{"_id":"6929e2c25b1138a22c0fe7eb","slug":"the-liquid-based-cytology-machine-has-not-yet-been-commissioned-and-the-pmo-says-the-machine-parts-have-arrived-rewari-news-c-198-1-rew1001-229632-2025-11-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: अभी शुरू नहीं हो पाई लिक्विड बेस्ड साइटोलॉजी मशीन, पीएमओ बोले- मशीन का पार्ट आ चुका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: अभी शुरू नहीं हो पाई लिक्विड बेस्ड साइटोलॉजी मशीन, पीएमओ बोले- मशीन का पार्ट आ चुका
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल रेवाड़ी। संवाद
रेवाड़ी। महिलाओं में बढ़ते गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की रोकथाम और प्रारंभिक पहचान के लिए नागरिक अस्पताल को दो महीने पहले लिक्विड बेस्ड साइटोलॉजी मशीन मिल चुकी है लेकिन तकनीकी कार्य और अन्य औपचारिकताएं पूरी न होने के चलते अब तक जांच प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
मशीन उपलब्ध होने के बावजूद टेस्ट शुरू न होने से मरीजों को निराशा हो रही है। यह मशीन महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की आधुनिक और सटीक जांच करती है। समय पर पहचान न होने के कारण महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की गिरफ्त में आ जाती हैं।
इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने यह मशीन नागरिक अस्पताल को उपलब्ध करवाई थी ताकि जिले में महिलाओं को कैंसर की जांच के लिए निजी लैब या बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। मशीन के शुरू होने पर न केवल सुविधा स्थानीय स्तर पर मिलेगी बल्कि जांच भी कम खर्च में हो सकेगी। पीएमओ डॉ. सुरेंद्र यादव ने बताया कि मशीन का पार्ट आ गया है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -
अंतिम औपचारिकताएं पूरी होनी बाकी
मशीन की इंस्टॉलेशन के बाद टेस्ट शुरू करने के लिए विशेषज्ञ तकनीशियन, सैंपल प्रोसेसिंग यूनिट और रिपोर्टिंग सिस्टम की अंतिम औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। उम्मीद है कि सभी प्रक्रियाएं पूरी होते ही जांच सुविधा जल्द शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल मरीजों को जांच के लिए प्राइवेट लैब्स का सहारा लेना पड़ रहा है जहां हजारों रुपये तक खर्च आता है। वहीं कई महिलाएं आर्थिक तंगी के कारण जांच करवाने से भी पीछे हट जाती हैं जिससे बीमारी का पता देर से चलता है और इलाज मुश्किल हो जाता है।
-- -- -- -- --
समय पर जांच करानी जरूरी
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम के लिए समय पर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। खासकर 30 से 65 वर्ष की महिलाओं को साल में कम से कम एक बार टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रारंभिक अवस्था में बीमारी आसानी से ठीक की जा सकती है लेकिन देर होने पर जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए लिक्विड बेस्ड साइटोलॉजी मशीन का संचालन शुरू होना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
-- -- -- -- -- -- -- -
वर्जन
मशीन का पार्ट आ गया है। इसे अब इंस्टॉल करना है। इसके बाद सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। -डॉ. सुरेंद्र यादव, पीएमओ, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी
विज्ञापन
मशीन उपलब्ध होने के बावजूद टेस्ट शुरू न होने से मरीजों को निराशा हो रही है। यह मशीन महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की आधुनिक और सटीक जांच करती है। समय पर पहचान न होने के कारण महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की गिरफ्त में आ जाती हैं।
विज्ञापन
इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने यह मशीन नागरिक अस्पताल को उपलब्ध करवाई थी ताकि जिले में महिलाओं को कैंसर की जांच के लिए निजी लैब या बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। मशीन के शुरू होने पर न केवल सुविधा स्थानीय स्तर पर मिलेगी बल्कि जांच भी कम खर्च में हो सकेगी। पीएमओ डॉ. सुरेंद्र यादव ने बताया कि मशीन का पार्ट आ गया है।
विज्ञापन
अंतिम औपचारिकताएं पूरी होनी बाकी
मशीन की इंस्टॉलेशन के बाद टेस्ट शुरू करने के लिए विशेषज्ञ तकनीशियन, सैंपल प्रोसेसिंग यूनिट और रिपोर्टिंग सिस्टम की अंतिम औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। उम्मीद है कि सभी प्रक्रियाएं पूरी होते ही जांच सुविधा जल्द शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल मरीजों को जांच के लिए प्राइवेट लैब्स का सहारा लेना पड़ रहा है जहां हजारों रुपये तक खर्च आता है। वहीं कई महिलाएं आर्थिक तंगी के कारण जांच करवाने से भी पीछे हट जाती हैं जिससे बीमारी का पता देर से चलता है और इलाज मुश्किल हो जाता है।
समय पर जांच करानी जरूरी
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम के लिए समय पर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। खासकर 30 से 65 वर्ष की महिलाओं को साल में कम से कम एक बार टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रारंभिक अवस्था में बीमारी आसानी से ठीक की जा सकती है लेकिन देर होने पर जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए लिक्विड बेस्ड साइटोलॉजी मशीन का संचालन शुरू होना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वर्जन
मशीन का पार्ट आ गया है। इसे अब इंस्टॉल करना है। इसके बाद सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। -डॉ. सुरेंद्र यादव, पीएमओ, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी