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Rewari News: नेशनल हाईवे की स्ट्रीट लाइटें बनीं शोपीस, 1 साल से छह किमी तक अंधेरा
Thu, 15 Jan 2026 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 15 Jan 2026 11:47 PM IST
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रेवाड़ी। धारूहेड़ा में हाईवे पर खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटें। संवाद
धारूहेड़ा। नेशनल हाईवे-48 पर यात्रियों की सुरक्षा के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं लेकिन यह योजना फिलहाल कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है। डिवाइडर के बीच और सड़क के दोनों ओर लाइटें लगाए जाने के करीब एक साल बाद भी नियमित रूप से नहीं जल पा रही हैं।
नतीजतन धारूहेड़ा के मालपुरा से लेकर खरखड़ा तक करीब छह किलोमीटर लंबा हाईवे क्षेत्र रात होते ही अंधेरे में डूब जाता है जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे पर स्ट्रीट लाइटें लगाने का मुख्य उद्देश्य रात में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना था।
खासतौर पर कोहरे में और तेज रफ्तार वाहनों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका को कम करने के लिए यह व्यवस्था की गई थी लेकिन लाइटें न जलने से यह पूरा उद्देश्य ही विफल होता दिखाई दे रहा है। हाईवे का यह हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण दिन-रात वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
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रात में भारी वाहन, बसें और निजी गाड़ियां तेज गति से गुजरती हैं। ऐसे में स्ट्रीट लाइटें बंद रहने से दुर्घटनाओं की संभावना लगातार बनी रहती है। खासकर सेक्टर-6 स्थित फ्लाईओवर क्षेत्र में अंधेरा और भी अधिक रहता है, जहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं।
इंसेट
तालमेल की कमी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा
पिछले माह नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा स्ट्रीट लाइटों के बिजली कनेक्शन के लिए निगम को आवेदन किया गया था। बिजली निगम का कहना था कि मीटर लगाने के लिए एनएचएआई की ओर से कोई स्थान तय नहीं किया गया है। बिजली निगम की ओर से एनएचआई को लोकेशन और तकनीकी समस्याओं के समाधान को लेकर पत्र भी भेजा गया लेकिन विभाग की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
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घने कोहरे में स्थिति और ज्यादा हो जाती है गंभीर
घने कोहरे के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। दृश्यता बेहद कम होने के कारण वाहन चालकों को आगे का रास्ता स्पष्ट दिखाई नहीं देता। ऐसे हालात में हाईवे किनारे स्थित होटल और पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा जलाई गईं लाइटें राहगीरों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। इन निजी प्रतिष्ठानों की रोशनी के सहारे ही चालक रास्ते का अंदाजा लगा पाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ये होटल और पेट्रोल पंप न हों, तो हाईवे पर रात्रि में यात्रा करना बेहद जोखिम भरा हो जाए।
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लाइटें चालू करने की व्यवस्था करें:
स्थानीय निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि एनएचआई और बिजली निगम समन्वय बनाकर जल्द से जल्द मीटर लगाने और लाइटें चालू करने की व्यवस्था करें। जितेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होता तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अस्थायी रोशनी की व्यवस्था की जाए ताकि रात के समय हादसों पर अंकुश लगाया जा सके। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह अंधेरा कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
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वर्जन:
पिछले माह एनएचएआई द्वारा एक आवेदन दिया गया है लेकिन अभी तक मीटर लगाने के लिए कोई स्थान नहीं बताया गया है। इस संबंध में बिजली निगम ने पत्र भेज दिया है। अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।- कृष्ण कुमार सैनी, एसडीओ बिजली निगम, धारूहेड़ा
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नतीजतन धारूहेड़ा के मालपुरा से लेकर खरखड़ा तक करीब छह किलोमीटर लंबा हाईवे क्षेत्र रात होते ही अंधेरे में डूब जाता है जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे पर स्ट्रीट लाइटें लगाने का मुख्य उद्देश्य रात में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना था।
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खासतौर पर कोहरे में और तेज रफ्तार वाहनों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका को कम करने के लिए यह व्यवस्था की गई थी लेकिन लाइटें न जलने से यह पूरा उद्देश्य ही विफल होता दिखाई दे रहा है। हाईवे का यह हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण दिन-रात वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
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रात में भारी वाहन, बसें और निजी गाड़ियां तेज गति से गुजरती हैं। ऐसे में स्ट्रीट लाइटें बंद रहने से दुर्घटनाओं की संभावना लगातार बनी रहती है। खासकर सेक्टर-6 स्थित फ्लाईओवर क्षेत्र में अंधेरा और भी अधिक रहता है, जहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं।
इंसेट
तालमेल की कमी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा
पिछले माह नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा स्ट्रीट लाइटों के बिजली कनेक्शन के लिए निगम को आवेदन किया गया था। बिजली निगम का कहना था कि मीटर लगाने के लिए एनएचएआई की ओर से कोई स्थान तय नहीं किया गया है। बिजली निगम की ओर से एनएचआई को लोकेशन और तकनीकी समस्याओं के समाधान को लेकर पत्र भी भेजा गया लेकिन विभाग की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
घने कोहरे में स्थिति और ज्यादा हो जाती है गंभीर
घने कोहरे के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। दृश्यता बेहद कम होने के कारण वाहन चालकों को आगे का रास्ता स्पष्ट दिखाई नहीं देता। ऐसे हालात में हाईवे किनारे स्थित होटल और पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा जलाई गईं लाइटें राहगीरों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। इन निजी प्रतिष्ठानों की रोशनी के सहारे ही चालक रास्ते का अंदाजा लगा पाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ये होटल और पेट्रोल पंप न हों, तो हाईवे पर रात्रि में यात्रा करना बेहद जोखिम भरा हो जाए।
लाइटें चालू करने की व्यवस्था करें:
स्थानीय निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि एनएचआई और बिजली निगम समन्वय बनाकर जल्द से जल्द मीटर लगाने और लाइटें चालू करने की व्यवस्था करें। जितेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होता तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अस्थायी रोशनी की व्यवस्था की जाए ताकि रात के समय हादसों पर अंकुश लगाया जा सके। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह अंधेरा कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
वर्जन:
पिछले माह एनएचएआई द्वारा एक आवेदन दिया गया है लेकिन अभी तक मीटर लगाने के लिए कोई स्थान नहीं बताया गया है। इस संबंध में बिजली निगम ने पत्र भेज दिया है। अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।- कृष्ण कुमार सैनी, एसडीओ बिजली निगम, धारूहेड़ा