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सुविधा के लिए तीन माह की परेशानी
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Mon, 04 Apr 2016 12:25 AM IST
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सीमेंट की रोड बनाने के लिए काम शुरू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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लोक निर्माण विभाग की ओर से शहर के सर्कुलर रोड की दशा सुधारने के लिए झज्जर चौक से लेकर धारूहेड़ा चुंगी तक के सीमेंट की रोड बनाने के लिए काम शुरू किया गया है, जो मरीजों की जान के लिए खतरा बन गया है। विभाग ने झज्जर चौक से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक रोड को इस कदर खोदा गया है कि ट्रॉमा सेंटर तक एंबुलेंस तो दूर बाइक तक नहीं पहुंच सकती है।ऐसे में झज्जर चौक से मात्र 500 मीटर की दूरी पर पडने वाला ट्रॉमा चार किलोमीटर दूर हो गया है।
जानकारी के अनुसार पीडब्ल्यूडी ने इस सड़क को बजाए दो हिस्सों में बनाने के एक साथ ही खोद दिया है। यदि एक तरफ पहले बनाकर बाद में दूसरी तरफ बनाई जाती तो कम से कम एंबुलेंस तो निकल सकती थी लेकिन विभाग अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है। इतना ही नहीं, दूसरी तरफ धारूहेड़ा चुंगी से आने वाले रास्ते पर भी पत्थरों की दीवार बनाकर छोटा रास्ता छोड़ा गया है।
अब यदि गोकलगढ़ की तरफ एनएच-71 पर कोई दुर्घटना हुई तो घायल को ऐसी स्थिति में या तो रेलवे चौक, नाइवाली चौक, बस स्टैंड, धारूहेड़ा चुंगी होते हुए आना पड़ेगा या फिर हाईवे से होते हुए रामगढ़ रोड से ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचना पड़ेगा। पहले जहां झज्जर चौक से दो मिनट में ट्रॉमा सेंटर पहुंचा जा सकता है, उसमें अब पंद्रह मिनट से लेकर आधे घंटे का समय लग सकता है। क्योंकि धारूहेड़ा चुंगी से बस स्टैंड और नाईवाली चौक पर अक्सर जाम की समस्या रहती है। लोक निर्माण विभाग की माने तो यहां पर सड़क बनने में तीन महीने से ज्यादा का समय लग सकता है।
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राजस्थान-नारनौल रोड एवं एनएच-71 से ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के लिए झज्जर चौक सबसे छोटा रास्ता
नाईवाली चौक से लेकर नारनौल रोड पर पडने वाले सैंकड़ों गांव एवं राजस्थान के अनेक गांव के घायल मरीजों को आपात स्थिति में ट्रॉमा सेंटर में लाया जाता है। इधर गोकलगढ़, लिसाना, बीकानेर एवं एनएच-71 पर होने वाली दुर्घटनाओं एवं गांव से मरीजों को लाने के लिए भी झज्जर चौक ही सबसे सुगम एवं कम समय लगने वाला रास्ता है।
झज्जर चौक ट्रॉमा सेंटर एवं नागरिक अस्पताल से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर ट्रैफिक का दवाब भी कम रहता है, इसलिए झज्जर चौके से ट्रॉमा सेंटर की दूरी तय करने में एंबुलैंस को महज दो मिनट का समय लगात है। अब रास्ता बंद हो जाने की वजह से नारनौल रोड की तरफ से आने वाली एंबुलेंस को बस स्टैंड-धारूहेंडा चुंगी होते हुए लगभग तीन किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।
वहीं एनएच-71 पर होने वाले हादसों के पीड़ितों को ट्रॉमा तक लाने के लिए एंबुलेंस को पटौदी रोड से होते हुए नसियाजी रोड पर से 6 किमी. की ज्यादा दूरी तय करनी पड़ेगी। ज्यादा समय लगने के कारण अब हादसे में घायलों की जिंदगी रामभरोसे ही रह गई है। इतना ही नहीं यहां पर कारोबार करने वाले दो दर्जन से ज्यादा व्यापारियों के लिए भी यह जंजाल बन गई है। इस रास्ते पर एक बैंक पोस्ट ऑफिस, पैट्रोल पंप सहित अनेक प्रतिष्ठान है, लेेकिन अव्यवस्थित काम चलने की वजह से सब परेशान नजर आ रहे हैं।
ट्रॉमा सेंटर के पास ही नागरिक अस्पताल है। यहां भी हर दिन करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। अब इन्हें भी इस गर्मी में काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी। दूरदराज से आने वाले मरीजों को ऑटो में दूसरे रास्तों से अस्पताल तक पहुंचना पड़ेगा। सीरियस मरीजों को गर्मी के बीच पीडब्ल्यूडी की लापरवाही भारी पड़ सकती है।
साढ़े छह करोड़ की लागत से तीन महीने में बनेगी सड़क
झज्जर चौक से लेकर धारूहेड़ा चुंगी तक की बदहाल सड़क की दशा को सुधारने के लिए छह करोड़ की लागत से तीन महीने में सड़क का निर्माण कार्य पूरा होना है। विकास की गाति के लिए सड़कों का सुधार के विरोध में कोई नहीं खड़ा हो सकता है,लेकिन इस दौरान घायलों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर रोक लगाकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करना भी कतई ठीक नहीं कहा जा सकता है। गौरतलब है कि साढ़े चार किमी के सर्कुलर रोड पर अंबेडकर चौक से लेकर झज्जर चौक तक पहले की सीमेंट की रोड बन चुकी है।
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वर्जन
थोड़ी सुविधाओं के लिए परेशानी उठाना गलत नहीं है। फिर भी पटौदी रोड़ एवं नाईवाली चौक से होते हुए ट्रॉमा सेंटर पहुंचा जा सकता है। काम चल रहा है, जो कि लगभग तीन महीने में पूरा हो जाएगा।
-ऐके सिंगला,कार्यकारी अभियंता, लोनिवि
इलाज में देरी से यदि किसी की मौत हो जाती है तो वह लोक निर्माण विभाग को पार्टी बनाकर उसे कोर्ट में चुनौती दे सकता है। ऐसी स्थिति मेें कोर्ट विभाग पर जुर्माना भी लगा सकती है। क्योंकि लोक निर्माण विभाग ने रास्ता रोक दिया है। विभाग को वैकल्पिक छोटा मार्ग देना चाहिए था या फिर सड़क दो हिस्सों में बनानी चाहिए थी।
-नरेश चौहान, एडवोकेट
वर्जन
रास्ता बंद होने से मरीजों को बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है। चार किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इलाज में देरी होने से मरीज की मौत भी हो सकती है। क्योंकि सीरियस मरीज के लिए पहला समय बहुत कीमती होता है।
डॉ सुदर्शन पंवार, एसएमओ, नागरिक अस्पताल
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जानकारी के अनुसार पीडब्ल्यूडी ने इस सड़क को बजाए दो हिस्सों में बनाने के एक साथ ही खोद दिया है। यदि एक तरफ पहले बनाकर बाद में दूसरी तरफ बनाई जाती तो कम से कम एंबुलेंस तो निकल सकती थी लेकिन विभाग अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है। इतना ही नहीं, दूसरी तरफ धारूहेड़ा चुंगी से आने वाले रास्ते पर भी पत्थरों की दीवार बनाकर छोटा रास्ता छोड़ा गया है।
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अब यदि गोकलगढ़ की तरफ एनएच-71 पर कोई दुर्घटना हुई तो घायल को ऐसी स्थिति में या तो रेलवे चौक, नाइवाली चौक, बस स्टैंड, धारूहेड़ा चुंगी होते हुए आना पड़ेगा या फिर हाईवे से होते हुए रामगढ़ रोड से ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचना पड़ेगा। पहले जहां झज्जर चौक से दो मिनट में ट्रॉमा सेंटर पहुंचा जा सकता है, उसमें अब पंद्रह मिनट से लेकर आधे घंटे का समय लग सकता है। क्योंकि धारूहेड़ा चुंगी से बस स्टैंड और नाईवाली चौक पर अक्सर जाम की समस्या रहती है। लोक निर्माण विभाग की माने तो यहां पर सड़क बनने में तीन महीने से ज्यादा का समय लग सकता है।
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राजस्थान-नारनौल रोड एवं एनएच-71 से ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के लिए झज्जर चौक सबसे छोटा रास्ता
नाईवाली चौक से लेकर नारनौल रोड पर पडने वाले सैंकड़ों गांव एवं राजस्थान के अनेक गांव के घायल मरीजों को आपात स्थिति में ट्रॉमा सेंटर में लाया जाता है। इधर गोकलगढ़, लिसाना, बीकानेर एवं एनएच-71 पर होने वाली दुर्घटनाओं एवं गांव से मरीजों को लाने के लिए भी झज्जर चौक ही सबसे सुगम एवं कम समय लगने वाला रास्ता है।
झज्जर चौक ट्रॉमा सेंटर एवं नागरिक अस्पताल से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर ट्रैफिक का दवाब भी कम रहता है, इसलिए झज्जर चौके से ट्रॉमा सेंटर की दूरी तय करने में एंबुलैंस को महज दो मिनट का समय लगात है। अब रास्ता बंद हो जाने की वजह से नारनौल रोड की तरफ से आने वाली एंबुलेंस को बस स्टैंड-धारूहेंडा चुंगी होते हुए लगभग तीन किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।
वहीं एनएच-71 पर होने वाले हादसों के पीड़ितों को ट्रॉमा तक लाने के लिए एंबुलेंस को पटौदी रोड से होते हुए नसियाजी रोड पर से 6 किमी. की ज्यादा दूरी तय करनी पड़ेगी। ज्यादा समय लगने के कारण अब हादसे में घायलों की जिंदगी रामभरोसे ही रह गई है। इतना ही नहीं यहां पर कारोबार करने वाले दो दर्जन से ज्यादा व्यापारियों के लिए भी यह जंजाल बन गई है। इस रास्ते पर एक बैंक पोस्ट ऑफिस, पैट्रोल पंप सहित अनेक प्रतिष्ठान है, लेेकिन अव्यवस्थित काम चलने की वजह से सब परेशान नजर आ रहे हैं।
ट्रॉमा सेंटर के पास ही नागरिक अस्पताल है। यहां भी हर दिन करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। अब इन्हें भी इस गर्मी में काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी। दूरदराज से आने वाले मरीजों को ऑटो में दूसरे रास्तों से अस्पताल तक पहुंचना पड़ेगा। सीरियस मरीजों को गर्मी के बीच पीडब्ल्यूडी की लापरवाही भारी पड़ सकती है।
साढ़े छह करोड़ की लागत से तीन महीने में बनेगी सड़क
झज्जर चौक से लेकर धारूहेड़ा चुंगी तक की बदहाल सड़क की दशा को सुधारने के लिए छह करोड़ की लागत से तीन महीने में सड़क का निर्माण कार्य पूरा होना है। विकास की गाति के लिए सड़कों का सुधार के विरोध में कोई नहीं खड़ा हो सकता है,लेकिन इस दौरान घायलों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर रोक लगाकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करना भी कतई ठीक नहीं कहा जा सकता है। गौरतलब है कि साढ़े चार किमी के सर्कुलर रोड पर अंबेडकर चौक से लेकर झज्जर चौक तक पहले की सीमेंट की रोड बन चुकी है।
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वर्जन
थोड़ी सुविधाओं के लिए परेशानी उठाना गलत नहीं है। फिर भी पटौदी रोड़ एवं नाईवाली चौक से होते हुए ट्रॉमा सेंटर पहुंचा जा सकता है। काम चल रहा है, जो कि लगभग तीन महीने में पूरा हो जाएगा।
-ऐके सिंगला,कार्यकारी अभियंता, लोनिवि
इलाज में देरी से यदि किसी की मौत हो जाती है तो वह लोक निर्माण विभाग को पार्टी बनाकर उसे कोर्ट में चुनौती दे सकता है। ऐसी स्थिति मेें कोर्ट विभाग पर जुर्माना भी लगा सकती है। क्योंकि लोक निर्माण विभाग ने रास्ता रोक दिया है। विभाग को वैकल्पिक छोटा मार्ग देना चाहिए था या फिर सड़क दो हिस्सों में बनानी चाहिए थी।
-नरेश चौहान, एडवोकेट
वर्जन
रास्ता बंद होने से मरीजों को बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है। चार किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इलाज में देरी होने से मरीज की मौत भी हो सकती है। क्योंकि सीरियस मरीज के लिए पहला समय बहुत कीमती होता है।
डॉ सुदर्शन पंवार, एसएमओ, नागरिक अस्पताल