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भ्रष्ट अधिकारियों की जांच होगी : आरती राव
Sun, 20 Oct 2024 01:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 20 Oct 2024 01:18 AM IST
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रेवाड़ी। रामपुरा पहुंचने पर आरती राव का स्वागत करते समर्थक। स्रोत : वीडियो ग्रैप
रेवाड़ी। कैबिनेट मंत्री बनने के बाद आरती राव शनिवार को अपने पैतृक गांव रामपुरा पहंुचीं। क्षेत्रीय लोगों ने रामपुरा में राव का गर्मजोशी से स्वागत किया।
आरती राव ने कहा कि क्षेत्र की जो भी समस्या होगी उसका समाधान करने की कोशिश करूंगी। कहा कि जनता की उम्मीदों खरा उतरने के भी प्रयास किए जाएंगे। भ्रष्ट अधिकारियों की जांच होनी चाहिए। यदि जांच में कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि प्राथमिकता रहेगी कि चाहे कृषि का क्षेत्र हो, सड़कों का, शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर खेलों का, सभी पर बराबर काम करना चाहती हूं।
हर उस मामले पर काम करूंगी, जिससे दक्षिण हरियाणा हमेशा से वंचित रहा है। प्रदेश के मुखिया नायब सैनी ने अबकी बार ये ठान ली है कि आने वाले 5 साल हरियाणा के सुनहरे होने वाले हैं।
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बता दें कि महेंद्रगढ़ के अटेली विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुनी गईं आरती राव ने वीरवार को मंत्री पद की शपथ ली थी। शपथ के बाद पहली बार वह शनिवार को रेवाड़ी पहुंचीं। आरती राव के मंत्री बनने से 56 वर्ष बाद अहीरवाल को चौधर मिली है। आरती राव ने महज 2500 मतों से विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी।
आरती राव स्नातक हैं और शूटिंग की खिलाड़ी रही हैं। आरती राव ने 2001 और 2012 में शूटिंग वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया था। 2017 में शूटिंग से संन्यास लेने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। इस बार के विधानसभा चुनाव में उन्हें अटेली सीट से भाजपा का टिकट मिला था और उन्होंने जीत दर्ज कराई थी। आरती राव ने बसपा के उम्मीदवार अतरवाल को 2500 वोटों से हराया था। अतरलाल को 54274 वोट और भाजपा की आरती राव को 56,774 मत मिले थे। कांग्रेस की अनीता यादव को 29,474 वोट मिले थे। आरती राव के पिता इंद्रजीत राव अहीरवाल क्षेत्र के बड़े नेता माने जाते हैं।
2019 के चुनाव में रेवाड़ी से मांगा था टिकट
राव इंद्रजीत सिंह के लिए इस बार का विधानसभा चुनाव काफी अहम माना जा रहा था क्योंकि आरती राव के लिए वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में भी टिकट की मांग की गई थी, लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। इस बार भाजपा ने आरती राव को अटेली से टिकट दिया। टिकट की घोषणा होने के बाद से विरोधियों ने आरती राव को हराने के लिए हरसंभव प्रयास किया था, लेकिन क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत के प्रभाव को रोक नहीं पाए और पहली ही बार में आरती राव विधानसभा का चुनाव जीत गईं।
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आरती राव ने कहा कि क्षेत्र की जो भी समस्या होगी उसका समाधान करने की कोशिश करूंगी। कहा कि जनता की उम्मीदों खरा उतरने के भी प्रयास किए जाएंगे। भ्रष्ट अधिकारियों की जांच होनी चाहिए। यदि जांच में कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि प्राथमिकता रहेगी कि चाहे कृषि का क्षेत्र हो, सड़कों का, शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर खेलों का, सभी पर बराबर काम करना चाहती हूं।
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हर उस मामले पर काम करूंगी, जिससे दक्षिण हरियाणा हमेशा से वंचित रहा है। प्रदेश के मुखिया नायब सैनी ने अबकी बार ये ठान ली है कि आने वाले 5 साल हरियाणा के सुनहरे होने वाले हैं।
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बता दें कि महेंद्रगढ़ के अटेली विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुनी गईं आरती राव ने वीरवार को मंत्री पद की शपथ ली थी। शपथ के बाद पहली बार वह शनिवार को रेवाड़ी पहुंचीं। आरती राव के मंत्री बनने से 56 वर्ष बाद अहीरवाल को चौधर मिली है। आरती राव ने महज 2500 मतों से विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी।
आरती राव स्नातक हैं और शूटिंग की खिलाड़ी रही हैं। आरती राव ने 2001 और 2012 में शूटिंग वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया था। 2017 में शूटिंग से संन्यास लेने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। इस बार के विधानसभा चुनाव में उन्हें अटेली सीट से भाजपा का टिकट मिला था और उन्होंने जीत दर्ज कराई थी। आरती राव ने बसपा के उम्मीदवार अतरवाल को 2500 वोटों से हराया था। अतरलाल को 54274 वोट और भाजपा की आरती राव को 56,774 मत मिले थे। कांग्रेस की अनीता यादव को 29,474 वोट मिले थे। आरती राव के पिता इंद्रजीत राव अहीरवाल क्षेत्र के बड़े नेता माने जाते हैं।
2019 के चुनाव में रेवाड़ी से मांगा था टिकट
राव इंद्रजीत सिंह के लिए इस बार का विधानसभा चुनाव काफी अहम माना जा रहा था क्योंकि आरती राव के लिए वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में भी टिकट की मांग की गई थी, लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। इस बार भाजपा ने आरती राव को अटेली से टिकट दिया। टिकट की घोषणा होने के बाद से विरोधियों ने आरती राव को हराने के लिए हरसंभव प्रयास किया था, लेकिन क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत के प्रभाव को रोक नहीं पाए और पहली ही बार में आरती राव विधानसभा का चुनाव जीत गईं।