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Rewari News: मिट्टी की जांच में जिंक और आयरन की मिल रही कमी, बनाए जा रहे मृदा हेल्थ कार्ड
Wed, 04 Dec 2024 11:31 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 04 Dec 2024 11:31 PM IST
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रेवाड़ी। खेत में बिजाई करती महिला किसान।
रेवाड़ी। बिना जांच के लगातार प्रयोग किए जा रहे अंधाधुंध रसायनिक खाद से भूमि बंजर भी बन सकती है। जिले में मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से ढाई लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
विभाग ने अब तक 2 लाख से ज्यादा कार्ड बना चुका हैं। इनमें सबसे ज्यादा जिले की मिट्टी में जिंक व आयरन की कमी सामने आई है। जिंक व आयरन की कमी के कारण गेहूं व सरसों के पत्तों में पीलापन आने लग जाता है। अधिकारियों के अनुसार, किसानों को अच्छे उत्पादन के लिए साल में एक बार मिट्टी की टेस्टिंग जरूर करानी चाहिए। मिट्टी टेस्ट कराने से समय पर पता लग जाता है कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है। इससे समय पर सही मात्रा में खाद-पानी देने से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ ही पैदावार में भी बढ़ोतरी होगी। संवाद
1 लाख 12 हजार 700 हेक्टेयर सिंचित भूमि
जिले में फिलहाल 1 लाख 12 हजार 700 हेक्टेयर सिंचित भूमि है। यानी इस जमीन पर ही खेती होती है। इस भूमि में ही जिले में सरसों और गेहूं की बिजाई होती है।
प्राकृतिक खेती की तरफ भी रुझान
जिले में मृदा स्वास्थ्य की तरफ भी लोगों का रुझान बढ़ा है। कृषि विभाग कार्यालय में बने मिट्टी टेस्टिंग सेंटर में किसान जांच के लिए मिट्टी लेकर आ रहे रहे हैं। मृदा की जांच के बाद जब कमी मिलती है तो किसान अब प्राकृतिक खेती की तरफ भी जा रहे हैं। लोगों को रसायन मुक्त सब्जियां और गेहूं मिले, इसके लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से भी पहल की गई है। जिले में 8 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। जो किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करने का काम कर रहे हैं। इसके तहत इस वर्ष में 500 एकड़ तक खेती का लक्ष्य है। जो अगले वर्ष 2025 में इसका रकबा 2 हजार एकड़ तक ले जाने का टारगेट निर्धारित किया है।
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बिजाई से पहले कराएं मिट्टी की जांच
किसानों को मिट्टी की जांच बिजाई से पहले करानी चाहिए। इससे ये फायदा होता है कि जमीन में अगर कोई पोषक तत्व की कमी है तो उसे समय पर दूर किया जा सकता है। इससे न केवल जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी, बल्कि उत्पादन भी बढ़ेगा। किसान उपनिदेशक कार्यालय में बने मिट्टी जांच केंद्र में मृदा की जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवा सकते हैं।
-डॉ. दीपक कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग, रेवाड़ी।
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जिले के अधिकतर क्षेत्र की मिट्टी रेतीली है, जिसमें जैविक घटकों की मात्रा चिकनी व दोमट मिट्टी की अपेक्षा से कम होती हैं। खेती में रसायनिक खाद व कीटनाशक, खरपतवार नाशक दवाओं का अंधाधुंध प्रयोग करके अपनी जमीन को खराब करते जा रहे हैं। जिस कारण फसलों में विभिन्न प्रकार की नई बीमारियां भी हर वर्ष देखने को मिल रही है। जिसके मुख्य कारण हैं मृदा का जैविक कार्बनिक गोग्यता का गिरता हुआ स्तर। किसान क्लब की ओ से किसानों को हर वर्ष निशुल्क प्राकृतिक खेती का परीक्षण दिया जाता है ताकी अपने क्षेत्र में मृदा का स्वास्थ्य अच्छा हो पाए।
- यशपाल खोला कंवाली, प्रधान, दी अरावली किसान क्लब रेवाड़ी
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विभाग ने अब तक 2 लाख से ज्यादा कार्ड बना चुका हैं। इनमें सबसे ज्यादा जिले की मिट्टी में जिंक व आयरन की कमी सामने आई है। जिंक व आयरन की कमी के कारण गेहूं व सरसों के पत्तों में पीलापन आने लग जाता है। अधिकारियों के अनुसार, किसानों को अच्छे उत्पादन के लिए साल में एक बार मिट्टी की टेस्टिंग जरूर करानी चाहिए। मिट्टी टेस्ट कराने से समय पर पता लग जाता है कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है। इससे समय पर सही मात्रा में खाद-पानी देने से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ ही पैदावार में भी बढ़ोतरी होगी। संवाद
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1 लाख 12 हजार 700 हेक्टेयर सिंचित भूमि
जिले में फिलहाल 1 लाख 12 हजार 700 हेक्टेयर सिंचित भूमि है। यानी इस जमीन पर ही खेती होती है। इस भूमि में ही जिले में सरसों और गेहूं की बिजाई होती है।
प्राकृतिक खेती की तरफ भी रुझान
जिले में मृदा स्वास्थ्य की तरफ भी लोगों का रुझान बढ़ा है। कृषि विभाग कार्यालय में बने मिट्टी टेस्टिंग सेंटर में किसान जांच के लिए मिट्टी लेकर आ रहे रहे हैं। मृदा की जांच के बाद जब कमी मिलती है तो किसान अब प्राकृतिक खेती की तरफ भी जा रहे हैं। लोगों को रसायन मुक्त सब्जियां और गेहूं मिले, इसके लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से भी पहल की गई है। जिले में 8 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। जो किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करने का काम कर रहे हैं। इसके तहत इस वर्ष में 500 एकड़ तक खेती का लक्ष्य है। जो अगले वर्ष 2025 में इसका रकबा 2 हजार एकड़ तक ले जाने का टारगेट निर्धारित किया है।
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बिजाई से पहले कराएं मिट्टी की जांच
किसानों को मिट्टी की जांच बिजाई से पहले करानी चाहिए। इससे ये फायदा होता है कि जमीन में अगर कोई पोषक तत्व की कमी है तो उसे समय पर दूर किया जा सकता है। इससे न केवल जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी, बल्कि उत्पादन भी बढ़ेगा। किसान उपनिदेशक कार्यालय में बने मिट्टी जांच केंद्र में मृदा की जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवा सकते हैं।
-डॉ. दीपक कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग, रेवाड़ी।
जिले के अधिकतर क्षेत्र की मिट्टी रेतीली है, जिसमें जैविक घटकों की मात्रा चिकनी व दोमट मिट्टी की अपेक्षा से कम होती हैं। खेती में रसायनिक खाद व कीटनाशक, खरपतवार नाशक दवाओं का अंधाधुंध प्रयोग करके अपनी जमीन को खराब करते जा रहे हैं। जिस कारण फसलों में विभिन्न प्रकार की नई बीमारियां भी हर वर्ष देखने को मिल रही है। जिसके मुख्य कारण हैं मृदा का जैविक कार्बनिक गोग्यता का गिरता हुआ स्तर। किसान क्लब की ओ से किसानों को हर वर्ष निशुल्क प्राकृतिक खेती का परीक्षण दिया जाता है ताकी अपने क्षेत्र में मृदा का स्वास्थ्य अच्छा हो पाए।
- यशपाल खोला कंवाली, प्रधान, दी अरावली किसान क्लब रेवाड़ी