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Rewari News: महिला किसानों को बताए सफलता के गुण
Wed, 16 Oct 2024 01:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 16 Oct 2024 01:50 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध कृषि महाविद्यालय बावल में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया। इसमें मौजूद 35 महिला किसानों को सफलता के गुण बताए गए।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नरेश कौशिक ने महिलाओं को आचार व मुरब्बे जैसे कम लागत वाले छोटे व्यवसाय को बढ़ावा देकर स्वरोजगार स्थापित करने की सलाह दी। कहा कि इससे महिला किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। उन्होंने कहा कि कुछ प्रगतिशील महिलाओं ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने जज्बे को मजबूत रखा और अपने छोटे से व्यवसाय से अपना रोजगार शुरू किया और अब वे बड़े स्तर पर व्यवसाय चला रही हैं। प्राचार्य ने किसान महिलाओं से पॉलीथिन बैग का इस्तेमाल न करके सब्जियां लेने के लिए अपना थैला घर से ही ले जाने पर जोर दिया।
डॉ. मुकेश कुमार ने किचन गार्डनिंग के बारे में बताया। उन्होंने बाजार की सब्जियों व उनके ऊपर होने वाली रसायनों के प्रयोग के नुकसान और उससे बचाव के तरीके बताए। किचन गार्डनिंग का महत्व बताते हुए कहा कि अपने घर में बाल्टी, गमले, बोतल में आर्गेनिक सब्जियां उगाएं। उन्होंने देसी सब्जियां जैसे की करौंदा, सांठी, बथुआ, चने का साग, चौलाई व देसी करेले का महत्व बताया।
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सफल महिलाओं की कहानियां साझा कीं
कार्यक्रम में डॉ. पूजा ने कुछ सफल महिलाओं की कहानियां साझा कीं। डॉ. सोनम व डॉ. पूजा ने महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने की गृह विज्ञान की कुछ कलाएं सिखाईं। घर पर उत्पाद तैयार करने के तरीके बताए। डॉ. रामस्वरूप ने पशुपालन से संबंधित जानकारी दी। बताया कि पशुओं की कौनसी नस्ल पशुपालन के लिए बढ़िया है। उन्होंने पशुओं की बीमारियों की पहचान व निदान के बारे में बताया। डॉ. रूमी ने मधुमक्खी की विभिन्न प्रजातियों और उनसे मिलने वाली शहद की गुणवत्ता के बारे में बताया।
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बावल। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध कृषि महाविद्यालय बावल में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया। इसमें मौजूद 35 महिला किसानों को सफलता के गुण बताए गए।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नरेश कौशिक ने महिलाओं को आचार व मुरब्बे जैसे कम लागत वाले छोटे व्यवसाय को बढ़ावा देकर स्वरोजगार स्थापित करने की सलाह दी। कहा कि इससे महिला किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। उन्होंने कहा कि कुछ प्रगतिशील महिलाओं ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने जज्बे को मजबूत रखा और अपने छोटे से व्यवसाय से अपना रोजगार शुरू किया और अब वे बड़े स्तर पर व्यवसाय चला रही हैं। प्राचार्य ने किसान महिलाओं से पॉलीथिन बैग का इस्तेमाल न करके सब्जियां लेने के लिए अपना थैला घर से ही ले जाने पर जोर दिया।
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डॉ. मुकेश कुमार ने किचन गार्डनिंग के बारे में बताया। उन्होंने बाजार की सब्जियों व उनके ऊपर होने वाली रसायनों के प्रयोग के नुकसान और उससे बचाव के तरीके बताए। किचन गार्डनिंग का महत्व बताते हुए कहा कि अपने घर में बाल्टी, गमले, बोतल में आर्गेनिक सब्जियां उगाएं। उन्होंने देसी सब्जियां जैसे की करौंदा, सांठी, बथुआ, चने का साग, चौलाई व देसी करेले का महत्व बताया।
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सफल महिलाओं की कहानियां साझा कीं
कार्यक्रम में डॉ. पूजा ने कुछ सफल महिलाओं की कहानियां साझा कीं। डॉ. सोनम व डॉ. पूजा ने महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने की गृह विज्ञान की कुछ कलाएं सिखाईं। घर पर उत्पाद तैयार करने के तरीके बताए। डॉ. रामस्वरूप ने पशुपालन से संबंधित जानकारी दी। बताया कि पशुओं की कौनसी नस्ल पशुपालन के लिए बढ़िया है। उन्होंने पशुओं की बीमारियों की पहचान व निदान के बारे में बताया। डॉ. रूमी ने मधुमक्खी की विभिन्न प्रजातियों और उनसे मिलने वाली शहद की गुणवत्ता के बारे में बताया।