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गोकशी का हॉटस्पॉट बना नूंह: प्रदेश के 9 गांवों में ठिकानों का पता चला, राजस्थान पुलिस ने पत्र भेजकर किया अलर्ट
Mon, 26 Feb 2024 08:33 AM IST
नवीन दलाल
प्रवेश चौहान, रेवाड़ी (हरियाणा)
प्रवेश चौहान, रेवाड़ी (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Mon, 26 Feb 2024 08:33 AM IST
सार
राजस्थान पुलिस ने हरियाणा पुलिस को पत्र भेजकर गोकशी नेटवर्क के बारे में अलर्ट किया गया है। गोकशी के मामले में नूंह हॉटस्पॉट बना हुआ है। इसनें प्रदेश के 9 गांवों में ठिकानों का पता चला है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
राजस्थान के किशनगढ़ बास थानाक्षेत्र के रूंध, गिदावड़ा में गोकशी और बीफ मंडी चलाने के आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। पुलिस को मालूम चला है कि पूरा नेटवर्क केवल अलवर तक ही सीमित नहीं है। यह नेटवर्क हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी फैला हुआ है।
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13 आरोपी कई वर्षों से कर रहे गोतस्करी, 5 से 7 तक केस दर्ज
नूंह जिले के गांव टपकन, घासेड़ा, चाहलका, घाघस, कंसाली, मलाका, चीला, पंचगांव और मेवली में गोकशी के ठिकानों का भी पता चला है। फिलहाल राजस्थान पुलिस ने हरियाणा पुलिस को पत्र भेजकर गोकशी नेटवर्क के बारे में अलर्ट किया गया है। जिन क्षेत्रों को लेकर खुलासा हुआ है, अधिकतर क्षेत्र नूंह जिले में हैं। पुलिस लगातार इस मामले में नजर बनाए है। नूंह एसपी नरेंद्र बिजारणिया का कहना है कि ज्यादातर गोतस्कर अलवर और डीग क्षेत्र से जुड़े हैं। जंगलों में बीफ मंडी के अन्य ठिकानों की तलाश में ड्रोन उड़ाकर चेक किया गया।
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कुछ शातिर अंतरराज्यीय हैं गोतस्कर
किशनगढ़ बास थाना पुलिस के मुताबिक आरोपियों के विरुद्ध 1999 से 2023 तक अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज हैं। इनमें कुछ शातिर अंतरराज्यीय गोतस्कर हैं। एक गोतस्करी का आरोपी मोरू 1999 से गोतस्करी कर रहा है। उस पर किशनगढ़बास थाने में ही 7 केस दर्ज हैं। जब कभी गिरफ्तारी हुई तो कोर्ट से छूटने पर फिर गोकशी और तस्करी में जुट गया। पूरा नेटवर्क चलता रहा। तीन से चार आरोपी ऐसे हैं जिन पर 4 से 5 मुकदमे दर्ज हैं। 13 आरोपी पकड़े गए थे, आठ आरोपियों पर कई मामले दर्ज हैं।
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नूंह में भी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज
हरियाणा के गांव आलीमेव (पलवल) निवासी हामिद खां गोतस्करों को पुलिस से छुड़वाता था। बताया जा रहा है कि उसके मेवात जिले के पुलिस थानों में अधिकारियों से अच्छे संपर्क हैं। वह तिजारा के जेरोली गांव में रहता है। मिलीभगत के कारण ही कभी गोकशी पर लगाम नहीं लग पाई अगर इस पूरे मामले की जांच ढंग से हुई तो नूंह में भी अधिकारियों और पुलिस कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है क्योंकि जिन क्षेत्रों का नाम सामने आया है, अधिकतर क्षेत्र नूंह के हैं। क्षेत्र पर पड़ने वाली थाना और चौकियों के पुलिस कर्मचारियों को इस पूरे नेटवर्क की जानकारी थी मगर कभी भी सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
गोतस्करों पर हमेशा अधिकारी रहे मेहरबान
किशनगढ़बास स्थित बिरसंगपुर के ग्रामीणों ने बताया कि 2016-17 में एक पंचायत करके गोकशी व तस्करी करने वालों पर 52 हजार रुपये का जुर्माना तय किया था। एक आरोपी से यह वसूली भी की गई। इसके बाद पुलिस और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त आरोपियों ने जुर्माना भरने से इन्कार कर दिया। ऐसे में गोतस्करों के हौसले बुलंद होते गए और उन्होंने अपना कार्य जारी रखा।
मास्टरमाइंड पुलिस की गिरफ्तार से हैं बाहर
इस मामले में अभी तक 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, मगर मास्टरमाइंड इकबाल व वारिश अभी तक पुलिस की गिरफ्तार से बाहर हैं। अभी तक तहसीलदार और थाना प्रभारी सहित 46 कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। फिलहाल घटनास्थल पर अब एक चौकी स्थापित कर दी गई है। तिजारा के विधायक बाबा बालक नाथ खुद इस पूरे मामले की माॅनिटरिंग कर रहे हैं।
प्रतिक्रिया
पकड़े गए आरोपियों से खुलासा हुआ है कि वह लंबे समय से गो-तस्करी कर रहे थे। आरोपियों पर 5 से 7 मुकदमे दर्ज हैं। मामले में गहनता से जांच जारी है। -राजीव, थानाधिकारी, किशनगढ़बास (राजस्थान)
रेवाड़ी पुलिस हमेशा अलर्ट रहती है। जिले में गोमांस बेचे जाने को लेकर कोई मामला सामने नहीं आया है। -संजीव बल्हारा, डीएसपी, रेवाड़ी।