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ठोस कचरा प्रबंधन में देरी का खामियाजाः स्वच्छता में रेवाड़ी का 500 में से 303 रैंक

Fri, 05 May 2017 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 05 May 2017 12:07 AM IST
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सड़क के किनारे फैली गंदगी।
रेवाड़ी जिले को खुशी और शर्मसार करने वाली खबर एक साथ आई। खुशी इस बात की थी कि केंद्रीय शहरी मंत्रालय की ओर से सफाई और उसकी व्यवस्थाओं को लेकर कराए गए सर्वे में हमने पिछली बार के मुकाबले 166 अंकों की छलांग लगाई है, पिछली बार हम 469 वें नंबर पर थे। वहीं, शर्मसार फिर इसलिए हुए कि अब भी हम 500 जिलों की लिस्ट में 303 वें नंबर पर हैं। कारण, सालों से सफाई व्यवस्था को अमली जामा पहनाने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन का निर्माण। ठोस कचरा प्रबंधन का प्लांट रामसिंहपुरा गांव के पास खुलना था। लेकिन किसी न किसी कारण के चलते इसमें लगातार देरी हो रही है। अगर समय पर प्लांट बनकर काम शुरू हो गया होता तो हमारी स्थिति और भी अच्छी हो सकती थी। रैंकिंग मंत्रालय की तरफ से भेजी गई क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) की टीम ने शहर की सफाई व्यवस्था देखकर तय की है।      
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कचरा प्रबंधन के लिए टीम ने भी था टोका      
करीब दो महीने पहले पहुंची केंद्रीय शहरी मंत्रालय की टीम ने शहर के सभी वार्डों में सफाई व्यवस्था का जायजा तो लिया ही था। शहर में जगह-जगह डंप हुए कूड़े के ढेरों को देखकर कूड़े-कचरे के निस्तारण के बारे में पूछा था। इस पर साथ मौजूद नप अधिकारियों ने बताया था कि ठोस कचरा प्रबंधन की फिलहाल व्यवस्था नहीं है। इसको लेकर जल्द ही काम शुरू होगा। जिसके बाद टीम ने कचरा प्रबंधन की प्लानिंग को जल्द से जल्द अमली-जामा पहनाने के लिए कहा था। गौरतलब है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की फाइल जमीन के अधिग्रहण के चक्कर में लंबे समय से अटकी है।      
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अभी तक नहीं हुआ डोर टू डोर कलेक्शन      
नगर परिषद के ईओ रहे विजयपाल के समय से डोर टू डोर कलेक्शन के लिए कई पिकअप, डंपर, डंपर प्रेशर व हाथ रेहड़ियां आने का प्रस्ताव था। टेंडर भी हुए, एस्टीमेट भी तय हुआ लेकिन नतीजा अभी तक ढाक के तीन पात। महज हाथ की रेहड़ियां ही शहर में कचरा उठा रही हैं। इसके विपरीत बावल तक में डोर टू डोर कलेक्शन के लिए पिकअप ली जा चुकी है।      
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अतिक्रमण ने भी दिलवाया रैंकिंग में धक्का      
रैंकिंग में इतना पीछे होने की एक और बड़ी वजह है, शहर में फैला अतिक्रमण। अतिक्रमण के चलते ही न तो शहर में नियमित रूप से गली और सड़कों की सफाई हो पाई और न ही नालों की। ऐसे में आई टीम ने इन चीजों को भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया। जिससे काफी हद तक निगेटिव मार्किंग हुई। निश्चित रूप से अगर शहर अतिक्रमण मुक्त होता तो सफाई व्यवस्था और भी बेहतर हो सकती थी।      -----------      
फ्लॉप रहा मिशन क्लीन रेवाड़ी      
2 अक्तूबर 2015 में शुरू हुआ मिशन क्लीन रेवाड़ी भी जिले मेें फ्लॉप ही रहा। शुरू होने के पहले कुछ महीनों में लोगों ने भी इस वेब पोर्टल पर अपने-अपने क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को डाला। समाधान का रेशो बहुत कम निकला तो लोगों का रुझान भी कम हुआ। अगले एक साल में उतनी भी शिकायत नहीं पहुंची जितनी शुरूआत के तीन महीनों में ही आ गई थीं। 2017 में तो इसकी रफ्तार मंद ही हो गई। इस साल तक कुल शिकायत 231 ही हैं।       
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रेलवे, अनाज मंडी और मार्केट कमेटी ने भी काटे नंबर      
टीम ने रेलवे जंक्शन पर सफाई और शौच व्यवस्था का भी जायजा लिया था। इसके अलावा अनाज मंडी और मार्केट कमेटी में भी सफाई व्यवस्था को भी चेक किया था। शौच की उचित व्यवस्था न होना और फैली गंदगी ने भी रैंकिंग में नंबर काटे। इसके अलावा सफाई अधिकारियों और नगर परिषद टीम के ट्रेंड न होने से भी माइनस मार्किंग हुई। वहीं नगर परिषद के किराए के डंपर व अन्य सामान भी निगेटिव फीडिंग के ही काम आए।      
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अगली बार होंगे अंडर 100 : ईओ      
उपलब्ध सीमित संसाधनों में भी शहर को साफ करने के लिए पूरे प्रयास किए गए हैं। रैंकिंग कम आने के पीछे अन्य विभाग हैं। अतिक्रमण की वजह से भी रैंकिंग पर असर पड़ा है। ठोस कचरा प्रबंधन का प्लांट तैयार करने के लिए बात की जाएगी। वहीं डोर टू डोर कलेक्शन का काम भी जल्द शुरू होगा। 2018 की रैंकिंग में अंडर 100 आने की तैयारी है।      
-मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद      

पूर्ववर्ती सरकार की ओर से कराए गए काम अब पूरे हो रहे हैं। ऐसे में स्वच्छता में छलांग लगना लाजमी थी। हालांकि अब नया प्रोजेक्ट नहीं आया है। अन्यथा और अच्छे हालात हो सकते थे।

-कैप्टन अजय सिंह यादव, पूर्व मंत्री
स्वच्छता में हमने पहले से अच्छा किया है। इसके लिए सभी बधाई के पात्र हैं। लेकिन हमारा प्रयास है कि और अच्छे प्रयास किए जाएं। इसके लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
-रणधीर सिंह कापड़ीवास, विधायक, रेवाड़ी
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