{"_id":"69e28e7305663e2a580e2444","slug":"the-heritage-of-ahirwal-special-attractions-from-steam-engines-to-the-five-chhatris-rewari-news-c-198-1-rew1001-236921-2026-04-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"अहीरवाल की विरासत : भाप इंजन से पांच छतरियों तक खास आकर्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अहीरवाल की विरासत : भाप इंजन से पांच छतरियों तक खास आकर्षण
विज्ञापन
सोलहाराही तालाब
- फोटो : 1
रेवाड़ी।
रेवाड़ी अहीरवाल क्षेत्र का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर है जो अपनी विरासत के लिए जाना जाता है। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर यहां के प्राचीन और महत्वपूर्ण स्थलों को विशेष रूप से याद किया जाता है। यहां पुराने भाप इंजन, सोलहाराही तालाब और पूरन सिंह बाग में पांच छतरियों के समूह सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
ये स्थल न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखते हैं बल्कि क्षेत्र की पहचान भी हैं। आज इनमें से कई स्थल विकसित होकर पर्यटन केंद्र बन चुके हैं जबकि कुछ संरक्षण की प्रतीक्षा में हैं। कई स्थलों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जा चुका है।
-- -- -- -- -- --
सोलह मार्ग के मिलान से बना सोलहाराही तालाब
सोलहाराही तालाब शहर के सेक्टर में स्थित प्राचीनतम तालाब है। 17वीं व 18वीं सदी के मुगल साम्राज्य की दास्तान का मूक गवाह रहा यह तालाब जनता ने सामूहिक प्रयासों से चंदा इकट्ठा करके बनवाया था। उस समय सोलह मार्ग यहां आकर मिलते थे, इसलिए इसका नाम सोलह राही पड़ गया। शहर का पानी खारा था, इसलिए पहले लोग सोलह राही स्थित कुओं से पेयजल लाते थे। कुछ दंत कथाओं के अनुसार, रुद्र सिंह ने इस ऐतिहासिक तालाब का निर्माण कराया था। 16 रास्तों के मिलान पर ढलान में स्थापित इस सरोवर को सोलह राही से ही जाना जाता है। तालाब में बने घाट, बावड़ियां व सीढ़ियों को संवारा गया है। तालाबों के चारों ओर नए सिरे से घाट, छतरियां व सीढ़ियां बनाई गई हैं। साथ ही लोगों के बैठने के लिए छतरियां बनाई गई हैं।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- --
अद्भुत निर्माण कला और कारीगरी से प्रसिद्ध है बड़ा तालाब
प्राचीन हनुमान मंदिर के पास स्थित तेज सरोवर को वर्तमान में बड़ा तालाब नाम से जाना जाता है। रेवाड़ी के राजा राव राम सिंह ने पानी की किल्लत के कारण इस तालाब को बनवाना शुरू किया था लेकिन उसी समय राजा माधव राव सिंधिया ने रेवाड़ी पर धावा बोल दिया और प्रजा हितैषी राजा राम सिंह शौर्य दिखाते हुए शहीद हो गए थे। इसके बाद तालाब निर्माण कार्य बंद हो गया। रेवाड़ी निवासी जब पानी की कमी से तंग होने लगे तो एक और राजा राव तेज सिंह ने अपने शासनकाल में तालाब निर्माण के रुके कार्य को वर्ष 1772 में शुरू करवाया जो 1776 में तैयार हुआ। इस तालाब की निर्माण कला और कारीगरी अद्भुत है। इसमें गऊ घाट, इमली घाट, प्राचीन हनुमान मंदिर व शिव मंदिर प्रतिष्ठित हैं। राजा राव तेज सिंह द्वारा इस तालाब को पूरा करवाने के कारण ही इसका नाम तेज सरोवर पड़ गया।
-- -- -- -- -- -- -- --
पुराने भाप इंजन बने आकर्षण का केंद्र
रेवाड़ी स्थित स्टीम लोकोमोटिव शेड को देखने के लिए विदेशों से पर्यटक आते हैं। शेड की स्थापना 1893 में हुई थी और यह बॉम्बे बड़ोदा और सेंट्रल इंडिया रेलवे के अधीन था। यहां पुराने भाप इंजन आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन इंजन में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी सबसे पुराना और सबसे हल्का फेयरी क्वीन (1895 यूनाइटेड किंगडम) शामिल है। इसके अलावा रेवाड़ी किंग, साइब, सुल्तान, सिंध, अंगद, अकबर, आजाद, शेर-ए-पंजाब, विराट और शक्तिमान नाम के भाप इंजन पर्यटकों के लिए संभाल कर रखे गए हैं। यहां कई बॉलीवुड फिल्मों जैसे गुरु, गांधी-माई फादर, रंग दे बसंती, गदर एक प्रेम कथा, भाग मिल्खा भाग, 1942-ए लव स्टोरी, सुल्तान आदि की शूटिंग हुई है।
-- -- -- -- -- --
पांच छतरियों का एक समूह
रेजांगला स्मारक के सामने पूरन सिंह बाग में पांच छतरियों के समूह को हरियाणा सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया है। इसके साथ-साथ ऐतिहासिक स्थल और अवशेष को संरक्षित क्षेत्र में शामिल किया है। यहां पांच छतरियों का एक समूह स्थित है। इन छतरियों के वर्तमान स्थान पर स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम के दादा राव तेज सिंह ने 40 बीघा का एक निजी उद्यान (बाग) बनवाया था। पहली, दूसरी और चौथी छतरियां एक मंजिला और अष्टकोणीय हैं। वे अष्टकोणीय ड्रमों द्वारा समर्थित गुंबददार छतों की विशेषता रखते हैं जो एक भव्य दृश्य प्रभाव पैदा करते हैं। प्रत्येक में सभी तरफ कई नुकीले मेहराबदार उद्घाटन हैं जो उनके आकर्षण को बढ़ाते हैं। इसमें एक केंद्रीय कक्ष भी है जो यह सुझाव देता है कि यह किसी विशेष कार्य के लिए इस्तेमाल किया जाता होगा।
-- -- -- -- -- -- -
वर्जन
रेवाड़ी अहीरवाल क्षेत्र का एक ऐतिहासिक शहर है। आज इनमें से कई स्थल विकसित होकर पर्यटन केंद्र बन चुके हैं। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर यहां के प्राचीन और महत्वपूर्ण स्थलों को विशेष रूप से याद किया जाता है।
प्रियंका यादव, अध्यक्ष, अहीरवाल हेरिटेज संस्था
विज्ञापन
रेवाड़ी अहीरवाल क्षेत्र का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर है जो अपनी विरासत के लिए जाना जाता है। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर यहां के प्राचीन और महत्वपूर्ण स्थलों को विशेष रूप से याद किया जाता है। यहां पुराने भाप इंजन, सोलहाराही तालाब और पूरन सिंह बाग में पांच छतरियों के समूह सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
ये स्थल न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखते हैं बल्कि क्षेत्र की पहचान भी हैं। आज इनमें से कई स्थल विकसित होकर पर्यटन केंद्र बन चुके हैं जबकि कुछ संरक्षण की प्रतीक्षा में हैं। कई स्थलों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जा चुका है।
विज्ञापन
सोलह मार्ग के मिलान से बना सोलहाराही तालाब
सोलहाराही तालाब शहर के सेक्टर में स्थित प्राचीनतम तालाब है। 17वीं व 18वीं सदी के मुगल साम्राज्य की दास्तान का मूक गवाह रहा यह तालाब जनता ने सामूहिक प्रयासों से चंदा इकट्ठा करके बनवाया था। उस समय सोलह मार्ग यहां आकर मिलते थे, इसलिए इसका नाम सोलह राही पड़ गया। शहर का पानी खारा था, इसलिए पहले लोग सोलह राही स्थित कुओं से पेयजल लाते थे। कुछ दंत कथाओं के अनुसार, रुद्र सिंह ने इस ऐतिहासिक तालाब का निर्माण कराया था। 16 रास्तों के मिलान पर ढलान में स्थापित इस सरोवर को सोलह राही से ही जाना जाता है। तालाब में बने घाट, बावड़ियां व सीढ़ियों को संवारा गया है। तालाबों के चारों ओर नए सिरे से घाट, छतरियां व सीढ़ियां बनाई गई हैं। साथ ही लोगों के बैठने के लिए छतरियां बनाई गई हैं।
विज्ञापन
अद्भुत निर्माण कला और कारीगरी से प्रसिद्ध है बड़ा तालाब
प्राचीन हनुमान मंदिर के पास स्थित तेज सरोवर को वर्तमान में बड़ा तालाब नाम से जाना जाता है। रेवाड़ी के राजा राव राम सिंह ने पानी की किल्लत के कारण इस तालाब को बनवाना शुरू किया था लेकिन उसी समय राजा माधव राव सिंधिया ने रेवाड़ी पर धावा बोल दिया और प्रजा हितैषी राजा राम सिंह शौर्य दिखाते हुए शहीद हो गए थे। इसके बाद तालाब निर्माण कार्य बंद हो गया। रेवाड़ी निवासी जब पानी की कमी से तंग होने लगे तो एक और राजा राव तेज सिंह ने अपने शासनकाल में तालाब निर्माण के रुके कार्य को वर्ष 1772 में शुरू करवाया जो 1776 में तैयार हुआ। इस तालाब की निर्माण कला और कारीगरी अद्भुत है। इसमें गऊ घाट, इमली घाट, प्राचीन हनुमान मंदिर व शिव मंदिर प्रतिष्ठित हैं। राजा राव तेज सिंह द्वारा इस तालाब को पूरा करवाने के कारण ही इसका नाम तेज सरोवर पड़ गया।
पुराने भाप इंजन बने आकर्षण का केंद्र
रेवाड़ी स्थित स्टीम लोकोमोटिव शेड को देखने के लिए विदेशों से पर्यटक आते हैं। शेड की स्थापना 1893 में हुई थी और यह बॉम्बे बड़ोदा और सेंट्रल इंडिया रेलवे के अधीन था। यहां पुराने भाप इंजन आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन इंजन में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी सबसे पुराना और सबसे हल्का फेयरी क्वीन (1895 यूनाइटेड किंगडम) शामिल है। इसके अलावा रेवाड़ी किंग, साइब, सुल्तान, सिंध, अंगद, अकबर, आजाद, शेर-ए-पंजाब, विराट और शक्तिमान नाम के भाप इंजन पर्यटकों के लिए संभाल कर रखे गए हैं। यहां कई बॉलीवुड फिल्मों जैसे गुरु, गांधी-माई फादर, रंग दे बसंती, गदर एक प्रेम कथा, भाग मिल्खा भाग, 1942-ए लव स्टोरी, सुल्तान आदि की शूटिंग हुई है।
पांच छतरियों का एक समूह
रेजांगला स्मारक के सामने पूरन सिंह बाग में पांच छतरियों के समूह को हरियाणा सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया है। इसके साथ-साथ ऐतिहासिक स्थल और अवशेष को संरक्षित क्षेत्र में शामिल किया है। यहां पांच छतरियों का एक समूह स्थित है। इन छतरियों के वर्तमान स्थान पर स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम के दादा राव तेज सिंह ने 40 बीघा का एक निजी उद्यान (बाग) बनवाया था। पहली, दूसरी और चौथी छतरियां एक मंजिला और अष्टकोणीय हैं। वे अष्टकोणीय ड्रमों द्वारा समर्थित गुंबददार छतों की विशेषता रखते हैं जो एक भव्य दृश्य प्रभाव पैदा करते हैं। प्रत्येक में सभी तरफ कई नुकीले मेहराबदार उद्घाटन हैं जो उनके आकर्षण को बढ़ाते हैं। इसमें एक केंद्रीय कक्ष भी है जो यह सुझाव देता है कि यह किसी विशेष कार्य के लिए इस्तेमाल किया जाता होगा।
वर्जन
रेवाड़ी अहीरवाल क्षेत्र का एक ऐतिहासिक शहर है। आज इनमें से कई स्थल विकसित होकर पर्यटन केंद्र बन चुके हैं। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर यहां के प्राचीन और महत्वपूर्ण स्थलों को विशेष रूप से याद किया जाता है।
प्रियंका यादव, अध्यक्ष, अहीरवाल हेरिटेज संस्था

सोलहाराही तालाब- फोटो : 1

सोलहाराही तालाब- फोटो : 1

सोलहाराही तालाब- फोटो : 1