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Rewari News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत याचिका निरस्त की
Thu, 21 Sep 2023 11:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 21 Sep 2023 11:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। धोखाधड़ी कर शहर की सब्जी मंडी स्थित एक दुकान का आधा हिस्सा अपने नाम करने के आरोपी की जमानत याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने निरस्त कर दी है। शहर की नई सब्जी मंडी स्थित दुकान नंबर तीन का मालिकाना हक आधा हिस्सा किशन लाल के नाम चला आ रहा था। आरोप है कि किशन लाल का कोई वारिस न बताते हुए आरोपी ने मार्केट कमेटी में क्षतिपूर्ति बंद पत्र देकर यह स्पष्ट किया कि दुकान का आधा हिस्सा उनके नाम कर दिया जाए। धोखाधड़ी के आरोप के तहत शिकायतकर्ता ने आरोपी के खिलाफ व कई अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। मामले में थाना शहर रेवाड़ी में एफआईआर धोखाधड़ी कर दस्तावेज बनाने एवं दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने की बाबत कई धाराओं में दर्ज की गई है। मामले में अग्रिम जमानत याचिका के लिए ने पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका यह कहकर रद्द कर दी कि जमानत लेना अधिकार नहीं है बल्कि कुछ विशेष परिस्थितियों में ही अग्रिम जमानत दी जा सकती है। मामले में एक पार्षद एवं कई अन्य आरोपी शामिल हैं, जिन्होंने वारिस सर्टिफिकेट को तस्दीक किया था।
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रेवाड़ी। धोखाधड़ी कर शहर की सब्जी मंडी स्थित एक दुकान का आधा हिस्सा अपने नाम करने के आरोपी की जमानत याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने निरस्त कर दी है। शहर की नई सब्जी मंडी स्थित दुकान नंबर तीन का मालिकाना हक आधा हिस्सा किशन लाल के नाम चला आ रहा था। आरोप है कि किशन लाल का कोई वारिस न बताते हुए आरोपी ने मार्केट कमेटी में क्षतिपूर्ति बंद पत्र देकर यह स्पष्ट किया कि दुकान का आधा हिस्सा उनके नाम कर दिया जाए। धोखाधड़ी के आरोप के तहत शिकायतकर्ता ने आरोपी के खिलाफ व कई अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। मामले में थाना शहर रेवाड़ी में एफआईआर धोखाधड़ी कर दस्तावेज बनाने एवं दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने की बाबत कई धाराओं में दर्ज की गई है। मामले में अग्रिम जमानत याचिका के लिए ने पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका यह कहकर रद्द कर दी कि जमानत लेना अधिकार नहीं है बल्कि कुछ विशेष परिस्थितियों में ही अग्रिम जमानत दी जा सकती है। मामले में एक पार्षद एवं कई अन्य आरोपी शामिल हैं, जिन्होंने वारिस सर्टिफिकेट को तस्दीक किया था।