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टेकचंद का अब गोला फेंकने में चयन
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तीन साल से ओलंपिक में मेडल लाने का लक्ष्य निर्धारित कर पसीना बहा रहे रेवाड़ी निवासी टेकचंद को नहीं बल्कि देश की उम्मीदों को मुकाबले से आठ दिन पहले बड़ा झटका लगा है। टोक्यो में उद्घाटन समारोह में ध्वजवाहक रहे टेकचंद अब तीन सितंबर को होने वाले भाला फेंक(ज्वैलिन थ्रो) में अपना दम नहीं दिखा पाएगा। मंगलवार को हुए चिकित्सीय प्रशिक्षण में उनकी कैटेगरी एफ-54 को बदलकर एफ-55 कर दिया गया है। इसमें वह अब 27 अगस्त को होने वाले शॉट पुट( गोला फेंक) में अपना दम दिखाएंगे। ऐसे में सवाल है कि आखिर तीन साल तक भाला फेंक का प्रशिक्षण लेने वाले टेकचंद की मुकाबले से ठीक पहले क्यों खेल ही बदल दिया गया। टेकचंद की मां विद्या देवी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि अपने खर्चे पर दो-दो लाख रुपये के कोच रखकर ज्वैलिन थ्रो(भाला फेंक) की तैयारी तीन साल से टेकचंद कर रहा था। इन सालों में वह अपनी बहनों तक से नहीं मिला, अब टोक्यो जाने के बाद षड्यंत्र के तहत उसका खेल ही बदल दिया गया। मां ने कहा कि बावजूद इसके टेकचंद निराश नहीं है और मेडल लाने का दावा कर रहा है। मां ने कहा कि हमें इसका बड़ा दर्द है। 27 अगस्त को भारतीय समयानुसार शाम पांच बजे मुकाबला होना है
5 साल तक की भाला फेंक की तैयारी, अब गोला फेंक लेंगे हिस्सा
पैरा ओलंपिक खिलाड़ी टेकचंद पिछले तीन साल से एफ 54 कैटेगरी में भाला फेंक की तैयारी में ही जुटे हुए थे। टोक्यो जाने के पश्चात पैरा ओलंपिक कमेटी की ओर से भी कैटेगरी जांच की जाती है। कमेटी ने जांच के पश्चात टेकचंद की कैटेगरी एफ 54 की बजाय एफ 55 कर दी है। एफ 55 कैटेगरी में टेकचंद भाला फेंक नहीं बल्कि गोला फेंक में हिस्सा लेंगे। वैसे तो टेकचंद शॉटपुट यानी गोला फेंक स्पर्धा में भी पदक हासिल कर चुके हैं लेकिन इस बार उन्होंने इस खेल की प्रैक्टिस ही नहीं की। ऐसे में अचानक से कैटेगरी का बदलना उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है। टेकचंद से दूरभाष पर बातचीत की तो उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की कि उनकी कैटेगरी कमेटी की जांच के बाद बदल दी गई है। टेकचंद ने कहा कि वह एफ 55 कैटेगरी में भी बेहतर प्रदर्शन करके देश के लिए मेडल जीतने का पूरा प्रयास करेंगे।
टेकचंद जिस भाला फेंक स्पर्धा की तैयारी में जुटे थे उसमें उनका खेल काफी निखर चुका था। दिव्यांग टेकचंद के लिए भाला की बजाय गोला फेंकना इसलिए उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है क्योंकि गोले का वजन भाले से काफी ज्यादा होता है। भाले का वजन जहां आधा किलो के लगभग होता है वहीं गोले का वजन चार किलो के लगभग होता है। टेकचंद के पूर्व कोच व खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के सहायक निदेशक सतबीर सिंह ने कहा कि जो भी एथलीट पैरा ओलंपिक में जाते हैं उनकी वहां की कमेटी द्वारा कैटेगरी जांच की जाती है। टेकचंद एफ 54 कैटेगरी में तैयारी कर रहे थे लेकिन लगातार प्रैक्टिस करने से उनकी कुछ मांसपेशियां व शरीर के अंग अधिक एक्टिव हो गए हैं। कमर के नीचे के अंगों के अधिक एक्टिव पाए जाने पर उनकी कैटेगरी को एफ 54 से बढ़ाकर एफ 55 किया गया है। कैटेगरी दिव्यांगता के पैमाने पर बदली जाती है।
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- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एफ-54 वर्ग में शॉटपुट और जेवलिन थ्रो में प्रतिभागिता।
- वर्ष 2018 में विश्व पैरा एथलेटिक्स- ग्रांड प्रिक्स की शॉटपुट में रजत पदक।
- वर्ष 2018 में जकार्ता एशियाई खेलों में शॉटपुट में कांस्य पदक। वर्ष 2018 को पंचकूला में आयोजित 18वें नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में शाटपुट और ज्वैलिन थ्रो में स्वर्ण पदक।
- इसी वर्ष बंगलूरू में आयोजित 19वें नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में ज्वैलिन, डिस्कस और शॉटपुट में स्वर्ण पदक।
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5 साल तक की भाला फेंक की तैयारी, अब गोला फेंक लेंगे हिस्सा
पैरा ओलंपिक खिलाड़ी टेकचंद पिछले तीन साल से एफ 54 कैटेगरी में भाला फेंक की तैयारी में ही जुटे हुए थे। टोक्यो जाने के पश्चात पैरा ओलंपिक कमेटी की ओर से भी कैटेगरी जांच की जाती है। कमेटी ने जांच के पश्चात टेकचंद की कैटेगरी एफ 54 की बजाय एफ 55 कर दी है। एफ 55 कैटेगरी में टेकचंद भाला फेंक नहीं बल्कि गोला फेंक में हिस्सा लेंगे। वैसे तो टेकचंद शॉटपुट यानी गोला फेंक स्पर्धा में भी पदक हासिल कर चुके हैं लेकिन इस बार उन्होंने इस खेल की प्रैक्टिस ही नहीं की। ऐसे में अचानक से कैटेगरी का बदलना उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है। टेकचंद से दूरभाष पर बातचीत की तो उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की कि उनकी कैटेगरी कमेटी की जांच के बाद बदल दी गई है। टेकचंद ने कहा कि वह एफ 55 कैटेगरी में भी बेहतर प्रदर्शन करके देश के लिए मेडल जीतने का पूरा प्रयास करेंगे।
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टेकचंद जिस भाला फेंक स्पर्धा की तैयारी में जुटे थे उसमें उनका खेल काफी निखर चुका था। दिव्यांग टेकचंद के लिए भाला की बजाय गोला फेंकना इसलिए उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है क्योंकि गोले का वजन भाले से काफी ज्यादा होता है। भाले का वजन जहां आधा किलो के लगभग होता है वहीं गोले का वजन चार किलो के लगभग होता है। टेकचंद के पूर्व कोच व खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के सहायक निदेशक सतबीर सिंह ने कहा कि जो भी एथलीट पैरा ओलंपिक में जाते हैं उनकी वहां की कमेटी द्वारा कैटेगरी जांच की जाती है। टेकचंद एफ 54 कैटेगरी में तैयारी कर रहे थे लेकिन लगातार प्रैक्टिस करने से उनकी कुछ मांसपेशियां व शरीर के अंग अधिक एक्टिव हो गए हैं। कमर के नीचे के अंगों के अधिक एक्टिव पाए जाने पर उनकी कैटेगरी को एफ 54 से बढ़ाकर एफ 55 किया गया है। कैटेगरी दिव्यांगता के पैमाने पर बदली जाती है।
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- वर्ष 2018 में विश्व पैरा एथलेटिक्स- ग्रांड प्रिक्स की शॉटपुट में रजत पदक।
- वर्ष 2018 में जकार्ता एशियाई खेलों में शॉटपुट में कांस्य पदक। वर्ष 2018 को पंचकूला में आयोजित 18वें नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में शाटपुट और ज्वैलिन थ्रो में स्वर्ण पदक।
- इसी वर्ष बंगलूरू में आयोजित 19वें नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में ज्वैलिन, डिस्कस और शॉटपुट में स्वर्ण पदक।