तुलाराम स्टेडियम में बास्केटबॉल के दो कोर्ट बने हैं लेकिन दो साल से भी ज्यादा समय से कोच नहीं है। सीमेंटेड कोर्ट खराब हो रहे हैं। गोल पोस्ट की जालियां भी गायब हैं।
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जिले में बैडमिंटन, कबड्डी, क्रिकेट, बास्केटबॉल, स्विमिंग, लॉन टेनिस, जिम्नास्टिक व तीरंदाजी के कोच की जरूरत है। फिलहाल हैंडबॉल के 2, बॉक्सिंग के 2, एथलेटिक्स के 2, फुटबॉल के 2, वालीबॉल के 2, कुश्ती का एक, वुशू का एक, तलवारबाजी का एक, खो-खो का एक, टेबल टेनिस के कोच कार्यरत हैं।
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सिंथेटिक ट्रैक बने, बॉक्सिंग रिंग के लिए हॉल हो
शहर के राव तुलाराम स्टेडियम में बॉक्सिंग रिंग लगाने के लिए हॉल नहीं है। खुले आसमान के नीचे रिंग लगाया गया । खिलाड़ी टीन शेड में अभ्यास करते हैं। स्विमिंग की भी कोई सुविधा नहीं है। सिंथेटिक ट्रैक नहीं बन पाया है। सिंथेटिक ट्रैक के लिए टेंडर हुआ है लेकिन वर्क ऑर्डर नहीं हुआ है। राज्य के गुड़गांव, फरीदाबाद, रोहतक, अंबाला, सोनीपत, पानीपत, भिवानी, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, हिसार और जींद के नरवाना में सिंथेटिक ट्रैक बनाए गए हैं।
राजीव गांधी खेल परिसर भी बदहाल
जिले में 5 राजीव गांधी खेल परिसर हैं। इनमें गांव आशियाकी पांचौर, मनेठी, गुरावड़ा, धारूहेड़ा व कोसली में स्थित राजीव गांधी केल परिसर में कहीं गेट नहीं है तो कहीं पर बिल्डिंग जर्जर है। धारूहेड़ा खेल परिसर औद्योगिक क्षेत्र के बीच है जिससे खिलाड़ी अभ्यास के लिए नहीं पहुंच पाते है। धारूहेड़ा स्टेडियम की हालत खराब है। परिसर के आसपास कूड़ा-कचरे का ढेर लगा हुआ है। इन परिसरों की दशा सुधारने के लिए बजट स्वीकृत तो हो गया, लेकिन अभी पैसा नहीं मिला है। हॉकी के मिनी स्टेडियम कंवाली का भी ऐसा ही हाल है। यहां की बिल्डिंग ही अधूरी है।
वर्जन:
निदेशालय को रिपोर्ट बनाकर भेजी गई है। अनुमति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।- मदनपाल सिंह, जिला खेल अधिकारी