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Rewari News: नाट्य उत्सव के समापन पर हुआ राजा की रसोई का मंचन
Wed, 13 Mar 2024 01:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 13 Mar 2024 01:49 AM IST
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रेवाड़ी। हरियाणा कला परिषद और भरतमुनि कला केंद्र के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय नाट्य उत्सव का समापन हो गया है। वहीं मोहन महर्षि द्वारा लिखित और नाट्य में राष्ट्रीय स्वर्ण पदक से सम्मानित रंगकर्मी मदन डागर द्वारा निर्देशित नाटक राजा की रसोई का मंचन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के भाजपा प्रदेश प्रवक्ता वंदना पोपली ने शिरकत की। परिषद के निदेशक नागेंद्र शर्मा की भी उपस्थिति रही। नाट्य निर्देशक मदन डागर ने बताया कि नाटक राजा की रसोई व्यंगात्मक नाटक है। नाटक के जरिये कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर व्यंग्य किया गया है कि कैसे एक राजा सत्ता का दुरुपयोग कर प्रजा का शोषण करता है।
इस नाटक में राजा को नरभक्षी दिखाकर सत्ताधीशों द्वारा जनता का शोषण दिखाया गया है। राजा के सत्ता प्राप्त करने के बाद जब वो अपना उपवास तोड़ता है तो रसोइये द्वारा नरमांस परोस दिया जाता है। मांस उसे इतना पसंद आता है की वह राज रसोइये को इस बंधन में बांध देता है कि प्रतिदिन आज ही के जैसा मांस पकाना होगा।
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ऐसे दिन प्रतिदिन रसोइया नगर से एक व्यक्ति को मारकर परोस देता है। एक समय ऐसा आता है जब रसोइये की अंतरात्मा इस कार्य को करके खुद से घृणा करने लगता है। फिर राजा द्वारा रसोइये को भी मांस खिला दिया जाता है। अंत में एक बाह्मण द्वारा राजा और रसोइये का ये भेद सारे नगर के सामने खोल दिया जाता है। ब्राह्मण और नगर की जनता द्वारा रसोइये की अंतरात्मा को चेतना में लाकर राजा के विरुद्ध रसोइए को खड़ा कर दिया जाता।
इन कलाकारों की रही भूमिका
इस नाटक में राजा की भूमिका में डॉ. अंकुर खेर, पकानक की भूमिका में ललित वर्मा, पकानक की पत्नी की भूमिका में हिमानी, राहगीर की भूमिका में गुलशन, कसाई कशिश बत्रा, आत्मा की भूमिका में लक्ष्मी, ब्राह्मण की भूमिका में आरव तथा कोरस में प्रताप, आर्यन, गौरव रहे। मंच संचालन मुकेश भारद्वाज द्वारा किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी सतीश मस्तान, वरिष्ठ रंगकर्मी राम चरण,रमेश वशिष्ठ, ईशु मास्टर, देशराज, राष्ट्रीय लोक कलाकार अभिषेक सैनी, नितिन राठी, आजाद आदि जिले के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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इस अवसर पर मुख्य अतिथि के भाजपा प्रदेश प्रवक्ता वंदना पोपली ने शिरकत की। परिषद के निदेशक नागेंद्र शर्मा की भी उपस्थिति रही। नाट्य निर्देशक मदन डागर ने बताया कि नाटक राजा की रसोई व्यंगात्मक नाटक है। नाटक के जरिये कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर व्यंग्य किया गया है कि कैसे एक राजा सत्ता का दुरुपयोग कर प्रजा का शोषण करता है।
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इस नाटक में राजा को नरभक्षी दिखाकर सत्ताधीशों द्वारा जनता का शोषण दिखाया गया है। राजा के सत्ता प्राप्त करने के बाद जब वो अपना उपवास तोड़ता है तो रसोइये द्वारा नरमांस परोस दिया जाता है। मांस उसे इतना पसंद आता है की वह राज रसोइये को इस बंधन में बांध देता है कि प्रतिदिन आज ही के जैसा मांस पकाना होगा।
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ऐसे दिन प्रतिदिन रसोइया नगर से एक व्यक्ति को मारकर परोस देता है। एक समय ऐसा आता है जब रसोइये की अंतरात्मा इस कार्य को करके खुद से घृणा करने लगता है। फिर राजा द्वारा रसोइये को भी मांस खिला दिया जाता है। अंत में एक बाह्मण द्वारा राजा और रसोइये का ये भेद सारे नगर के सामने खोल दिया जाता है। ब्राह्मण और नगर की जनता द्वारा रसोइये की अंतरात्मा को चेतना में लाकर राजा के विरुद्ध रसोइए को खड़ा कर दिया जाता।
इन कलाकारों की रही भूमिका
इस नाटक में राजा की भूमिका में डॉ. अंकुर खेर, पकानक की भूमिका में ललित वर्मा, पकानक की पत्नी की भूमिका में हिमानी, राहगीर की भूमिका में गुलशन, कसाई कशिश बत्रा, आत्मा की भूमिका में लक्ष्मी, ब्राह्मण की भूमिका में आरव तथा कोरस में प्रताप, आर्यन, गौरव रहे। मंच संचालन मुकेश भारद्वाज द्वारा किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी सतीश मस्तान, वरिष्ठ रंगकर्मी राम चरण,रमेश वशिष्ठ, ईशु मास्टर, देशराज, राष्ट्रीय लोक कलाकार अभिषेक सैनी, नितिन राठी, आजाद आदि जिले के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।