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Rewari News: अब महाविद्यालयों में भी होगी अभिभावक-शिक्षक बैठक
Wed, 28 May 2025 12:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 28 May 2025 12:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। उच्चतर शिक्षा विभाग ने अब जिले के महाविद्यालयों में भी अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) करने का आदेश जारी किया है। कॉलेजों में प्रोफेसर अभिभावकों से विद्यार्थियों की प्रगति पर चर्चा करेंगे।
वहीं महाविद्यालय में अभिभावकों और विद्यार्थियों की सेमिनार होगी जिसमें विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न शैक्षिक पहलुओं पर मंथन किया जाएगा। अभी तक केवल स्कूलों में अभिभावकों व शिक्षकों की बैठक होती थी, लेकिन अब कॉलेजों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
स्कूलों से कॉलेज कई मामलों में भिन्न हैं। कॉलेज में आने के बाद विद्यार्थी के विचार परिपक्व हो जाते हैं और मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और संवेगात्मक विकास भी कुछ हद तक हो जाता है। साथ ही तर्क एवं चिंतन शक्ति भी बढ़ जाती है।
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ऐसे में विद्यार्थी को औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों ही प्रकार की शिक्षा जरूरी होती है। इसलिए उनके बीच समय-समय पर समस्याओं पर विचार विमर्श होना जरूरी होता है।
60 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य
कॉलेजों में विद्यार्थियों की औसतन उपस्थिति 60 प्रतिशत रहती है जोकि चिंता का विषय है। इसके कारण भी विद्यार्थियों के अभिभावकों से संवाद जरूरी हो गया है। बदलते परिवेश में अभिभावकों की सोच भी बदल रही है। अभिभावकों को यह लगता है कि बच्चे का दाखिले लेने के बाद उसे कॉलेज न भेज कर किसी कोचिंग संस्थान भेजें, ताकि बच्चा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सके। इन सभी बिंदुओं को देखते हुए उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं कि वे कॉलेजों में विद्यार्थियों की समस्याओं पर चिंतन करें।
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वर्जन:
कॉलेज में सेमिनार से विद्यार्थियों की समस्याओं पर चिंतन किया जाएगा। इसमें अभिभावकों की भी उपस्थिति अनिवार्य होगी। इससे काफी फायदा होगा। - डॉ. विवेक कुमार, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कोसली
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रेवाड़ी। उच्चतर शिक्षा विभाग ने अब जिले के महाविद्यालयों में भी अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) करने का आदेश जारी किया है। कॉलेजों में प्रोफेसर अभिभावकों से विद्यार्थियों की प्रगति पर चर्चा करेंगे।
वहीं महाविद्यालय में अभिभावकों और विद्यार्थियों की सेमिनार होगी जिसमें विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न शैक्षिक पहलुओं पर मंथन किया जाएगा। अभी तक केवल स्कूलों में अभिभावकों व शिक्षकों की बैठक होती थी, लेकिन अब कॉलेजों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
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स्कूलों से कॉलेज कई मामलों में भिन्न हैं। कॉलेज में आने के बाद विद्यार्थी के विचार परिपक्व हो जाते हैं और मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और संवेगात्मक विकास भी कुछ हद तक हो जाता है। साथ ही तर्क एवं चिंतन शक्ति भी बढ़ जाती है।
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ऐसे में विद्यार्थी को औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों ही प्रकार की शिक्षा जरूरी होती है। इसलिए उनके बीच समय-समय पर समस्याओं पर विचार विमर्श होना जरूरी होता है।
60 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य
कॉलेजों में विद्यार्थियों की औसतन उपस्थिति 60 प्रतिशत रहती है जोकि चिंता का विषय है। इसके कारण भी विद्यार्थियों के अभिभावकों से संवाद जरूरी हो गया है। बदलते परिवेश में अभिभावकों की सोच भी बदल रही है। अभिभावकों को यह लगता है कि बच्चे का दाखिले लेने के बाद उसे कॉलेज न भेज कर किसी कोचिंग संस्थान भेजें, ताकि बच्चा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सके। इन सभी बिंदुओं को देखते हुए उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं कि वे कॉलेजों में विद्यार्थियों की समस्याओं पर चिंतन करें।
वर्जन:
कॉलेज में सेमिनार से विद्यार्थियों की समस्याओं पर चिंतन किया जाएगा। इसमें अभिभावकों की भी उपस्थिति अनिवार्य होगी। इससे काफी फायदा होगा। - डॉ. विवेक कुमार, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कोसली