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Rewari News: गाजर घास के दुष्प्रभाव बता कर उन्मूलन का लिया संकल्प
Sat, 22 Aug 2026 11:39 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 22 Aug 2026 11:39 PM IST
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कृषि महाविद्यालय बावल में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते स्टाफ व विद्यार्थी। स्त्रोत: महाविद्याल
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बावल। कृषि महाविद्यालय बावल में गाजर घास जागरूकता सप्ताह का शनिवार को समापन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को गाजर घास के दुष्प्रभाव, पहचान, रोकथाम और नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी गई।
समापन समारोह में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत ने कहा कि गाजर घास मानव, पशु और पर्यावरण के लिए हानिकारक खरपतवार है। लगातार संपर्क में आने से एलर्जी, बुखार, दमा और एक्जिमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
पशुओं के लिए भी यह नुकसानदायक है और इसके सेवन से दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यह तेजी से फैलने वाला खरपतवार है।
एक पौधा 25 हजार से अधिक बीज पैदा कर सकता है, जिससे यह खेतों, खाली स्थानों, सड़कों के किनारे और सार्वजनिक क्षेत्रों में तेजी से फैलता है। इसके नियंत्रण के लिए भौतिक, जैविक और रासायनिक विधियों का समन्वित उपयोग जरूरी है।
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समापन समारोह में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत ने कहा कि गाजर घास मानव, पशु और पर्यावरण के लिए हानिकारक खरपतवार है। लगातार संपर्क में आने से एलर्जी, बुखार, दमा और एक्जिमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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पशुओं के लिए भी यह नुकसानदायक है और इसके सेवन से दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यह तेजी से फैलने वाला खरपतवार है।
एक पौधा 25 हजार से अधिक बीज पैदा कर सकता है, जिससे यह खेतों, खाली स्थानों, सड़कों के किनारे और सार्वजनिक क्षेत्रों में तेजी से फैलता है। इसके नियंत्रण के लिए भौतिक, जैविक और रासायनिक विधियों का समन्वित उपयोग जरूरी है।
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