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Haryana: डार्क जोन में बेर की बागवानी; लाखों में हो रही कमाई, गौरव ने कोरोना काल में कुछ अलग करने की ठानी

Wed, 03 Jan 2024 03:50 PM IST
नवीन दलाल दिनेश चौहान, रेवाड़ी
दिनेश चौहान, रेवाड़ी Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 03 Jan 2024 03:50 PM IST
सार

डार्क जोन में कम पानी के साथ इस तरह की बागवानी से गौरव आसपास चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, परिवार भी बेर की बागवानी से खुश नजर आ रहा है। गौरव ने बताया कि इस बार 2 एकड़ की बेर की बागवानी फसल से लगभग 7 लाख मुनाफा होने की उम्मीद है।

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Plum gardening in dark zone in Haryana; Earning in lakhs
किसान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

खेती के लिए बाधक बनता गिरता भू-जलस्तर एक तरफ जहां किसानों के लिए बड़ी समस्या बन रहा है तो वहीं, युवा किसान गौरव ने मन में कुछ अलग करने की ठानी। मेडिकल में डिप्लोमा धारक गौरव को कोरोनाकाल में अन्य रोजगार के साथ-साथ पिता रामकिशन कीपरचून की छोटी सी दुकान भी आजीविका के लिए डगमगाती नजर आई तो खेती में ही भाग्य आजमाने की ठानी। खोल ब्लॉक के डार्क जोन के अंतर्गत आने वाले गांव कुंडल में खेती कर पाना काफी मुश्किल है।

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ऐसे में गौरव को बागवानी करने का विचार आया। कम पानी में बागवानी के साथ गौरव के पास केवल एक विकल्प बेर की बागवानी का था। 2021 में अपने पिता राम किशन के साथ मिलकर 2 एकड़ जमीन पर बेर की बागवानी शुरू की। पानी की किल्लत के चलते इन पौधों में ड्रॉपिंग सिस्टम से पानी दिया। गौरव ने यहां लगभग आधा दर्जन उन्नत किस्म के बेरों की पौध जिनमें ग्रीन एप्पल, कश्मीरी एप्पल, रेड सुंदरी, बोल सुंदरी व बगैर गुठली के बेर की बागवानी देशी खाद की मदद से 2 एकड़ की फसल साढ़े तीन लाख मात्र डेढ़ साल में मुनाफे के साथ बेची।
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बार करीब 7 लाख मुनाफा होने की उम्मीद
डार्क जोन में कम पानी के साथ इस तरह की बागवानी से गौरव आसपास चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, परिवार भी बेर की बागवानी से खुश नजर आ रहा है। गौरव ने बताया कि इस बार 2 एकड़ की बेर की बागवानी फसल से लगभग 7 लाख मुनाफा होने की उम्मीद है। गौरव के पिता ने बताया कि डार्क जोन में अच्छे मुनाफे के साथ कम पानी से बागवानी कर आस पास के डार्क जोन के किसानों को एक अच्छा सन्देश देने का काम किया है। साथ ही एक नई आशा की किरण जगाने का काम किया है।
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एक साल की ड्रॉपिंग सिस्टम से कम पानी लगा कर बाग किया जा सकता है तैयार
गौरव का कहना है कि केवल 1 साल की ड्रॉपिंग सिस्टम से कम पानी लगा कर बाग तैयार किया जा सकता है। उसके बाद पानी की जरूरत न के बराबर होती है। केवल बरसात के पानी से ही काम चल जाता है। आमदनी अन्य पानी की लागत वाली फसलों से कई गुणा अधिक होती है। एक या डेढ़ साल में बाग लग जाने के बाद ज्यादा देख भाल की जरूरत नही होती है।

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