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Rewari News: गुरु तेगबहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर निबंध लेखन, कहानी वाचन स्पर्धा में विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह
Tue, 04 Nov 2025 12:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 04 Nov 2025 12:04 AM IST
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फोटो : 07रेवाड़ी। शहर स्थित राजकीय वरिष्ठ बाल माध्यमिक विद्यालय में आयोजित निबंध लेखन एवं क
रेवाड़ी। शहर स्थित राजकीय वरिष्ठ बाल माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को सिख धर्म के नौवें गुरु श्री गुरु तेगबहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर निबंध लेखन व कहानी वाचन प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों ने हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और पंजाबी में भागीदारी की। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्र के महान शहीदों और उनके योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
खंड शिक्षा अधिकारी राजेश वर्मा ने कहा कि गुरु तेगबहादुर सिख धर्म के नौवें गुरु थे, जिन्होंने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका जन्म 1 अप्रैल 1621 को अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। उनके पिता गुरु हरगोबिंद सिंह सिख धर्म के छठे गुरु थे। बचपन में उनका नाम त्यागमल था लेकिन वीरता के कारण उन्हें तेगबहादुर नाम मिला जिसका अर्थ है तलवार के धनी।
प्राचार्य डॉ. नम्रता सचदेवा ने कहा कि गुरु तेगबहादुर की शिक्षाएं आज भी समाज को प्रेरणा देती हैं। वे न केवल एक महान गुरु और योद्धा थे बल्कि मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रतीक भी थे।
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हिंदी भाषा के निबंध लेखन में प्रथम स्थान ईश्वर सिंह व अंग्रेजी भाषा में प्रथम स्थान प्रियांशु ने प्राप्त किया। कहानी वाचन प्रतियोगिता में हिंदी में कक्षा 10 के कुणाल जबकि अंग्रेजी में कक्षा 11 के ईश्वर सिंह प्रथम रहे। निर्णायक मंडल में सरोज यादव, रजनी कालरा और बबीता ने अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्टाफ सदस्यों मनोज वशिष्ठ, जितेन्द्र यादव, विकास और कोमल का विशेष सहयोग रहा।
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खंड शिक्षा अधिकारी राजेश वर्मा ने कहा कि गुरु तेगबहादुर सिख धर्म के नौवें गुरु थे, जिन्होंने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका जन्म 1 अप्रैल 1621 को अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। उनके पिता गुरु हरगोबिंद सिंह सिख धर्म के छठे गुरु थे। बचपन में उनका नाम त्यागमल था लेकिन वीरता के कारण उन्हें तेगबहादुर नाम मिला जिसका अर्थ है तलवार के धनी।
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प्राचार्य डॉ. नम्रता सचदेवा ने कहा कि गुरु तेगबहादुर की शिक्षाएं आज भी समाज को प्रेरणा देती हैं। वे न केवल एक महान गुरु और योद्धा थे बल्कि मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रतीक भी थे।
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हिंदी भाषा के निबंध लेखन में प्रथम स्थान ईश्वर सिंह व अंग्रेजी भाषा में प्रथम स्थान प्रियांशु ने प्राप्त किया। कहानी वाचन प्रतियोगिता में हिंदी में कक्षा 10 के कुणाल जबकि अंग्रेजी में कक्षा 11 के ईश्वर सिंह प्रथम रहे। निर्णायक मंडल में सरोज यादव, रजनी कालरा और बबीता ने अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्टाफ सदस्यों मनोज वशिष्ठ, जितेन्द्र यादव, विकास और कोमल का विशेष सहयोग रहा।