{"_id":"67cde1c3c86f00c7550ef0d4","slug":"sanskrit-should-be-made-compulsory-in-schools-from-class-3-rewari-news-c-198-1-rew1001-216297-2025-03-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: स्कूलों में तीसरी कक्षा से संस्कृत को किया जाए अनिवार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: स्कूलों में तीसरी कक्षा से संस्कृत को किया जाए अनिवार्य
Mon, 10 Mar 2025 12:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 10 Mar 2025 12:15 AM IST
विज्ञापन
फोटो : 36सेक्टर 1 में सोलहाराही तालाब के सामने अमर उजाला की तरफ से हरियाणा संस्कृत अध्यापक सं
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। शहर के सेक्टर एक मेें सोलहाराही तालाब के सामने रविवार को अमर उजाला की ओर से हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ के साथ संवाद का आयोजन किया गया। इसमें अध्यापकों ने तीसरी कक्षा से संस्कृत विषय को अनिवार्य करने की मांग की। कहा कि इससे बच्चे संस्कारी बनेंगे और अपनी संस्कृति के बारे में बेहतर तरीके से जान सकेंगे।
अध्यापकों ने कहा कि वर्तमान में संस्कृत विषय को विस्तार देने की जरूरत है। संस्कृत को कक्षा तीसरी से अनिवार्य किया जाए ताकि बच्चों का इस विषय की तरफ आकर्षण बढ़ सके। कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत केंद्र सरकार के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने त्रिभाषा फार्मूले को कक्षा दसवीं तक लागू करने का आदेश जारी किया है। इस आदेश से न केवल हरियाणा के छात्र लाभान्वित होंगे बल्कि प्रतिवेशी राज्यों के विद्यार्थी भी कहीं न कहीं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।
अध्यापकों ने कहा कि संस्कृत प्राचीन भाषा है। धार्मिक पुस्तकें भी संस्कृत में लिखी हुई हैं। इसके बाद भी संस्कृत का विस्तार काफी कम देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य कारण संस्कृत विषय को वैकल्पिक विषय के तौर पर रखा जाना है। इस विषय को अनिवार्य विषय के तौर पर रखना चाहिए था। फिलहाल त्रिभाषा फार्मूले से काफी लाभ देखने को मिल सकता है। अध्यापकों की मांग है कि संस्कृत को कक्षा तीसरी से लागू किया जाए, ताकि बच्चे आरंभ में ही इस विषय की आकर्षित हो सकें। बचपन में ही अच्छा माहौल मिलेगा तो बच्चे संस्कारी बनेंगे और अपने संस्कृति के बारे में भी बेहतर तरीके से जान सकेंगे।
विज्ञापन
-- -- -- -- -
संस्कृत भाषा समाज के लिए काफी महत्वपूर्ण है। युवा आजकल भटक रहे हैं। संस्कृत की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। संस्कृत भाषा का जितना विस्तार होगा, उतना ही इसकी समझ भी बढ़ेगी। त्रिभाषा फार्मूला लागू करना काफी बेहतर है। -रमेश कुमार, संस्कृत प्रवक्ता
-- -- -- -
आज के बच्चों में सकारात्मक सोच का अभाव है। संस्कृत से सकारात्मक सोच की वृद्धि होती है। संस्कृत में वह शक्ति है जिससे बच्चे अपनी बात कहने का सामर्थ्य जुटा पाते हैं। किस परिस्थिति में कौन सा निर्णय लेना चाहिए, इसका ज्ञान संस्कृत साहित्य पढ़ने से उत्पन्न होता है। हमारी भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में संस्कृत का अहम योगदान रहा है। -महेश कुमार, संस्कृत अध्यापक।
-- -- -- -- -
नए सत्र से त्रिभाषा फार्मूला लागू हो जाएगा। यह हमारी बहुत पुरानी मांग थी, जिसको पूरा कर दिया गया है। इससे संस्कृत का विस्तार होने की उम्मीद है। इससे बच्चों में संस्कृत की समझ बढ़ेगी। साथ ही स्कूलों में संस्कृत अध्यापकों की वृद्धि होगी। अगर हम संस्कृत का आदर करेंगे तभी हमारा संस्कार बचेगा। विश्व गुरु बनने के लिए संस्कृत का आगे बढ़ाना जरूरी है। विक्रम सिंह, जिला प्रधान, हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ।
-- -- -- -- -- -- --
संस्कृत बहुत सरल और मधुर भाषा है। यह भावपूर्ण भाषा है। हमारे युवा यह मानते हैं की संस्कृत कठिन है लेकिन जब आप इससे रूबरू होंगो तो आपको काफी बेहतर महसूस होगा। यह हमारी प्राचीन भाषा है। प्रारंभ में ही बच्चों को संस्कृत भाषा पढ़ाई जाएगी तो इससे विद्यार्थियों में काफी रुचि बढ़ेगी।-नेमीचंद शांडिल्य (रिटायर्ड अध्यापक) सदस्य, हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ
-- -- -- --
संस्कृत के बारे में अगर कोई ऐसा कहता है कि यह रोजगार परक नहीं है तो यह बिल्कुल गलत है। मेरे स्कूल में कक्षा नौ की 45 लड़कियों का वैकल्पिक विषय संस्कृत है। मेरे 31 साल के कार्यकाल में संस्कृत पढ़ी हुई एक भी छात्रा ने अनैतिक कार्य नहीं किया है। क्योंकि संस्कृत से हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। -संयोगिता, संस्कृत प्राध्यापिका, गर्ल्स स्कूल।
-- -- -- -
मेरी अपील है कि संस्कृत भाषा को प्रैक्टिकल के रूप में सम्मिलित किया जाए। इससे बच्चों की रुचि काफी बढ़ेगी। बच्चा चाहेगा कि यह नंबर तो संस्कृत से ऐसे ही मिल जाएंगे। संस्कृत के विस्तार के लिए सभी को आगे मिलकर आना पड़ेगा। संस्कृत भाषा काफी सरल है। बस समझने की जरूरत है।-सुमित्रा देवी, संस्कृत अध्यापिका।
-- -- -- -- -
संस्कृत भाषा बच्चे उत्सुकता से पढ़ें तो इससे उन्हें काफी लाभ मिल सकता है। बच्चों को निजी जिंदगी में भी काफी फायदा होगा। संस्कृत भाषा हमारी प्राचीन भाषा है। बच्चे अगर संस्कृत भाषा पढ़ेंगे तो उन्हें भविष्य में भी काफी लाभ होगा। -उषा यादव, संस्कृत अध्यापिका
-- -- -- -- -
हरियाणा सरकार ने त्रिभाषा फार्मूला को सत्र 2025-26 से ही लागू करने का निर्णय लेकर सराहनीय कदम उठाया है। त्रिभाषा फार्मूले में विद्यार्थियों को संस्कृत, पंजाबी और उर्दू इसमें से एक का चयन करना होगा। हरियाणा प्रदेश में विशेष रूप से 11 से 12 जिले ऐसे हैं जिसमें पूर्ण रूप से संस्कृत भाषा का प्रभाव है। अन्य जिलों में पंजाबी के साथ-साथ संस्कृत का काफी प्रभाव है। -अनिल कुमार शास्त्री, संरक्षक, हरियाणा संस्कृत अध्यापक संघ
विज्ञापन
रेवाड़ी। शहर के सेक्टर एक मेें सोलहाराही तालाब के सामने रविवार को अमर उजाला की ओर से हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ के साथ संवाद का आयोजन किया गया। इसमें अध्यापकों ने तीसरी कक्षा से संस्कृत विषय को अनिवार्य करने की मांग की। कहा कि इससे बच्चे संस्कारी बनेंगे और अपनी संस्कृति के बारे में बेहतर तरीके से जान सकेंगे।
अध्यापकों ने कहा कि वर्तमान में संस्कृत विषय को विस्तार देने की जरूरत है। संस्कृत को कक्षा तीसरी से अनिवार्य किया जाए ताकि बच्चों का इस विषय की तरफ आकर्षण बढ़ सके। कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत केंद्र सरकार के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने त्रिभाषा फार्मूले को कक्षा दसवीं तक लागू करने का आदेश जारी किया है। इस आदेश से न केवल हरियाणा के छात्र लाभान्वित होंगे बल्कि प्रतिवेशी राज्यों के विद्यार्थी भी कहीं न कहीं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।
विज्ञापन
अध्यापकों ने कहा कि संस्कृत प्राचीन भाषा है। धार्मिक पुस्तकें भी संस्कृत में लिखी हुई हैं। इसके बाद भी संस्कृत का विस्तार काफी कम देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य कारण संस्कृत विषय को वैकल्पिक विषय के तौर पर रखा जाना है। इस विषय को अनिवार्य विषय के तौर पर रखना चाहिए था। फिलहाल त्रिभाषा फार्मूले से काफी लाभ देखने को मिल सकता है। अध्यापकों की मांग है कि संस्कृत को कक्षा तीसरी से लागू किया जाए, ताकि बच्चे आरंभ में ही इस विषय की आकर्षित हो सकें। बचपन में ही अच्छा माहौल मिलेगा तो बच्चे संस्कारी बनेंगे और अपने संस्कृति के बारे में भी बेहतर तरीके से जान सकेंगे।
विज्ञापन
संस्कृत भाषा समाज के लिए काफी महत्वपूर्ण है। युवा आजकल भटक रहे हैं। संस्कृत की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। संस्कृत भाषा का जितना विस्तार होगा, उतना ही इसकी समझ भी बढ़ेगी। त्रिभाषा फार्मूला लागू करना काफी बेहतर है। -रमेश कुमार, संस्कृत प्रवक्ता
आज के बच्चों में सकारात्मक सोच का अभाव है। संस्कृत से सकारात्मक सोच की वृद्धि होती है। संस्कृत में वह शक्ति है जिससे बच्चे अपनी बात कहने का सामर्थ्य जुटा पाते हैं। किस परिस्थिति में कौन सा निर्णय लेना चाहिए, इसका ज्ञान संस्कृत साहित्य पढ़ने से उत्पन्न होता है। हमारी भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में संस्कृत का अहम योगदान रहा है। -महेश कुमार, संस्कृत अध्यापक।
नए सत्र से त्रिभाषा फार्मूला लागू हो जाएगा। यह हमारी बहुत पुरानी मांग थी, जिसको पूरा कर दिया गया है। इससे संस्कृत का विस्तार होने की उम्मीद है। इससे बच्चों में संस्कृत की समझ बढ़ेगी। साथ ही स्कूलों में संस्कृत अध्यापकों की वृद्धि होगी। अगर हम संस्कृत का आदर करेंगे तभी हमारा संस्कार बचेगा। विश्व गुरु बनने के लिए संस्कृत का आगे बढ़ाना जरूरी है। विक्रम सिंह, जिला प्रधान, हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ।
संस्कृत बहुत सरल और मधुर भाषा है। यह भावपूर्ण भाषा है। हमारे युवा यह मानते हैं की संस्कृत कठिन है लेकिन जब आप इससे रूबरू होंगो तो आपको काफी बेहतर महसूस होगा। यह हमारी प्राचीन भाषा है। प्रारंभ में ही बच्चों को संस्कृत भाषा पढ़ाई जाएगी तो इससे विद्यार्थियों में काफी रुचि बढ़ेगी।-नेमीचंद शांडिल्य (रिटायर्ड अध्यापक) सदस्य, हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ
संस्कृत के बारे में अगर कोई ऐसा कहता है कि यह रोजगार परक नहीं है तो यह बिल्कुल गलत है। मेरे स्कूल में कक्षा नौ की 45 लड़कियों का वैकल्पिक विषय संस्कृत है। मेरे 31 साल के कार्यकाल में संस्कृत पढ़ी हुई एक भी छात्रा ने अनैतिक कार्य नहीं किया है। क्योंकि संस्कृत से हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। -संयोगिता, संस्कृत प्राध्यापिका, गर्ल्स स्कूल।
मेरी अपील है कि संस्कृत भाषा को प्रैक्टिकल के रूप में सम्मिलित किया जाए। इससे बच्चों की रुचि काफी बढ़ेगी। बच्चा चाहेगा कि यह नंबर तो संस्कृत से ऐसे ही मिल जाएंगे। संस्कृत के विस्तार के लिए सभी को आगे मिलकर आना पड़ेगा। संस्कृत भाषा काफी सरल है। बस समझने की जरूरत है।-सुमित्रा देवी, संस्कृत अध्यापिका।
संस्कृत भाषा बच्चे उत्सुकता से पढ़ें तो इससे उन्हें काफी लाभ मिल सकता है। बच्चों को निजी जिंदगी में भी काफी फायदा होगा। संस्कृत भाषा हमारी प्राचीन भाषा है। बच्चे अगर संस्कृत भाषा पढ़ेंगे तो उन्हें भविष्य में भी काफी लाभ होगा। -उषा यादव, संस्कृत अध्यापिका
हरियाणा सरकार ने त्रिभाषा फार्मूला को सत्र 2025-26 से ही लागू करने का निर्णय लेकर सराहनीय कदम उठाया है। त्रिभाषा फार्मूले में विद्यार्थियों को संस्कृत, पंजाबी और उर्दू इसमें से एक का चयन करना होगा। हरियाणा प्रदेश में विशेष रूप से 11 से 12 जिले ऐसे हैं जिसमें पूर्ण रूप से संस्कृत भाषा का प्रभाव है। अन्य जिलों में पंजाबी के साथ-साथ संस्कृत का काफी प्रभाव है। -अनिल कुमार शास्त्री, संरक्षक, हरियाणा संस्कृत अध्यापक संघ