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Rewari News: बढ़ती आबादी के बीच मजबूत होगी शहर की जलापूर्ति व्यवस्था
Sun, 24 May 2026 07:09 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 24 May 2026 07:09 PM IST
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दिल्ली रोड स्थित जेएलएन नहर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। शहर में लगातार बढ़ रहे पेयजल संकट के बीच लोगों के लिए राहतभरी खबर है। रामगढ़-भगवानपुर क्षेत्र में नए वाटर टैंक के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जनस्वास्थ्य विभाग ने करीब 8 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले टैंक के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है।
टैंक के बनने से शहर की वाटर स्टोरेज क्षमता में इजाफा होगा। विभाग के अनुसार टैंक में कम से कम चार दिन का अतिरिक्त पानी स्टोर किया जा सकेगा। ऐसे में नहर बंद होने या तकनीकी खराबी की स्थिति में भी शहरवासियों को नियमित जलापूर्ति मिलती रहेगी।
रेवाड़ी शहर की आबादी तेजी से बढ़ रही है जबकि मौजूदा वाटर टैंक अब जरूरत के मुकाबले छोटे पड़ने लगे हैं। खासतौर पर गर्मियों के दौरान पानी की मांग बढ़ने से स्टोरेज जल्द खत्म हो जाता है और कई इलाकों में किल्लत शुरू हो जाती है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि रामगढ़-भगवानपुर परियोजना शुरू होने के बाद पानी की समस्या में काफी हद तक राहत मिलेगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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वहीं शहर की वाटर सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए जाटूवास गांव में नगर परिषद की जमीन पर भी नया टैंक बनाने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए जमीन का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, हालांकि फिलहाल यह फाइल लंबित पड़ी है। यदि जाटूवास में भी टैंक का निर्माण होता है तो शहर के कई इलाकों में लंबे समय से बनी लो-प्रेशर की समस्या से लोगों को स्थायी राहत मिल सकती है।
इंसेट
लिसाना में जमीन का मामला अटका
जहां रामगढ़-भगवानपुर प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है वहीं लिसाना में जमीन अधिग्रहण का मामला अभी भी अटका है। विभाग ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से जमीन लेने की प्रक्रिया में जुटा है, लेकिन किसानों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन पाई है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही जमीन का विवाद सुलझेगा, वहां भी छोटे और बड़े वाटर टैंकों का निर्माण किया जाएगा ताकि शहर की जल भंडारण क्षमता और मजबूत हो सके।
अभी क्या है स्थिति:
फिलहाल शहर की जलापूर्ति मुख्य रूप से लिसाना और कालाका स्थित वाटर टैंकों पर निर्भर है। लिसाना में तीन और कालाका में पांच वाटर टैंक संचालित हैं। इनकी क्षमता अधिकतम 15 से 20 दिन तक पानी स्टोर करने की है। नहर बंद होने या तकनीकी खराबी के दौरान अक्सर शहर में जल संकट गहरा जाता है। ऐसे में रामगढ़-भगवानपुर का नया टैंक इमरजेंसी के समय शहर के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
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इंसेट
अभी जनस्वास्थ्य विभाग के पास लगभग 30 प्रतिशत पानी है
रेवाड़ी। आने वाले दिनों में पानी की समस्या और बढ़ सकती है। अभी जनस्वास्थ्य विभाग के पास लगभग 30 प्रतिशत पानी ही बचा है। इसी वजह से शहर में पहले से ही एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार पानी का मुख्य स्रोत जवाहर लाल नेहरू नहर से आने वाला पानी है। यदि यह पानी समय पर नहीं आया तो समस्या और गंभीर हो जाएगी। पहले 28 मई को नहर से पानी आना था लेकिन अब 2 जून तक पानी पहुंचने की उम्मीद है। गर्मी बढ़ने के कारण लोगों की पानी की जरूरत भी बढ़ गई है। इसलिए विभाग ने करीब 15 दिन पहले ही रोटेशन सिस्टम शुरू कर दिया था। यानी एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। अभी पानी को जमा करने के लिए कालाका और लिसाना में टैंक बनाए गए हैं। शहर में रोज करीब 40 लाख लीटर पानी की जरूरत होती है लेकिन कई जगह अवैध कनेक्शन होने के कारण पानी की बर्बादी भी हो रही है। विभाग के जेई हेमंत कुमा ने लोगों से अपील की है कि पानी को बर्बाद न करें। गाड़ी धोने और जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करने से बचें ताकि सभी लोगों को पानी मिल सके।
वर्जन:
रामगढ़-भगवानपुर में टैंक निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो चुका है। टेंडर भी अलॉट कर दिया गया है। यहां 8 एमएलडी क्षमता का वाटर टैंक बनाया जाएगा। - विनय प्रकाश चौहान, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग
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रेवाड़ी। शहर में लगातार बढ़ रहे पेयजल संकट के बीच लोगों के लिए राहतभरी खबर है। रामगढ़-भगवानपुर क्षेत्र में नए वाटर टैंक के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जनस्वास्थ्य विभाग ने करीब 8 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले टैंक के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है।
टैंक के बनने से शहर की वाटर स्टोरेज क्षमता में इजाफा होगा। विभाग के अनुसार टैंक में कम से कम चार दिन का अतिरिक्त पानी स्टोर किया जा सकेगा। ऐसे में नहर बंद होने या तकनीकी खराबी की स्थिति में भी शहरवासियों को नियमित जलापूर्ति मिलती रहेगी।
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रेवाड़ी शहर की आबादी तेजी से बढ़ रही है जबकि मौजूदा वाटर टैंक अब जरूरत के मुकाबले छोटे पड़ने लगे हैं। खासतौर पर गर्मियों के दौरान पानी की मांग बढ़ने से स्टोरेज जल्द खत्म हो जाता है और कई इलाकों में किल्लत शुरू हो जाती है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि रामगढ़-भगवानपुर परियोजना शुरू होने के बाद पानी की समस्या में काफी हद तक राहत मिलेगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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वहीं शहर की वाटर सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए जाटूवास गांव में नगर परिषद की जमीन पर भी नया टैंक बनाने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए जमीन का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, हालांकि फिलहाल यह फाइल लंबित पड़ी है। यदि जाटूवास में भी टैंक का निर्माण होता है तो शहर के कई इलाकों में लंबे समय से बनी लो-प्रेशर की समस्या से लोगों को स्थायी राहत मिल सकती है।
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लिसाना में जमीन का मामला अटका
जहां रामगढ़-भगवानपुर प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है वहीं लिसाना में जमीन अधिग्रहण का मामला अभी भी अटका है। विभाग ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से जमीन लेने की प्रक्रिया में जुटा है, लेकिन किसानों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन पाई है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही जमीन का विवाद सुलझेगा, वहां भी छोटे और बड़े वाटर टैंकों का निर्माण किया जाएगा ताकि शहर की जल भंडारण क्षमता और मजबूत हो सके।
अभी क्या है स्थिति:
फिलहाल शहर की जलापूर्ति मुख्य रूप से लिसाना और कालाका स्थित वाटर टैंकों पर निर्भर है। लिसाना में तीन और कालाका में पांच वाटर टैंक संचालित हैं। इनकी क्षमता अधिकतम 15 से 20 दिन तक पानी स्टोर करने की है। नहर बंद होने या तकनीकी खराबी के दौरान अक्सर शहर में जल संकट गहरा जाता है। ऐसे में रामगढ़-भगवानपुर का नया टैंक इमरजेंसी के समय शहर के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
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अभी जनस्वास्थ्य विभाग के पास लगभग 30 प्रतिशत पानी है
रेवाड़ी। आने वाले दिनों में पानी की समस्या और बढ़ सकती है। अभी जनस्वास्थ्य विभाग के पास लगभग 30 प्रतिशत पानी ही बचा है। इसी वजह से शहर में पहले से ही एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार पानी का मुख्य स्रोत जवाहर लाल नेहरू नहर से आने वाला पानी है। यदि यह पानी समय पर नहीं आया तो समस्या और गंभीर हो जाएगी। पहले 28 मई को नहर से पानी आना था लेकिन अब 2 जून तक पानी पहुंचने की उम्मीद है। गर्मी बढ़ने के कारण लोगों की पानी की जरूरत भी बढ़ गई है। इसलिए विभाग ने करीब 15 दिन पहले ही रोटेशन सिस्टम शुरू कर दिया था। यानी एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। अभी पानी को जमा करने के लिए कालाका और लिसाना में टैंक बनाए गए हैं। शहर में रोज करीब 40 लाख लीटर पानी की जरूरत होती है लेकिन कई जगह अवैध कनेक्शन होने के कारण पानी की बर्बादी भी हो रही है। विभाग के जेई हेमंत कुमा ने लोगों से अपील की है कि पानी को बर्बाद न करें। गाड़ी धोने और जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करने से बचें ताकि सभी लोगों को पानी मिल सके।
वर्जन:
रामगढ़-भगवानपुर में टैंक निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो चुका है। टेंडर भी अलॉट कर दिया गया है। यहां 8 एमएलडी क्षमता का वाटर टैंक बनाया जाएगा। - विनय प्रकाश चौहान, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग