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Rewari News: राव तुलाराम स्टेडियम में बनेगा सिंथेटिक ट्रैक, 9.79 करोड़ मंजूरी
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रेवाड़ी। 6 साल के इंतजार के बाद खिलाड़ियों को बड़ी सौगात मिल गई है। धावकों के लिए जिला मुख्यालय पर दिल्ली रोड स्थित राव तुलाराम स्टेडियम में सेंडर ट्रैक के स्थान पर अब सिंथेटिक ट्रैक निर्माण किया जाएगा। इसके लिए बजट की स्वीकृति मिल गई है। खेल निदेशालय ने ट्रैक के लिए 9 करोड़ 69 लाख रुपये का बजट मंजूर किया है। ट्रैक पर फ्लड लाइट भी लगेगी, जिसके लिए पहले ही 65 लाख रुपये की राशि की स्वीकृति मिल चुकी है। अब हरियाणा स्पोर्ट्स फिजिकल फिटनेस कमेटी की ओर से जल्द ही ट्रैक निर्माण के लिए ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
खास बात यह रहेगी कि इस ट्रैक के बनने पर यहां पर भी जिले से लेकर नेशनल लेवल तक के खेल आयोजित करवाए जा सकेंगे। इसके साथ ही जिले के खिलाड़ियों के अलावा पड़ोसी जिले महेंद्रगढ़ के खिलाड़ी भी यहां आकर प्रैक्टिस कर सकेंगे। जिले के खिलाड़ियों को गुड़गांव या अन्य जगह प्रैक्टिस के लिए नहीं जाना पड़ेगा। इस ट्रैक के बनने का ये भी फायदा मिलेगा कि जिले से बड़े खिलाड़ी तैयार किए जा सकेंगे। अभी स्टेडियम में सेंडर ट्रैक बना हुआ है, लेकिन इस पर दौड़ने से खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा रहता है। हर माह में एक-दो खिलाड़ियों को दौड़ते समय चोट लग जाती है। साथ ही दौड़ते समय जूतों की ग्रिप भी नहीं बन पाती, जिससे खिलाड़ी नेशनल इवेंट में पिछड़ जाते हैं। मेडल भी कम मिल पाते हैं। अब इसके मंजूरी मिल चुकी है आगे खिलाड़ियों इससे काफी मजबूती मिलेगी।
नेशनल में पदक जीत चुके हैं रेवाड़ी के धावक
पिछले 6 साल के दौरान उच्चस्तरीय ट्रैक न होने के बाद भी रेवाड़ी के धावकों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। यहां के कई खिलाड़ी स्टेट, नेशनल के अलावा पैरा एथलेटिक्स में भी एशियन मेडल प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे में रेवाड़ी के नाम भी कई उपलब्धियां रही हैं। खिलाड़ियों की ओर से भी सिंथेटिक ट्रैक के लिए लंबे समय से मांग की जा रही थी। ट्रैक बनने पर रेवाड़ी से भी इंटरनेशनल लेवल के अच्छे धावक निकल सकते हैं।
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इन जिलों में बने हैं सिंथेटिक ट्रैक
राज्य के गुड़गांव, फरीदाबाद, रोहतक, अंबाला, सोनीपत, पानीपत, भिवानी, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, हिसार और जींद के नरवाना में सिंथेटिक ट्रैक बनाया हुआ है। इसलिए इन जिलों में अब एथलेटिक्स में बेहतर खिलाड़ी निकल रहे हैं।
ट्रैक पर हो सकेंगे ये इवेंट
इस ट्रैक पर दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद, गोला फेंक, भाला फेंक सहित 100 मीटर से लेकर 10 हजार मीटर तक दौड़ शामिल हैं। पुरुषों की 24 और महिलाओं की 23 विधाएं शामिल हैं। अकेले दौड़ के ही कई इवेंट होते हैं।
इसलिए खास है सिंथेटिक ट्रैक
ट्रैक खेल विशेषज्ञ बताते हैं कि सिंथेटिक ट्रैक एक खास तरह की रबर को कुसिंग करके बनाया जाता है। ट्रैक बनाने के लिए पहले मिट्टी और रोड़ी की कई परतें बिछाई जाती हैं। उसके बाद लेवलिंग करने के अलावा सड़क बनाने का काम किया जाता है और फिर ट्रैक के चारों ओर रेलिंग लगाई जाती है। सबसे बाद में प्लास्टिक की घास भी इसमें बिछाई जाती है और तब ट्रैक तैयार होता है। इस ट्रैक पर 8 लेन बनावाई जाएंगी। एक लाइन की चौड़ाई 1.22 से 1.25 मीटर तक होती है। प्रत्येक खिलाड़ी के खड़ा होने के लिए अलग लाइन होती है।
समय में भी आएगा सुधार
एथलेटिक्स कोच डॉ. अनिल यादव ने बताया कि अच्छे रिजल्ट के लिए सिंथेटिक ट्रैक जरूरी है। इस ट्रैक पर अभ्यास करने से परिणाम भी बेहतर आएंगे। खिलाड़ी दौड़ का समय भी अच्छा निकाल पाएंगे। मेडल भी ज्यादा मिलेंगे। खिलाड़ियों को अभ्यास करते समय चोट लगने का डर नहीं रहेगा। स्पीड वर्क भी बेहतर बनेगा और दौड़ में समय भी सुधरेगा।
स्टेडियम में ट्रैक बनता है तो खिलाड़ियों को अभ्यास करने में परेशानी नहीं होगी। यहां ट्रैक पर दौड़ते समय खिलाड़ी गिरकर चोटिल हो जाते हैं। उन्हें चोट से उभरने में काफी समय लगता है, जिससे वह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन खुलकर नहीं कर पाते।
-आदित्य, शॉटपुट खिलाड़ी
बाहर नहीं जाना पड़ेगा
जिले में बहुत से खिलाड़ी गुरुग्राम या फरीदाबाद प्रैक्टिस के लिए जाते हैं। वहां पर सिंथेटिक ट्रैक की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां पर बजट तो मिला है, लेकिन अब काम कब शुरू होगा कुछ कहां नहीं जा सकता, लेकिन यहां सिंथेटिक ट्रैक की सुविधा मिलती है तो जिले के खिलाड़ी और अच्छा प्रदर्शन करेंगे।
-अनुज, जैवलिन थ्रो खिलाड़ी
सिंथेटिक ट्रैक जिले के लिए बड़ी सौगात है। इस उच्चस्तरीय ट्रैक के बजट को मंजूरी मिलने से अब इसके निर्माण की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है। हरियाणा स्पोर्ट फिजिकल फिटनेस कमेटी की ओर से जल्द ही ई-टेंडरिंग कर दी जाएगी। इसके बाद निर्माण शुरू करवा दिया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द ही इस ट्रैक पर खिलाड़ी दौड़ते नजर आएंगे। ट्रैक के मिलने से जिले के साथ ही दूसरे जिलों के धावक भी प्रैक्टिस कर सकेंगे।
-मदनपाल, जिला खेल अधिकारी, रेवाड़ी
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खास बात यह रहेगी कि इस ट्रैक के बनने पर यहां पर भी जिले से लेकर नेशनल लेवल तक के खेल आयोजित करवाए जा सकेंगे। इसके साथ ही जिले के खिलाड़ियों के अलावा पड़ोसी जिले महेंद्रगढ़ के खिलाड़ी भी यहां आकर प्रैक्टिस कर सकेंगे। जिले के खिलाड़ियों को गुड़गांव या अन्य जगह प्रैक्टिस के लिए नहीं जाना पड़ेगा। इस ट्रैक के बनने का ये भी फायदा मिलेगा कि जिले से बड़े खिलाड़ी तैयार किए जा सकेंगे। अभी स्टेडियम में सेंडर ट्रैक बना हुआ है, लेकिन इस पर दौड़ने से खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा रहता है। हर माह में एक-दो खिलाड़ियों को दौड़ते समय चोट लग जाती है। साथ ही दौड़ते समय जूतों की ग्रिप भी नहीं बन पाती, जिससे खिलाड़ी नेशनल इवेंट में पिछड़ जाते हैं। मेडल भी कम मिल पाते हैं। अब इसके मंजूरी मिल चुकी है आगे खिलाड़ियों इससे काफी मजबूती मिलेगी।
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नेशनल में पदक जीत चुके हैं रेवाड़ी के धावक
पिछले 6 साल के दौरान उच्चस्तरीय ट्रैक न होने के बाद भी रेवाड़ी के धावकों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। यहां के कई खिलाड़ी स्टेट, नेशनल के अलावा पैरा एथलेटिक्स में भी एशियन मेडल प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे में रेवाड़ी के नाम भी कई उपलब्धियां रही हैं। खिलाड़ियों की ओर से भी सिंथेटिक ट्रैक के लिए लंबे समय से मांग की जा रही थी। ट्रैक बनने पर रेवाड़ी से भी इंटरनेशनल लेवल के अच्छे धावक निकल सकते हैं।
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इन जिलों में बने हैं सिंथेटिक ट्रैक
राज्य के गुड़गांव, फरीदाबाद, रोहतक, अंबाला, सोनीपत, पानीपत, भिवानी, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, हिसार और जींद के नरवाना में सिंथेटिक ट्रैक बनाया हुआ है। इसलिए इन जिलों में अब एथलेटिक्स में बेहतर खिलाड़ी निकल रहे हैं।
ट्रैक पर हो सकेंगे ये इवेंट
इस ट्रैक पर दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद, गोला फेंक, भाला फेंक सहित 100 मीटर से लेकर 10 हजार मीटर तक दौड़ शामिल हैं। पुरुषों की 24 और महिलाओं की 23 विधाएं शामिल हैं। अकेले दौड़ के ही कई इवेंट होते हैं।
इसलिए खास है सिंथेटिक ट्रैक
ट्रैक खेल विशेषज्ञ बताते हैं कि सिंथेटिक ट्रैक एक खास तरह की रबर को कुसिंग करके बनाया जाता है। ट्रैक बनाने के लिए पहले मिट्टी और रोड़ी की कई परतें बिछाई जाती हैं। उसके बाद लेवलिंग करने के अलावा सड़क बनाने का काम किया जाता है और फिर ट्रैक के चारों ओर रेलिंग लगाई जाती है। सबसे बाद में प्लास्टिक की घास भी इसमें बिछाई जाती है और तब ट्रैक तैयार होता है। इस ट्रैक पर 8 लेन बनावाई जाएंगी। एक लाइन की चौड़ाई 1.22 से 1.25 मीटर तक होती है। प्रत्येक खिलाड़ी के खड़ा होने के लिए अलग लाइन होती है।
समय में भी आएगा सुधार
एथलेटिक्स कोच डॉ. अनिल यादव ने बताया कि अच्छे रिजल्ट के लिए सिंथेटिक ट्रैक जरूरी है। इस ट्रैक पर अभ्यास करने से परिणाम भी बेहतर आएंगे। खिलाड़ी दौड़ का समय भी अच्छा निकाल पाएंगे। मेडल भी ज्यादा मिलेंगे। खिलाड़ियों को अभ्यास करते समय चोट लगने का डर नहीं रहेगा। स्पीड वर्क भी बेहतर बनेगा और दौड़ में समय भी सुधरेगा।
स्टेडियम में ट्रैक बनता है तो खिलाड़ियों को अभ्यास करने में परेशानी नहीं होगी। यहां ट्रैक पर दौड़ते समय खिलाड़ी गिरकर चोटिल हो जाते हैं। उन्हें चोट से उभरने में काफी समय लगता है, जिससे वह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन खुलकर नहीं कर पाते।
-आदित्य, शॉटपुट खिलाड़ी
बाहर नहीं जाना पड़ेगा
जिले में बहुत से खिलाड़ी गुरुग्राम या फरीदाबाद प्रैक्टिस के लिए जाते हैं। वहां पर सिंथेटिक ट्रैक की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां पर बजट तो मिला है, लेकिन अब काम कब शुरू होगा कुछ कहां नहीं जा सकता, लेकिन यहां सिंथेटिक ट्रैक की सुविधा मिलती है तो जिले के खिलाड़ी और अच्छा प्रदर्शन करेंगे।
-अनुज, जैवलिन थ्रो खिलाड़ी
सिंथेटिक ट्रैक जिले के लिए बड़ी सौगात है। इस उच्चस्तरीय ट्रैक के बजट को मंजूरी मिलने से अब इसके निर्माण की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है। हरियाणा स्पोर्ट फिजिकल फिटनेस कमेटी की ओर से जल्द ही ई-टेंडरिंग कर दी जाएगी। इसके बाद निर्माण शुरू करवा दिया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द ही इस ट्रैक पर खिलाड़ी दौड़ते नजर आएंगे। ट्रैक के मिलने से जिले के साथ ही दूसरे जिलों के धावक भी प्रैक्टिस कर सकेंगे।
-मदनपाल, जिला खेल अधिकारी, रेवाड़ी