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20 साल में ढाई गुणा बढ़ी आबादी, रोडवेज की बसों की संख्या में नहीं हुई बढ़ोत्तरी
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बस स्टैंड में खड़ी रोडवेज बसें। संवाद
- फोटो : Rewari
महेश कुमार यादव
रेवाड़ी। पिछले 20 साल में रेवाड़ी जिला की आबादी लगभग ढ़ाई गुणा बढ़ी हैं। लेकिन आबादी के हिसाब से जिला रोडवेज बस सेवा में बढ़ोत्तरी नहीं हुई। 20 साल बीत जाने के बाद भी रोडवेज की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी होने के बाद घटती गई। जिले को अभी दो सौ रोडवेज बसों की आवश्यकता है।
हालांकि रेवाड़ी डिपो को मिलने वाली 30 नई बसों के बाद कुछ राहत मिलेगी। वहीं रेवाड़ी, कोसली व धारूहेड़ा बस स्टैंड की हालत बिल्कुल जर्जर हो चुकी है। कई साल पहले इन्हें कंडम घोषित किया जा चुका है। रेवाड़ी को वर्ष 1972 डिपो घोषित किया गया था। उस समय रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ एक ही जिला हुआ करता था। लेकिन रेवाड़ी डिपो हुआ करता था। वहीं नारनौल सब डिपो था। वर्ष 1972 में ही रेवाड़ी बस स्टैंड की बिल्डिंग का निर्माण हुआ था। तब से रेवाड़ी बस स्टैंड उसी बिल्डिंग में चल रहा है। कई वर्ष पहले इस बिल्डिंग को कंडम घोषित किया जा चुका है। लेकिन नए स्टैंड बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू होने के कारण आज भी उसी बिल्डिंग में बस स्टैंड चल रहा है। वर्ष 1996 में नारनौल को अलग से डिपो बनाया गया। उस समय रेवाड़ी व नारनौल दोनों डिपो में 250 रोडवेज बस हुआ करती थी। नारनौल को अलग से डिपो बनाए जाने के बाद 90 बसें नारनौल डिपो को दी गई थी। वहीं वर्ष 2000 में रेवाड़ी की आबादी लगभग 4 लाख हुआ करती थी। 20 साल में रेवाड़ी जिला की आबादी ढाई गुणा बढ़कर 10 लाख से अधिक हो गई हैं। लेकिन अभी भी रोडवेज डिपो में केवल 151 बसें ही हैं। 20 वर्ष पहले भी रोडवेज बसों की संख्या इतनी ही हुआ करती थी। संवाद
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इन मार्गों पर है रोडवेज बसों की कमी
जिले के कई रूट ऐसे हैं जिन पर केवल नाममात्र की रोडवेज बसें चलती हैं। वहीं कोरोना महामारी के बाद लगभग अधिकांश रूटों पर रोडवेज बसों की जगह परमिट बसों को समय दे दिया गया है। महेंद्रगढ़, नारनौल, पटौदी, झज्जर व धारूहेड़ा जैसे बड़े रूटों पर रोडवेज की जगह परमिट बसों को समय दे दिया गया है। परिवहन विभाग द्वारा जो समय परमिट बसों को दिया गया है, वह विद्यार्थियों के स्कूल व कॉलेजों में आने जाने का है। ऐसे में विद्यार्थियों को घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ता है।
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अगले साल 19 बसें होंगी खराब
स्थानीय डिपो में लगातार बसों की संख्या कम हो रही है। दो माह पहले भी 7 बसों की आयु 10 वर्ष पूरी होने पर उन्हें खराब घोषित कर दिया है। वहीं पिछले वर्ष भी 10 बसों की आयु सीमा पूरी होने पर उन्हें खराब घोषित कर दिया जाएगा। इस बसों में से 19 बसें अगले वर्ष के शुरुआत में आयु सीमा पूरी होने के बाद खराब घोषित कर दी जाएंगी। इन सभी बसों को दो साल का एक्सटेंशन मिला हुआ है। वहीं पिछले कई वर्षों से विभाग को कोई बस नहीं मिली है।
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निर्मित मकानों के मुआवजे में अटकी बस स्टैंड की फाइल
जिले में बनने वाले नए बस स्टैंड की फाइल दो कदम आगे तो पांच कदम पीछे सरकती है। यही कारण है कि सालों से बस स्टैंड के निर्माण का मामला कभी कोर्ट तो कभी सरकारी अधिकारियों के बीच ही फंसा पड़ा हुआ है। अब हाल ही में बड़ा विवाद बस स्टैंड की अधिगृहीत जमीन पर बने मकानों को लेकर खड़ा हो रहा है। परिवहन विभाग को इन मकानों का मुआवजा देना है, लेकिन जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि जमीन अधिग्रहण के बाद यहां निर्माण हुआ है। ऐसे में रोडवेज की ओर से अब लोकनिर्माण विभाग को पत्र भेजकर बने हुए मकानों का आकलन करने के लिए कहा गया है।
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वर्ष 2013 में हुआ था शुभारंभ
वर्ष 2013 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सनसिटी प्रोजेक्ट के सामने व रामगढ़ भगवानपुर की ओर जाने वाले दोनों मुख्य रोड से सटे हुए सेक्टर-12 में बस स्टैंड का शिलान्यास किया था। इसके लिए अधिगृहीत की गई भूमि के विरोध में शिंभू दयाल व अन्य द्वारा एक याचिका वर्ष 2013 में डाली गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि अधिगृहीत की गई 20 एकड़ 1 कनाल 5 मरला जमीन ओपन एरिया के लिए रिजर्व रखी गई थी, परंतु सरकार इस पर बस स्टैंड बना रही है, जो गलत है। इस याचिका को हाई कोर्ट ने वर्ष 2016 में खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता इसके बाद उच्चतम न्यायालय में चले गए। उच्चतम न्यायालय में भी यह मामला पिछले साल खारिज हो गया था।
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कोसली में वर्कशाप बनी, बस स्टैंड का अभी इंतजार
कोसली को वर्ष 2006 में सब डिपो बनाया गया था। कोसली सब डिपो अभी भी वर्ष 1986 में बनाई गई बिल्डिंग में ही चल रहा है। इस भवन की हालात बिल्कुल जर्जर हो चुकी है। कई साल पहले इसे कंडम घोषित किया जा चुका है। लेकिन नए भवन नहीं मिलने के कारण अभी कंडम भवन में सब डिपो चल रहा है। वहीं कोसली में बनने वाली रोडवेज वर्कशाप बनकर तैयार हो चुकी है।
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धारूहेड़ा बस स्टैंड का साइट प्लान हुुआ तैयार
धारूहेड़ा बस स्टैंड को भी कई वर्षों पहले कंडम घोषित किया जा चुका है। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर धारूहेड़ा बस होने के कारण काफी संख्या यात्री का आवागमन होता है। लेकिन बस स्टैंड न होने के कारण यात्रियों काफी परेशानी उठानी पड़ती हैं। नए बस स्टैंड निर्माण के लिए पीडब्लूडी को साइट प्लान तैयार करने को कहा गया है। साइट प्लान तैयार होने के बाद नए बस स्टैंड को टेंडर होगा।
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इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बसों की कमी के चलते काफी परेशानी उठानी पड़ती है। विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से आईजीयू प्रदेश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। लेकिन बसों को कमी के चलते विद्यार्थियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। विद्यार्थियों की मांग को देखते हुए परिवहन विभाग बसों की संख्या में बढ़ोत्तरी करनी चाहिए।
- रवि मसीत, यूनिवर्सिटी अध्यक्ष इनसो।
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रोडवेज बसों की कमी के चलते स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई मार्गों पर रोडवेज बस सेवा केवल नाममात्र की ही रह गई है। रोडवेज बसों की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। आबादी के हिसाब के रोडवेज बसों की संख्या में बढ़ोत्तरी होनी चाहिए।
- विशाल, जिला संयोजक एबीवीपी।
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पिछले 20 साल में जिले की आबादी काफी बढ़ी है। आबादी के हिसाब से रोडवेज बसों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी होनी चाहिए। रोडवेज बसों की कमी के चलते यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही हैै। बीते साल में रेवाड़ी की आबादी तीन गुणा बढ़ी है। जिले को अभी भी 200 बसों की आवश्यकता है।
- बाबूलाल यादव, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रोडवेज यूनियन
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आज के 20 वर्ष पहले रेवाड़ी डिपो में 160 बसें हुआ करती थी। अब जिले की आबादी में तीन गुणा बढ़ोत्तरी हुई है। जिले की आबादी के अनुसार रोडवेज बेड़े में दो सौ बसों को शामिल करना चाहिए। ताकि यात्रियों किसी प्रकार परेशानी नहीं उठानी पड़े।
- भगत सिंह सांभरिया, रिटायर इंस्पेक्टर रोडवेज विभाग।
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रेवाड़ी। पिछले 20 साल में रेवाड़ी जिला की आबादी लगभग ढ़ाई गुणा बढ़ी हैं। लेकिन आबादी के हिसाब से जिला रोडवेज बस सेवा में बढ़ोत्तरी नहीं हुई। 20 साल बीत जाने के बाद भी रोडवेज की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी होने के बाद घटती गई। जिले को अभी दो सौ रोडवेज बसों की आवश्यकता है।
हालांकि रेवाड़ी डिपो को मिलने वाली 30 नई बसों के बाद कुछ राहत मिलेगी। वहीं रेवाड़ी, कोसली व धारूहेड़ा बस स्टैंड की हालत बिल्कुल जर्जर हो चुकी है। कई साल पहले इन्हें कंडम घोषित किया जा चुका है। रेवाड़ी को वर्ष 1972 डिपो घोषित किया गया था। उस समय रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ एक ही जिला हुआ करता था। लेकिन रेवाड़ी डिपो हुआ करता था। वहीं नारनौल सब डिपो था। वर्ष 1972 में ही रेवाड़ी बस स्टैंड की बिल्डिंग का निर्माण हुआ था। तब से रेवाड़ी बस स्टैंड उसी बिल्डिंग में चल रहा है। कई वर्ष पहले इस बिल्डिंग को कंडम घोषित किया जा चुका है। लेकिन नए स्टैंड बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू होने के कारण आज भी उसी बिल्डिंग में बस स्टैंड चल रहा है। वर्ष 1996 में नारनौल को अलग से डिपो बनाया गया। उस समय रेवाड़ी व नारनौल दोनों डिपो में 250 रोडवेज बस हुआ करती थी। नारनौल को अलग से डिपो बनाए जाने के बाद 90 बसें नारनौल डिपो को दी गई थी। वहीं वर्ष 2000 में रेवाड़ी की आबादी लगभग 4 लाख हुआ करती थी। 20 साल में रेवाड़ी जिला की आबादी ढाई गुणा बढ़कर 10 लाख से अधिक हो गई हैं। लेकिन अभी भी रोडवेज डिपो में केवल 151 बसें ही हैं। 20 वर्ष पहले भी रोडवेज बसों की संख्या इतनी ही हुआ करती थी। संवाद
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इन मार्गों पर है रोडवेज बसों की कमी
जिले के कई रूट ऐसे हैं जिन पर केवल नाममात्र की रोडवेज बसें चलती हैं। वहीं कोरोना महामारी के बाद लगभग अधिकांश रूटों पर रोडवेज बसों की जगह परमिट बसों को समय दे दिया गया है। महेंद्रगढ़, नारनौल, पटौदी, झज्जर व धारूहेड़ा जैसे बड़े रूटों पर रोडवेज की जगह परमिट बसों को समय दे दिया गया है। परिवहन विभाग द्वारा जो समय परमिट बसों को दिया गया है, वह विद्यार्थियों के स्कूल व कॉलेजों में आने जाने का है। ऐसे में विद्यार्थियों को घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ता है।
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अगले साल 19 बसें होंगी खराब
स्थानीय डिपो में लगातार बसों की संख्या कम हो रही है। दो माह पहले भी 7 बसों की आयु 10 वर्ष पूरी होने पर उन्हें खराब घोषित कर दिया है। वहीं पिछले वर्ष भी 10 बसों की आयु सीमा पूरी होने पर उन्हें खराब घोषित कर दिया जाएगा। इस बसों में से 19 बसें अगले वर्ष के शुरुआत में आयु सीमा पूरी होने के बाद खराब घोषित कर दी जाएंगी। इन सभी बसों को दो साल का एक्सटेंशन मिला हुआ है। वहीं पिछले कई वर्षों से विभाग को कोई बस नहीं मिली है।
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निर्मित मकानों के मुआवजे में अटकी बस स्टैंड की फाइल
जिले में बनने वाले नए बस स्टैंड की फाइल दो कदम आगे तो पांच कदम पीछे सरकती है। यही कारण है कि सालों से बस स्टैंड के निर्माण का मामला कभी कोर्ट तो कभी सरकारी अधिकारियों के बीच ही फंसा पड़ा हुआ है। अब हाल ही में बड़ा विवाद बस स्टैंड की अधिगृहीत जमीन पर बने मकानों को लेकर खड़ा हो रहा है। परिवहन विभाग को इन मकानों का मुआवजा देना है, लेकिन जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि जमीन अधिग्रहण के बाद यहां निर्माण हुआ है। ऐसे में रोडवेज की ओर से अब लोकनिर्माण विभाग को पत्र भेजकर बने हुए मकानों का आकलन करने के लिए कहा गया है।
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वर्ष 2013 में हुआ था शुभारंभ
वर्ष 2013 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सनसिटी प्रोजेक्ट के सामने व रामगढ़ भगवानपुर की ओर जाने वाले दोनों मुख्य रोड से सटे हुए सेक्टर-12 में बस स्टैंड का शिलान्यास किया था। इसके लिए अधिगृहीत की गई भूमि के विरोध में शिंभू दयाल व अन्य द्वारा एक याचिका वर्ष 2013 में डाली गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि अधिगृहीत की गई 20 एकड़ 1 कनाल 5 मरला जमीन ओपन एरिया के लिए रिजर्व रखी गई थी, परंतु सरकार इस पर बस स्टैंड बना रही है, जो गलत है। इस याचिका को हाई कोर्ट ने वर्ष 2016 में खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता इसके बाद उच्चतम न्यायालय में चले गए। उच्चतम न्यायालय में भी यह मामला पिछले साल खारिज हो गया था।
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कोसली में वर्कशाप बनी, बस स्टैंड का अभी इंतजार
कोसली को वर्ष 2006 में सब डिपो बनाया गया था। कोसली सब डिपो अभी भी वर्ष 1986 में बनाई गई बिल्डिंग में ही चल रहा है। इस भवन की हालात बिल्कुल जर्जर हो चुकी है। कई साल पहले इसे कंडम घोषित किया जा चुका है। लेकिन नए भवन नहीं मिलने के कारण अभी कंडम भवन में सब डिपो चल रहा है। वहीं कोसली में बनने वाली रोडवेज वर्कशाप बनकर तैयार हो चुकी है।
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धारूहेड़ा बस स्टैंड का साइट प्लान हुुआ तैयार
धारूहेड़ा बस स्टैंड को भी कई वर्षों पहले कंडम घोषित किया जा चुका है। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर धारूहेड़ा बस होने के कारण काफी संख्या यात्री का आवागमन होता है। लेकिन बस स्टैंड न होने के कारण यात्रियों काफी परेशानी उठानी पड़ती हैं। नए बस स्टैंड निर्माण के लिए पीडब्लूडी को साइट प्लान तैयार करने को कहा गया है। साइट प्लान तैयार होने के बाद नए बस स्टैंड को टेंडर होगा।
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इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बसों की कमी के चलते काफी परेशानी उठानी पड़ती है। विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से आईजीयू प्रदेश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। लेकिन बसों को कमी के चलते विद्यार्थियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। विद्यार्थियों की मांग को देखते हुए परिवहन विभाग बसों की संख्या में बढ़ोत्तरी करनी चाहिए।
- रवि मसीत, यूनिवर्सिटी अध्यक्ष इनसो।
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रोडवेज बसों की कमी के चलते स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई मार्गों पर रोडवेज बस सेवा केवल नाममात्र की ही रह गई है। रोडवेज बसों की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। आबादी के हिसाब के रोडवेज बसों की संख्या में बढ़ोत्तरी होनी चाहिए।
- विशाल, जिला संयोजक एबीवीपी।
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पिछले 20 साल में जिले की आबादी काफी बढ़ी है। आबादी के हिसाब से रोडवेज बसों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी होनी चाहिए। रोडवेज बसों की कमी के चलते यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही हैै। बीते साल में रेवाड़ी की आबादी तीन गुणा बढ़ी है। जिले को अभी भी 200 बसों की आवश्यकता है।
- बाबूलाल यादव, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रोडवेज यूनियन
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आज के 20 वर्ष पहले रेवाड़ी डिपो में 160 बसें हुआ करती थी। अब जिले की आबादी में तीन गुणा बढ़ोत्तरी हुई है। जिले की आबादी के अनुसार रोडवेज बेड़े में दो सौ बसों को शामिल करना चाहिए। ताकि यात्रियों किसी प्रकार परेशानी नहीं उठानी पड़े।
- भगत सिंह सांभरिया, रिटायर इंस्पेक्टर रोडवेज विभाग।