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Rewari News: बिना आभा आईडी के अल्ट्रासाउंड नहीं करा सकेंगी गर्भवती
Sat, 28 Feb 2026 11:43 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 28 Feb 2026 11:43 PM IST
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रेवाड़ी। स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने और जच्चा-बच्चा की सेहत की सटीक मॉनिटरिंग करने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। अब किसी भी गर्भवती का अल्ट्रासाउंड बिना आभा (आयुष्मान हेल्थ अकाउंट) आईडी के नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने आरसीएच पोर्टल का नया वर्जन 2.0 लॉन्च कर इसे आभा आईडी से जोड़ दिया है।
इससे देशभर में मातृ-शिशु की पहचान और उपचार एक ही आईडी के माध्यम से संभव हो सकेगा। नए नियमों के तहत बिना आभा आईडी के किसी भी गर्भवती महिला की सोनोग्राफी नहीं होगी। यह व्यवस्था केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं है बल्कि निजी क्लीनिक और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर भी समान रूप से लागू रहेगी।
आभा आईडी बनने के बाद मरीजों को अपनी पुरानी पर्चियां और जांच रिपोर्ट साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी। सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे और जरूरत पड़ने पर देश में कहीं भी एक्सेस किए जा सकेंगे।
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सरकार ने 1 दिसंबर 2025 से स्वास्थ्य सेवाओं में आभा आईडी अनिवार्य कर दी थी लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है। अब केवल गर्भवती महिलाएं ही नहीं, बल्कि ओपीडी में आने वाले प्रत्येक मरीज के लिए भी आभा आईडी जरूरी होगी।
14 अंकों का विशिष्ट पहचान पत्र
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत जारी की जाने वाली आभा आईडी 14 अंकों की विशिष्ट पहचान पत्र है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से स्टोर और साझा कर सकता है। हर एएनएम और आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कर आरसीएच आईडी जारी कर रही हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान की जाएगी। विवाहिता महिलाओं की आभा आईडी पहले से बनाई जाएगी और गर्भावस्था की पुष्टि होते ही संबंधित लाभार्थी को मोबाइल पर एसएमएस भेजा जाएगा। आरसीएच पोर्टल के पहले संस्करण में केवल गर्भवती महिला का डाटा दर्ज होता था लेकिन वर्जन 2.0 लागू होने के बाद अब एक ही आईडी से पूरे देश में उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी।
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वर्जन
स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार सभी नागरिकों के लिए आभा आईडी बनवाना आवश्यक है। जिन महिलाओं की आभा आईडी अभी तक नहीं बनी है, उनकी तुरंत आईडी गायनेकॉलोजिस्ट बनवाएं। इसके बिना अल्ट्रासाउंड संभव नहीं होगा।-डॉ. विशाल राव, डिप्टी सिविल सर्जन।
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इससे देशभर में मातृ-शिशु की पहचान और उपचार एक ही आईडी के माध्यम से संभव हो सकेगा। नए नियमों के तहत बिना आभा आईडी के किसी भी गर्भवती महिला की सोनोग्राफी नहीं होगी। यह व्यवस्था केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं है बल्कि निजी क्लीनिक और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर भी समान रूप से लागू रहेगी।
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आभा आईडी बनने के बाद मरीजों को अपनी पुरानी पर्चियां और जांच रिपोर्ट साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी। सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे और जरूरत पड़ने पर देश में कहीं भी एक्सेस किए जा सकेंगे।
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सरकार ने 1 दिसंबर 2025 से स्वास्थ्य सेवाओं में आभा आईडी अनिवार्य कर दी थी लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है। अब केवल गर्भवती महिलाएं ही नहीं, बल्कि ओपीडी में आने वाले प्रत्येक मरीज के लिए भी आभा आईडी जरूरी होगी।
14 अंकों का विशिष्ट पहचान पत्र
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत जारी की जाने वाली आभा आईडी 14 अंकों की विशिष्ट पहचान पत्र है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से स्टोर और साझा कर सकता है। हर एएनएम और आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कर आरसीएच आईडी जारी कर रही हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान की जाएगी। विवाहिता महिलाओं की आभा आईडी पहले से बनाई जाएगी और गर्भावस्था की पुष्टि होते ही संबंधित लाभार्थी को मोबाइल पर एसएमएस भेजा जाएगा। आरसीएच पोर्टल के पहले संस्करण में केवल गर्भवती महिला का डाटा दर्ज होता था लेकिन वर्जन 2.0 लागू होने के बाद अब एक ही आईडी से पूरे देश में उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी।
वर्जन
स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार सभी नागरिकों के लिए आभा आईडी बनवाना आवश्यक है। जिन महिलाओं की आभा आईडी अभी तक नहीं बनी है, उनकी तुरंत आईडी गायनेकॉलोजिस्ट बनवाएं। इसके बिना अल्ट्रासाउंड संभव नहीं होगा।-डॉ. विशाल राव, डिप्टी सिविल सर्जन।