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Rewari News: दूर होगी परेशानी, 17 को नहर में आएगा पानी
Tue, 14 May 2024 03:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 14 May 2024 03:20 AM IST
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पानी के अभाव में सूखी पड़ी जेएलएन नहर। संवाद
रेवाड़ी। शहरवासियों को पेयजल किल्लत से निजात पाने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। गर्मी की शुरुआत से ही आधे से ज्यादा शहर में पीने के पानी की कमी चल रही है। नहर में पानी पहुंचने अभी इसमें समय लगेगा। टैंकों में घटता पानी चिंता और बढ़ा रहा है। कालाका वाटर टैंक से ही 70 फीसदी शहर में पानी की आपूर्ति होती है। यहां पर 5 वाटर टैंक बने हुए हैं, इनमें 3 और 4 खाली होने के कगार पर हैं। अब केवल एक, 2 और 5 नंबर टैंक में ही पानी शेष बचा है। इन तीनों टैंकों में 6 फीट से भी कम ही पानी बचा है।
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जवाहर लाल नेहरू (जेएलएन) में 17 मई को पानी छोड़ने की बात कही जा रही है। अभी जो पानी टैंकों में बचा है, उसी से काम चलाया जाएगा। नहर में पानी चलने और टैंक भरकर ही नियमित आपूर्ति हो सकेगी। पानी छोड़े जाने के बाद रेवाड़ी तक यह 2 दिन में पहुंचता है। टैंक भरने के बाद नियमित आपूर्ति सुचारू हो पाएगी।
एक दिन छोड़कर एक दिन ही पानी की हो रही आपूर्ति
बता दें कि पिछले दो माह से बीच में कुछ दिन छोड़कर लगातार एक दिन छोड़कर एक दिन ही पानी की आपूर्ति हो रही है। अभी आगे भी ऐसा ही संकट रहने वाला है। जब तक अतिरिक्त वाटर टैंक नहीं बन जाता, तब तक ऐसी ही स्थिति रहेगी। लिसाना में अतिरिक्त टैंक बनने से वहां से जुड़े वार्डों में नियमित पेयजल की आपूर्ति हो रही है।
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एक अतिरिक्त वाटर टैंक बनना जरूरी
जिले की कुल आबादी 3 लाख है। रोजाना शहर को 24 मिलियन लीटर पानी की जरूरत है। अभी 12 मिलियन लीटर प्रतिदिन आपूर्ति हो रही। एक दिन छोड़कर एक दिन पानी लोगों को मिल रहा है। शहर के 70 प्रतिशत हिस्से को कालाका जलघर से पानी की आपूर्ति की जाती है। इस हिस्से में पेयजल आपूर्ति के लिए फिलहाल कालाका में 5 वाटर टैंकों का निर्माण किया गया है। इनकी स्टोरेज क्षमता 30,872,0000 लीटर (680 लाख गैलन) की है। स्टोरेज पानी से शहर को ज्यादा से ज्यादा 15 से 20 दिन नियमित पानी आपूर्ति हो सकती है, लेकिन गर्मी के दिनों में नहरी शेड्यूल में थोड़ी गड़बड़ी होने पर शहर में पानी का संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में अगर एक और अतिरिक्त टैंक निर्माण हो जाए तो शहर में पीने के पानी की समस्या नहीं रहेगी। फिलहाल भगवानपुर में टैंक निर्माण के लिए जमीन देखी गई है, उम्मीद है कि जल्द ही बात सिरे चढ़ेगी।
17 मई को नहर में पानी छोड़े जाने की सूचना है। अभी जो पानी टैंकों में बचा है, उसी से काम चलाया जाएगा। एक दिन छोड़कर एक दिन ही पानी की हो रही आपूर्ति की जा रही है। नहर में पानी आने के बाद नियमित आपूर्ति की जा सकेगी।
- हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग
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जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जवाहर लाल नेहरू (जेएलएन) में 17 मई को पानी छोड़ने की बात कही जा रही है। अभी जो पानी टैंकों में बचा है, उसी से काम चलाया जाएगा। नहर में पानी चलने और टैंक भरकर ही नियमित आपूर्ति हो सकेगी। पानी छोड़े जाने के बाद रेवाड़ी तक यह 2 दिन में पहुंचता है। टैंक भरने के बाद नियमित आपूर्ति सुचारू हो पाएगी।
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एक दिन छोड़कर एक दिन ही पानी की हो रही आपूर्ति
बता दें कि पिछले दो माह से बीच में कुछ दिन छोड़कर लगातार एक दिन छोड़कर एक दिन ही पानी की आपूर्ति हो रही है। अभी आगे भी ऐसा ही संकट रहने वाला है। जब तक अतिरिक्त वाटर टैंक नहीं बन जाता, तब तक ऐसी ही स्थिति रहेगी। लिसाना में अतिरिक्त टैंक बनने से वहां से जुड़े वार्डों में नियमित पेयजल की आपूर्ति हो रही है।
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एक अतिरिक्त वाटर टैंक बनना जरूरी
जिले की कुल आबादी 3 लाख है। रोजाना शहर को 24 मिलियन लीटर पानी की जरूरत है। अभी 12 मिलियन लीटर प्रतिदिन आपूर्ति हो रही। एक दिन छोड़कर एक दिन पानी लोगों को मिल रहा है। शहर के 70 प्रतिशत हिस्से को कालाका जलघर से पानी की आपूर्ति की जाती है। इस हिस्से में पेयजल आपूर्ति के लिए फिलहाल कालाका में 5 वाटर टैंकों का निर्माण किया गया है। इनकी स्टोरेज क्षमता 30,872,0000 लीटर (680 लाख गैलन) की है। स्टोरेज पानी से शहर को ज्यादा से ज्यादा 15 से 20 दिन नियमित पानी आपूर्ति हो सकती है, लेकिन गर्मी के दिनों में नहरी शेड्यूल में थोड़ी गड़बड़ी होने पर शहर में पानी का संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में अगर एक और अतिरिक्त टैंक निर्माण हो जाए तो शहर में पीने के पानी की समस्या नहीं रहेगी। फिलहाल भगवानपुर में टैंक निर्माण के लिए जमीन देखी गई है, उम्मीद है कि जल्द ही बात सिरे चढ़ेगी।
17 मई को नहर में पानी छोड़े जाने की सूचना है। अभी जो पानी टैंकों में बचा है, उसी से काम चलाया जाएगा। एक दिन छोड़कर एक दिन ही पानी की हो रही आपूर्ति की जा रही है। नहर में पानी आने के बाद नियमित आपूर्ति की जा सकेगी।
- हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग