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Rewari News: शहरवासियों को अभी झेलना होगा जल संकट
Thu, 04 Jan 2024 10:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 04 Jan 2024 10:47 PM IST
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पानी की अभाव में सूखी पड़ी जेएलएन नहर। संवाद
रेवाड़ी। शहर के लोगों को अभी पेयजल संकट से राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। 1 जनवरी को नहर में आने वाला पानी अब 7 जनवरी तक आने की संभावना है। लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी एक दिन छोड़कर एक दिन पानी सप्लाई किया जाएगा। इसमें भी पीने देने के समय में 10 मिनट की कटौती की गई है।
विभाग ने पानी की समस्या को देखते हुए 11 दिसंबर से अल्टरनेट सप्लाई शुरू की थी। अब जलघरों में तली तक पानी पहुंच गया है। इधर-उधर से ट्यूबवेल से पानी एकत्रित कर काम चलाया जा रहा है। विभाग के कनिष्ठ अभियंता हेमंत ने बताया कि शहर के लोगों को पानी की कोई दिक्कत नहीं रहे, इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरे ट्यूबवेलों से पानी एकत्रित कर काम चलाया जा रहा है। नहर में अभी दो दिन बाद ही पानी पहुंचने की संभावना है। ऐसे में विभाग की लोगों से अपील है कि पानी बर्बाद न करें।
7 जनवरी को सुबह पानी आने की संभावना
कनिष्ठ अभियंता ने बताया कि पहले खुबड़ू हेड से 1 जनवरी को पानी छोड़ा जाना था, लेकिन अब यह वीरवार की रात को वहां से छोड़ने की संभावना है। यदि वहां से पानी छोड़ा जाता है तो शुक्रवार की शाम या शनिवार की सुबह रेवाड़ी जेएलएन में पहुंच जाएगा। इसके बाद टैंकों को भरने का काम शुरू किया जाएगा। जिससे अगले दिन से पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
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चार साल से संकट बरकरार
शहर में पेयजल राशनिंग करीब चार साल से चल रही है। नहरी पानी का शेड्यूल पहले 16-16 दिन का था। यानी 16 दिन नहर में पानी आता था और 16 दिन नहर बंद रहती थी। अब 2 साल से शेड्यूल 16-24 का हो गया है। अब 16 दिन नहर में पानी आता है और 24 दिन बंद रहता है। पिछले माह 8 दिसंबर को नहरी में पानी आना बंद हुआ था। ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग के पास अब इतनी स्टोरेज क्षमता नहीं है कि शहर वासियों को हर दिन पेयजल सप्लाई दी जा सके, इसलिए हर माह पेयजल राशनिंग की जाती है। शनिवार तक नहर में पानी आता है तो सोमवार को पुराने शहर को पेयजल सप्लाई की जाएगी।
नहरी पानी पर आधारित है जीवन
शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहरी पानी पर आधारित है। नहर के पानी को कालाका और लिसाना में बने वाटर टैंक में स्टोर किया जाता है। वहां से बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से शहर में पानी की आपूर्ति होती है। कालाका जलघर में बनाए गए 5 वाटर टैंकों से शहर के 70 फीसदी हिस्से में पेयजल आपूर्ति होती है। वहीं, लिसाना स्थित जलघर के तीन वाटर टैंकों से 30 फीसदी भाग में पानी सप्लाई होता है। दोनों जलघरों से पूरे शहर को 15 से 20 दिन ही पानी आपूर्ति हो सकती है। 8 दिसंबर को नहर में पानी बंद हुआ था, जिसके 1 जनवरी को आने की संभावना थी, मगर शेड्यूल में बदलाव करने से अब 7 जनवरी तक नहर में पानी पहुंचेगा, जो शहरवासियों के लिए बड़ी दिक्कत है।
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वर्जन :
नहर में पानी आने के शेड्यूल को बदल दिया गया है। पहले एक जनवरी को नहर में पानी आना था। अब वीरवार को उच्चाधिकारियों से बातचीत की गई है। जिसके बाद रात को खूबड़ू हेड से पानी छोड़े जाने की संभावना है। यदि वहां से पानी छोड़ दिया जाता है तो सोमवार से शहरवासियों को रेगुलर पानी की सप्लाई दी जाएगी। -हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।
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विभाग ने पानी की समस्या को देखते हुए 11 दिसंबर से अल्टरनेट सप्लाई शुरू की थी। अब जलघरों में तली तक पानी पहुंच गया है। इधर-उधर से ट्यूबवेल से पानी एकत्रित कर काम चलाया जा रहा है। विभाग के कनिष्ठ अभियंता हेमंत ने बताया कि शहर के लोगों को पानी की कोई दिक्कत नहीं रहे, इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरे ट्यूबवेलों से पानी एकत्रित कर काम चलाया जा रहा है। नहर में अभी दो दिन बाद ही पानी पहुंचने की संभावना है। ऐसे में विभाग की लोगों से अपील है कि पानी बर्बाद न करें।
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7 जनवरी को सुबह पानी आने की संभावना
कनिष्ठ अभियंता ने बताया कि पहले खुबड़ू हेड से 1 जनवरी को पानी छोड़ा जाना था, लेकिन अब यह वीरवार की रात को वहां से छोड़ने की संभावना है। यदि वहां से पानी छोड़ा जाता है तो शुक्रवार की शाम या शनिवार की सुबह रेवाड़ी जेएलएन में पहुंच जाएगा। इसके बाद टैंकों को भरने का काम शुरू किया जाएगा। जिससे अगले दिन से पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
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चार साल से संकट बरकरार
शहर में पेयजल राशनिंग करीब चार साल से चल रही है। नहरी पानी का शेड्यूल पहले 16-16 दिन का था। यानी 16 दिन नहर में पानी आता था और 16 दिन नहर बंद रहती थी। अब 2 साल से शेड्यूल 16-24 का हो गया है। अब 16 दिन नहर में पानी आता है और 24 दिन बंद रहता है। पिछले माह 8 दिसंबर को नहरी में पानी आना बंद हुआ था। ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग के पास अब इतनी स्टोरेज क्षमता नहीं है कि शहर वासियों को हर दिन पेयजल सप्लाई दी जा सके, इसलिए हर माह पेयजल राशनिंग की जाती है। शनिवार तक नहर में पानी आता है तो सोमवार को पुराने शहर को पेयजल सप्लाई की जाएगी।
नहरी पानी पर आधारित है जीवन
शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहरी पानी पर आधारित है। नहर के पानी को कालाका और लिसाना में बने वाटर टैंक में स्टोर किया जाता है। वहां से बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से शहर में पानी की आपूर्ति होती है। कालाका जलघर में बनाए गए 5 वाटर टैंकों से शहर के 70 फीसदी हिस्से में पेयजल आपूर्ति होती है। वहीं, लिसाना स्थित जलघर के तीन वाटर टैंकों से 30 फीसदी भाग में पानी सप्लाई होता है। दोनों जलघरों से पूरे शहर को 15 से 20 दिन ही पानी आपूर्ति हो सकती है। 8 दिसंबर को नहर में पानी बंद हुआ था, जिसके 1 जनवरी को आने की संभावना थी, मगर शेड्यूल में बदलाव करने से अब 7 जनवरी तक नहर में पानी पहुंचेगा, जो शहरवासियों के लिए बड़ी दिक्कत है।
वर्जन :
नहर में पानी आने के शेड्यूल को बदल दिया गया है। पहले एक जनवरी को नहर में पानी आना था। अब वीरवार को उच्चाधिकारियों से बातचीत की गई है। जिसके बाद रात को खूबड़ू हेड से पानी छोड़े जाने की संभावना है। यदि वहां से पानी छोड़ दिया जाता है तो सोमवार से शहरवासियों को रेगुलर पानी की सप्लाई दी जाएगी। -हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।