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Rewari News: एटीएम बूथ से एसी चोरी के दोषी पर कोर्ट ने लगाया 5 हजार रुपये का जुर्माना
Sat, 27 Sep 2025 08:11 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 27 Sep 2025 08:11 PM IST
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रेवाड़ी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बेनिका की अदालत ने एटीएम बूथ से एसी चोरी करने के मामले में आशाराम को दोषी करार देते हुए उसके ऊपर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर 7 दिन के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोषी की ओर से मौके पर जुर्माना अदा किया गया।
जज ने कहा कि दोषी व्यक्ति की आयु, पूर्ववृत्त, भविष्य के पहलू और आश्रितों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय का मत है कि न्याय तभी सर्वोत्तम होगा जब दोषी को सजा दी जाए। कोर्ट ने दोषी आशाराम को जुर्माना और जुर्माना न चुकाने पर साधारण कारावास की सजा सुनाई।
आशाराम के वकील ने दलील दी थी कि दोषी गरीब है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मामला 2020 से लंबित है और दोषी का आचरण अच्छा रहा है। दोषी एसी सर्विसमैन के रूप में काम करता था। उसे विशिष्ट परिस्थितियों के कारण फंसाया गया है।
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यह भी दलील दी गई कि दोषी परिवार का इकलौता कमाने वाला है। परिवार में वृद्ध माता-पिता और 3-4 वर्ष की आयु के नाबालिग बच्चे हैं। पूरी जिम्मेदारी उसी पर है। अनुरोध किया गया उसे रियायत दी जाए।
यह भी बताया कि वह प्रबंधक के निर्देश पर एटीएम बूथ पर गया था और गार्ड की अनुमति से एसी की मरम्मत कर रहा था। इसके बाद वह एसी को मरम्मत की दुकान पर ले गया क्योंकि आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं थे। हालांकि, कुछ समय बाद उसे पता चला कि उसका दोस्त एसी ले गया था। उसे झूठा फंसाया गया है और वह निर्दोष है।
वहीं दूसरे पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि दोषी के साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए। यह भी तर्क दिया गया कि दोषी ने सार्वजनिक स्थान से चोरी की है और इसलिए दोषी के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी समाज में नकारात्मक संदेश देगी।
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जज ने कहा कि दोषी व्यक्ति की आयु, पूर्ववृत्त, भविष्य के पहलू और आश्रितों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय का मत है कि न्याय तभी सर्वोत्तम होगा जब दोषी को सजा दी जाए। कोर्ट ने दोषी आशाराम को जुर्माना और जुर्माना न चुकाने पर साधारण कारावास की सजा सुनाई।
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आशाराम के वकील ने दलील दी थी कि दोषी गरीब है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मामला 2020 से लंबित है और दोषी का आचरण अच्छा रहा है। दोषी एसी सर्विसमैन के रूप में काम करता था। उसे विशिष्ट परिस्थितियों के कारण फंसाया गया है।
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यह भी दलील दी गई कि दोषी परिवार का इकलौता कमाने वाला है। परिवार में वृद्ध माता-पिता और 3-4 वर्ष की आयु के नाबालिग बच्चे हैं। पूरी जिम्मेदारी उसी पर है। अनुरोध किया गया उसे रियायत दी जाए।
यह भी बताया कि वह प्रबंधक के निर्देश पर एटीएम बूथ पर गया था और गार्ड की अनुमति से एसी की मरम्मत कर रहा था। इसके बाद वह एसी को मरम्मत की दुकान पर ले गया क्योंकि आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं थे। हालांकि, कुछ समय बाद उसे पता चला कि उसका दोस्त एसी ले गया था। उसे झूठा फंसाया गया है और वह निर्दोष है।
वहीं दूसरे पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि दोषी के साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए। यह भी तर्क दिया गया कि दोषी ने सार्वजनिक स्थान से चोरी की है और इसलिए दोषी के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी समाज में नकारात्मक संदेश देगी।