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दो साल में ही थमा क्लीन रेवाड़ी का ' मिशन'

Sun, 24 Jul 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
ब्यूरो /अमर उजाला Updated Sun, 24 Jul 2016 12:52 AM IST
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सफाई के मिशन ने दो साल में ही दम तोड़ा दिया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शहर के साथ देश को साफ करने के लिए शुरू किए गए मिशन ने महज दो साल में ही दम तोड़ दिया है। हालात ये हैं कि गांधी जयंती के अवसर पर शुरू हुए मिशन क्लीन रेवाड़ी की वेबसाइट में जहां दो महीने में ही 194 शिकायतें आई थीं। वहीं इसके बाद से लेकर अब तक महज 27 शिकायतें ही सामने आई हैं। अधिकारी भले ही इस बाबत सफाई होने के चलते शिकायतों पर कमी का हवाला देते हों। लेकिन अमर उजाला टीम ने जब शहर की सड़कों का जायजा लिया तो सच्चाई कुछ अलग ही सामने आई।
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किस मामले की कितनी रही हैं शिकायतें
अतिक्रमण-15, पानी बर्बादी-11, दुर्घटना बाहुल्य-11, आवारा पशु-4, ट्रैफिक जाम-10, सीवर ओवरफ्लो-32, कूड़ा-80, मृत पशु-1, ट्रैफिक लाइट-1, पीने के पानी की बर्बादी-3, स्ट्रीट लाइट्स-17, अवैध होर्डि़ंग-3, खराब सड़कें-15, बरसाती पानी के भरने की समस्या-4, मच्छर-मक्खी-5, अन्य-15
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खाद्य पदार्थों की मार्केट में भी गंदगी
शिव चौक के पास खाने-पीने के सामानों की बड़ी संख्या में पक्की दुकानें हैं। यही नहीं स्ट्रीट फूड के भी कई स्टॉल यहां लगते हैं। बावजूद इसके यहां पुरानी जेल रोड के पास और पार्क में गंदगी का ढेर पड़ा रहता है। इसके अलावा आजाद चौक, ट्रामा सेंटर के पास के अलावा सती कालोनी चौक के पास भी कूड़ा करकट आए दिन प्रशासन के दावों को मुंह चिढ़ाता हुआ दिखाई देता है। ये वही जगह हैं जहां की शिकायत मिशन क्लीन रेवाड़ी पर शहर की जनता कई बार कर चुकी थी।
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मृत पशु दो साल में बस एक, अतिक्रमण भी नहीं बढ़ा
शिकायतों के थमने का आलम यह है कि 29 सितंबर 2015 को एक मृत पशु के शहर में पड़े होने की सूचना इस पर दी गई थी। जिसके बाद से अब तक इस आइकन में अन्य शिकायत नहीं दर्ज हुई है। वहीं अतिक्रमण की आखिरी शिकायत भी 8 सितंबर 2015 को हुई थी, जिसके बाद से अब तक कोई अन्य शिकायत नहीं हुई है। 25 नवंबर 2014 को ट्रैफिक लाइट खराब होने की समस्या की शिकायत जनता ने की थी। इसके बाद से किसी ने इस संबंध में शिकायत नहीं की। हकीकत सबको पता कि शहर की ट्रैफिक लाइट के आलम क्या हैं।

देश के टॉप गंदे शहरों में रहा है शुमार
अपने शहर की बात करें तो देश के टॉप गंदे शहरों की बात करें रेवाड़ी का नाम इसकी फेहरिस्त में आया था। इसके बाद से शहर की सफाई को लेकर जोर-शोर से अभियान चलाने की कवायद शुरू की गई थी। लेकिन सारी कवायद कुछ ही समय में ध्वस्त हो गई थी।
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सरकार की ओर से मोबाइल एप और वेबसाइट पर शिकायत करने की एप्लीकेशन आई थी तो लगा था कि शहर में सफाई व्यवस्था बेहतर होगी। लेकिन प्रशासनिक अमले की निष्क्रियता के चलते हालात जस के तस हैं।
-सुनील भार्गव, एडवोकेट
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खाने-पीने की दुकानों के आसपास सफाई बेहद जरूरी है। यहीं से संक्रमण का खतरा पनपता है। बावजूद इसके न तो प्रशासन और न ही जनता के चुने नुमाइंदे इस ओर किसी तरह का ध्यान दे रहे हैं।

-राहुल, शहरवासी
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विभिन्न जगहों पर सफाई के लिए नगर परिषद सफाई कर्मचारियों की टीमें बनी हुई हैं। ठोस कचरा निस्तारण की प्रॉपर व्यवस्था न हो पाने के चलते समस्या पनपती है। वेबसाइट के जरिए समस्या की मिलने वाली जानकारी पर कार्रवाई करवाई जाती है।
-शकुंतला भांडोरिया, प्रधान, नगर परिषद
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