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सड़कों पर आवारा पशु, कोर्ट के आदेश हवा में
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Tue, 29 Mar 2016 12:40 AM IST
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सड़क
- फोटो : अमर उजाला
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गुड़गांव स्थित पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट के आदेश पिछले छह साल से शहरी सरकार यानी नगर परिषद प्रशासन के लिए हवा ही हैं। सड़क पर घूमते आवारा पशु और इससे आमजन को होने वाली परेशानी के मद्देनजर फरवरी 2010 में अधिवक्ता सुनील भार्गव की ओर से जनहित याचिका डाली गई थी। सितंबर 2010 में कोर्ट ने रेवाड़ी नगर परिषद को आवारा और बेसहारा पशुओं को शहर से हटाने के आदेश दिए थे लेकिन शुरू के कुछ दिन के अलावा छह साल बीतने के बावजूद नगर परिषद इसकी अनुपालना नहीं कर सका है। हाल ही में इसके चलते कोर्ट ने नगर परिषद की सरकारी गाड़ी कुर्क करने के आदेश भी दिए थे लेकिन अधिकारियों के आश्वासन पर गाड़ी सीज करने की मोहलत दे दी गई। नगर परिषद की लापरवाह कार्यप्रणाली की वजह से शहर में हर 50-100 मीटर पर आवारा पशु झुंड बनाकर खड़े रहते हैं, जिससे आमजन को काफी परेशानी हो रही है। वहीं यदि कुछ पार्षदों को छोड़ दिया जाए तो बाकी बंटे दो खेमों में आपसी खींचतान में ही लगे रहते हैं।
कुर्की के आदेश से भी नहीं जागा नगर परिषद
आवारा पशु हटाने के मामले में नगर परिषद के प्रशासन की नींद कितनी गहरी है इस बात का अंदाजा इस बात से लगता है कि पांच साल से कार्रवाई न होने पर न्यायाधीश विवेक सिंह की कोर्ट ने तीन महीने पहले नप की सरकारी गाड़ी को कुर्क करने के आदेश दिए थे। तब अधिकारियों ने कार्रवाई और जनता की असुविधा का हवाला देकर गाड़ी कुर्क होने से बचा ली। मामले में अब 4 अप्रैल को दोबारा सुनवाई है। तीन महीने बीतने के बावजूद नगर परिषद ने आवारा और बेसहारा पशु हटाने की दिशा मेें कोई कदम नहीं उठाया है।
सड़क पर आवारा पशु बढ़ती गोतस्करी की बड़ी वजह
शहर के साथ ही जिले की सड़कों पर घूमते आवारा और बेसहारा पशु गोतस्करी की बड़ी वजह है। अगर शहर की सड़कों पर आवारा पशु ही नहीं होंगे तो निश्चित रूप से गोतस्करी पर भी काफी हद तक लगाम कसी जा सकेगी क्योंकि गोतस्करी की वारदात किसी के घर में घुसकर न के बराबर होती हैं।
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हाईकोर्ट दिला चुकी है 10 लाख रुपये मुआवजा
अगर आवारा पशुओं की वजह से कोई घायल, मौत या किसी अन्य तरह की परेशानी होती है तो पीड़ित पक्ष नगर परिषद को पार्टी बनाते हुए मुकदमा दर्ज करा सकता है। कुछ महीने पहले आवारा पशु से पीड़ित के मामले में कोर्ट ने संबंधित विभाग से पीड़ित पक्ष को 10 लाख रुपये हर्जाना देने को कहा था।
बिल अदायगी का डिस्प्यूट बना बड़ी वजह: ईओ
नगर परिषद की ओर से आवारा और बेसहारा पशुओं को शहर से हटाने के लिए ठेका दिया गया था लेकिन बिल अदायगी के डिस्प्यूट के चलते पशु नहीं हटाए गए। अब डिस्प्यूट खत्म हो गया है, जल्द ही शहर की सड़कों पर आवारा पशु नहीं दिखेंगे। -डॉ.अरविंद बाल्याण, ईओ, नगर परिषद
कानून का पालन करना ही होगा: एडवोकेट सुनील
जनता की असुविधा को देखते हुए नगर परिषद के खिलाफ याचिका 6 साल पहले कोर्ट में डाली थी। आदेश की अनुपालना न होने के चलते कोर्ट पहले ही गाड़ी कुर्क करने के आदेश दे चुका है। अब मामले की आगे की सुनवाई 4 अप्रैल को है।
एडवोकेट सुनील भार्गव, याचिकाकर्ता, रेवाड़ी
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कुर्की के आदेश से भी नहीं जागा नगर परिषद
आवारा पशु हटाने के मामले में नगर परिषद के प्रशासन की नींद कितनी गहरी है इस बात का अंदाजा इस बात से लगता है कि पांच साल से कार्रवाई न होने पर न्यायाधीश विवेक सिंह की कोर्ट ने तीन महीने पहले नप की सरकारी गाड़ी को कुर्क करने के आदेश दिए थे। तब अधिकारियों ने कार्रवाई और जनता की असुविधा का हवाला देकर गाड़ी कुर्क होने से बचा ली। मामले में अब 4 अप्रैल को दोबारा सुनवाई है। तीन महीने बीतने के बावजूद नगर परिषद ने आवारा और बेसहारा पशु हटाने की दिशा मेें कोई कदम नहीं उठाया है।
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सड़क पर आवारा पशु बढ़ती गोतस्करी की बड़ी वजह
शहर के साथ ही जिले की सड़कों पर घूमते आवारा और बेसहारा पशु गोतस्करी की बड़ी वजह है। अगर शहर की सड़कों पर आवारा पशु ही नहीं होंगे तो निश्चित रूप से गोतस्करी पर भी काफी हद तक लगाम कसी जा सकेगी क्योंकि गोतस्करी की वारदात किसी के घर में घुसकर न के बराबर होती हैं।
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हाईकोर्ट दिला चुकी है 10 लाख रुपये मुआवजा
अगर आवारा पशुओं की वजह से कोई घायल, मौत या किसी अन्य तरह की परेशानी होती है तो पीड़ित पक्ष नगर परिषद को पार्टी बनाते हुए मुकदमा दर्ज करा सकता है। कुछ महीने पहले आवारा पशु से पीड़ित के मामले में कोर्ट ने संबंधित विभाग से पीड़ित पक्ष को 10 लाख रुपये हर्जाना देने को कहा था।
बिल अदायगी का डिस्प्यूट बना बड़ी वजह: ईओ
नगर परिषद की ओर से आवारा और बेसहारा पशुओं को शहर से हटाने के लिए ठेका दिया गया था लेकिन बिल अदायगी के डिस्प्यूट के चलते पशु नहीं हटाए गए। अब डिस्प्यूट खत्म हो गया है, जल्द ही शहर की सड़कों पर आवारा पशु नहीं दिखेंगे। -डॉ.अरविंद बाल्याण, ईओ, नगर परिषद
कानून का पालन करना ही होगा: एडवोकेट सुनील
जनता की असुविधा को देखते हुए नगर परिषद के खिलाफ याचिका 6 साल पहले कोर्ट में डाली थी। आदेश की अनुपालना न होने के चलते कोर्ट पहले ही गाड़ी कुर्क करने के आदेश दे चुका है। अब मामले की आगे की सुनवाई 4 अप्रैल को है।
एडवोकेट सुनील भार्गव, याचिकाकर्ता, रेवाड़ी