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Rewari News: स्कूल भवन जर्जर, पुरानी तहसील में चल रही कक्षाएं
Fri, 19 Jul 2024 02:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 19 Jul 2024 02:07 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। स्थानीय सरकारी स्कूल का भवन जर्जर हो गया है जिससे छठी से आठवीं तक के बच्चे पुरानी तहसील में पढ़ने को मजबूर हैं।
स्कूल के कमरे जर्जर हो चुके हैं। इसके चलते मजबूरी में पुरानी तहसील में कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं। भवन की मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये की जरूरत है लेकिन अभी तक बजट जारी नहीं किया गया है, जिस वजह से विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। विभाग की तरफ से एस्टीमेट भी कई समय पहले भेजा गया था लेकिन मंजूरी नहीं मिल पाई है। मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एस्टीमेट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। केवल मंजूरी मिलने का इंतजार है।
भवन के निर्माण को लेकर स्थानीय नेताओं की तरफ से निरीक्षण भी किया गया था। उसके बावजूद अभी तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। स्कूल के हेड मास्टर समुंदर सिंह ने बताया कि उन्हें 6 लाख रुपये मिले थे, जिससे तीन कमरों का कार्य करवाया गया था। इसमें प्राइमरी की पहली से पांचवी तक के बच्चों के लिए कक्षा दूरुस्त करवाई गई थी। अब ढाई सौ बच्चे पढ़ रहे हैं।
वर्जन:
स्कूल की मरम्मत के लिए एस्टीमेट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। जैसे ही अनुमति मिलेगी। उसके बाद आगे का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। -राजबाला, खंड शिक्षा अधिकारी बावल।
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बावल। स्थानीय सरकारी स्कूल का भवन जर्जर हो गया है जिससे छठी से आठवीं तक के बच्चे पुरानी तहसील में पढ़ने को मजबूर हैं।
स्कूल के कमरे जर्जर हो चुके हैं। इसके चलते मजबूरी में पुरानी तहसील में कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं। भवन की मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये की जरूरत है लेकिन अभी तक बजट जारी नहीं किया गया है, जिस वजह से विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। विभाग की तरफ से एस्टीमेट भी कई समय पहले भेजा गया था लेकिन मंजूरी नहीं मिल पाई है। मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एस्टीमेट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। केवल मंजूरी मिलने का इंतजार है।
भवन के निर्माण को लेकर स्थानीय नेताओं की तरफ से निरीक्षण भी किया गया था। उसके बावजूद अभी तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। स्कूल के हेड मास्टर समुंदर सिंह ने बताया कि उन्हें 6 लाख रुपये मिले थे, जिससे तीन कमरों का कार्य करवाया गया था। इसमें प्राइमरी की पहली से पांचवी तक के बच्चों के लिए कक्षा दूरुस्त करवाई गई थी। अब ढाई सौ बच्चे पढ़ रहे हैं।
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वर्जन:
स्कूल की मरम्मत के लिए एस्टीमेट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। जैसे ही अनुमति मिलेगी। उसके बाद आगे का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। -राजबाला, खंड शिक्षा अधिकारी बावल।
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