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स्पीड गवर्नर से रेवाड़ी डिपो की आय पर ब्रेक

Mon, 26 Oct 2015 01:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला रेवाड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला रेवाड़ी Updated Mon, 26 Oct 2015 01:13 AM IST
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रेवाड़ी। हरियाणा रोडवेज के रेवाड़ी डिपो की बसों में स्पीड गवर्नर व जीपीएस सिस्टम को सख्ती से लागू करते ही आय के मामले में डिपो चौथे नंबर से चौदहवें नंबर पर पहुंच गया है। वहीं आरटीए विभाग की सुस्ती से डग्गामार वाहनों ने रोडवेज की आय घटा दी है। बसों में स्पीड गवर्नर लगाने से लोगों को भी परेशानी हो रही है और वो अपने गंतव्य पर देरी से पहुंच रहे हैं।
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 जानकारी के अनुसार हरियाणा गठन के बाद से ही सभी रोडवेज बसों में स्पीड गर्वनर लगाना अनिवार्य किया गया है, लेकिन रेवाड़ी में रोडवेज अधिकारियों ने इसे सख्ती से लागू किया। इसके कारण बसों की स्पीड कम हो गई है और यात्री प्राइवेट बसों को तवज्जो दे रहे हैं। रोडवेज बस चालकों का कहना है कि स्पीड गवर्नर लगने से जहां उनकी स्पीड अधिकतम 70 किमी प्रति घंटा पहुंच सकती है, वहीं अन्य रोडवेज डिपो की बसें व प्राइवेट वाहन तेज स्पीड के कारण आगे निकल जाते हैं। यात्री भी तेज गति से चलने वाली बसों में बैठना पसंद करते हैं।
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स्पीड गवर्नर व खस्ता हाल बसों के चलते निकला दम
रोडवेज कर्मचारी संगठन के प्रदेश प्रवक्ता देवेंद्र तिवाड़ी ने बताया कि डिपो में बसों की कुल संख्या 151 है, इनमें से लगभग 130 बसें ही चल पाती हैं। सबसे अधिक आय देने वाले रूटों की बात करें तो रेवाड़ी- जयपुर, रेवाड़ी-शिमला, चंडीगढ़, बैजनाथ, पर बसों में कंपीटीशन रहता है। रेवाड़ी डिपो की बसे स्पीड व खस्ताहाल हालत के कारण पिछड़ जाते हैं। यही कारण है कि डिपो चार नंबर की बजाय चौदहवें नंबर पर चला गया है।
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डग्गामार वाहनों से प्रतिदिन लाखों का चूना
रोडवेज कर्मचारी संगठन के प्रदेश महासचिव सावंत सिंह ने बताया कि रेवाड़ी बस स्टैंड के बाहर व शहर के अन्य स्टैंडों से 150 बसें व 1500 से अधिक मैजिक, क्रूजर व ऑटो चल रहे हैं। इससे रोडवेज को प्रतिदिन लाखों का चूना लग रहा है। उन्होंने बताया कि रोडवेज की आय में वृद्धि बिना प्रशासन के सहयोग संभव नहीं है।
आरटीए विभाग की सुस्ती बड़ा कारण
जिले में चल रहे डग्गामार वाहनों पर लगाम लगाने का जिम्मा आरटीए व एक्साइज एवं टेक्सेसन विभाग को होता है। लेकिन अवैध वाहन चालकों के बीच सांठगांठ के चलते इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। रोडवेज कर्मचारी यूनियन की माने तो कई बार लिखित में देने के बावजूद आरटीए ने एक महीने से कोई चालान तक नहीं किया।

वर्जन--

रेवाड़ी डिपो के चालक धर्मवीर सिंह ने बताया कि यूं तो सभी डिपो में ही स्पीड गवर्नर लगाना जरूरी है। लेकिन जब से रेवाड़ी डिपो में इसे सख्ती से लागू किया है, सवारियों ने बैठना ही बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि स्पीड गवर्नर लगने से डीजल की भी ज्यादा खपत होती है। जिसका रोडवेज की आय पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

वर्जन
 बीस दिन पहले ही रेवाड़ी डिपो के जीएम का कार्यभार संभालने वाले संदीप सिंह ने बताया कि स्पीड गवर्नर से आय कम नहीं हुई है। इसका कारण पुरानी बसें हैं। पिछले वर्ष के मुकाबला बसों का मेंटिनेस ज्यादा होता है। वहीं उन्होंने कहा कि छात्रों की संख्या में वृद्धि भी एक बड़ा कारण है।

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रेवाड़ी से गुड़गांव तक सफर करने वाले यात्री नवीन कुमार ने बताया कि पहले वह रोडवेज बस से जाते था, लेकिन अब कितना भी कहने पर चालक बस को तेज नही चलाता है। उसने बताया कि वह अब रेवाड़ी से प्राइवेट बस में जाता है।
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सेक्टर चार निवास विकास ढिल्लन ने बताया कि रेवाड़ी डिपो की बस से रेवाड़ी से गुड़गांव तक जाने में पंद्रह मिनट तक का ज्यादा समय लग जाता है। ऐसे में वह निजी बस या दूसरे डिपो की बस पकड़ने की कोशिश करता है।

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रवि ने बताया कि सुबह के समय ऑफिस पहुंचने के लिए एक-एक मिनट कीमती होता है, लेकिन जब से रोडवेज चालकों ने बस को तेज मना करना शुरू किया है, वह प्राइवेट बसे से गुड़गांव जाता है।
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