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तीन दिन से हो रही बारिश ने किसानों के अरमानों पर फेरा पानी
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कोसली। क्षेत्र में पिछले तीन दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। बाजरा की फसल कटाई के बाद खेतों में गल रही है। वहीं कपास में भारी नुकसान से किसान परेशान है। इस साल काफी कम बारिश होने से जैसे तैसे किसानों ने ट्यूबवेलों से सिंचाई करके बाजरा व कपास की फसल तैयार की थी। अब कटाई, कढ़ाई व कपास चुगाई का समय आया है तो मौसम के बदले मिजाज ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जो खेतों में खड़ी बाजरे की फसल को भी बारिश से काफी नुकसान होगा।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले चार पांच दिन तक बारिश की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में किसान फसल की कटाई दो-चार दिन ना करें। जिन्होंने फसल की कटाई कर दी है वे इसे सही तरह से ढक कर रखें। मंडी में अब तक 10 हजार क्विंटल बाजरे की फसल की आवक हुई है। इसे भीगने से बचाने के लिए लिए पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं।
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ज्यादा जमीन पर बिजाई की गई बाजरा की:
इस बार तूड़ी के भाव आसमान छूने और गत वर्ष कडबी (पशुचारा) के अच्छे दाम मिलने के चलते बारिश लेट होने के बाद क्षेत्र में 1250 एकड़ में बाजरे की बिजाई हुई। जबकि गत वर्ष यह आंकड़ा नौ सौ एकड़ था।
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इसके अलावा कपास की 3710 एकड़ में खेती की गई। ग्वार की मात्र आठ एकड़ और मूंग की दो सौ एकड़ में बिजाई गई। बारिश कम होने के बाद किसानों ने जैसे तैसे फसल ट्यूबवेलों से तैयार कि इसके बाद भी फसलों में पानी का अभाव साफ दिखाई दिया। जिसका नतीजा यह रहा कि बाजरा के साथ साथ अन्य फसलों के उत्पादन पर खासा असर दिखाई दे रहा है।
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क्या कहना है किसानों का:
बाजरा बिजाई के बाद इस बार बारिश कम होने से किसान कि पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कम उत्पादन होने से किसान को लागत मूल्य भी बड़ी मुश्किल से मिलना है । अब बाजरा तीन दिन कि बारिश ने खराब कर दिया है। ऐसे में सरकार किसानों की आर्थिक मदद करे।
- धर्मबीर।
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कभी कब बारिश कभी धूप अधिक तो कभी ज्यादा बारिश से किसान कभी पूरी फसल का लाभ नहीं ले पाता। जिसके कारण उसे उत्पादन लागत भी कई बार नहीं मिल पाती है। सरकार से मांग है कि किसानों को अतिरिक्त पैकेज दिया जाए ताकि आर्थिक रूप से कमजोर किसानों की स्थिति में सुधार हो।
- सुदर्शन।
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किसानों को सरकार कभी सस्ते ब्याज पर ऋण देने की बात करती है तो कभी आय दोगनी करने का वादा करती है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकार किसानों कि आर्थिक स्थिति को और कमजोर करने का काम कर रही है। खाद, बीज, दवाइयों के दाम बहुत ज्यादा हैं। । ऊपर से मौसम की मार किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर देती है। बिजेंद्र।
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आज जय जवान जय किसान का नारा देश में साकार नहीं हो रहा है। सरकार किसानों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। पहले समय पर बारिश नहीं हुई और अब बारिश से बोईं फसलें भी खराब हो रही हैं।
- वेदप्रकाश।
क्या कहना है कृषि विभाग का
अब मानसून लौटने का समय है दो तीन दिन और मौसम खराब रहेगा। वहीं आगे मौसम के मिजाज का कुछ पता नहीं है। तेज बारिश हुई तो खेत में खड़े बाजरे का दाना काला पड़ सकता है। खिली हुई कपास भी खराब हो जाएगी।
- सीता राम, कृषि अधिकारी, कोसली।
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मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले चार पांच दिन तक बारिश की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में किसान फसल की कटाई दो-चार दिन ना करें। जिन्होंने फसल की कटाई कर दी है वे इसे सही तरह से ढक कर रखें। मंडी में अब तक 10 हजार क्विंटल बाजरे की फसल की आवक हुई है। इसे भीगने से बचाने के लिए लिए पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं।
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ज्यादा जमीन पर बिजाई की गई बाजरा की:
इस बार तूड़ी के भाव आसमान छूने और गत वर्ष कडबी (पशुचारा) के अच्छे दाम मिलने के चलते बारिश लेट होने के बाद क्षेत्र में 1250 एकड़ में बाजरे की बिजाई हुई। जबकि गत वर्ष यह आंकड़ा नौ सौ एकड़ था।
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इसके अलावा कपास की 3710 एकड़ में खेती की गई। ग्वार की मात्र आठ एकड़ और मूंग की दो सौ एकड़ में बिजाई गई। बारिश कम होने के बाद किसानों ने जैसे तैसे फसल ट्यूबवेलों से तैयार कि इसके बाद भी फसलों में पानी का अभाव साफ दिखाई दिया। जिसका नतीजा यह रहा कि बाजरा के साथ साथ अन्य फसलों के उत्पादन पर खासा असर दिखाई दे रहा है।
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क्या कहना है किसानों का:
बाजरा बिजाई के बाद इस बार बारिश कम होने से किसान कि पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कम उत्पादन होने से किसान को लागत मूल्य भी बड़ी मुश्किल से मिलना है । अब बाजरा तीन दिन कि बारिश ने खराब कर दिया है। ऐसे में सरकार किसानों की आर्थिक मदद करे।
- धर्मबीर।
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कभी कब बारिश कभी धूप अधिक तो कभी ज्यादा बारिश से किसान कभी पूरी फसल का लाभ नहीं ले पाता। जिसके कारण उसे उत्पादन लागत भी कई बार नहीं मिल पाती है। सरकार से मांग है कि किसानों को अतिरिक्त पैकेज दिया जाए ताकि आर्थिक रूप से कमजोर किसानों की स्थिति में सुधार हो।
- सुदर्शन।
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किसानों को सरकार कभी सस्ते ब्याज पर ऋण देने की बात करती है तो कभी आय दोगनी करने का वादा करती है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकार किसानों कि आर्थिक स्थिति को और कमजोर करने का काम कर रही है। खाद, बीज, दवाइयों के दाम बहुत ज्यादा हैं। । ऊपर से मौसम की मार किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर देती है। बिजेंद्र।
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आज जय जवान जय किसान का नारा देश में साकार नहीं हो रहा है। सरकार किसानों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। पहले समय पर बारिश नहीं हुई और अब बारिश से बोईं फसलें भी खराब हो रही हैं।
- वेदप्रकाश।
क्या कहना है कृषि विभाग का
अब मानसून लौटने का समय है दो तीन दिन और मौसम खराब रहेगा। वहीं आगे मौसम के मिजाज का कुछ पता नहीं है। तेज बारिश हुई तो खेत में खड़े बाजरे का दाना काला पड़ सकता है। खिली हुई कपास भी खराब हो जाएगी।
- सीता राम, कृषि अधिकारी, कोसली।