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Rewari News: अब टीबी के हाई रिस्क एरिया पर होगा फोकस
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रेवाड़ी। जिले को टीबी मुक्त बनाने के प्रयासों को तेज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 6 नई टू-नॉट मशीनें अलॉट की जाएंगी। इन मशीनों से ग्रामीण और हाई रिस्क वाले क्षेत्रों में टीबी की जांच अब और आसान हो जाएगी। नए उपकरणों के आने से मरीजों को कंफर्म जांच के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और सीएचसी व पीएचसी स्तर पर ही जांच की सुविधा उपलब्ध होगी।
फिलहाल जिले में सीबीनॉट जांच केवल जिला सिविल अस्पताल और एसडीएच कोसली तक सीमित थी जिससे ग्रामीण मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। जनवरी से मार्च 2026 तक जिले में कुल 664 टीबी मामले सामने आए जिनमें 394 निजी अस्पतालों और 270 सरकारी केंद्रों से दर्ज हुए।
इनमें 381 पुरुष, 283 महिलाएं और 14 वर्ष से कम उम्र के 30 बच्चे शामिल हैं। नई टू-नॉट मशीनें अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं और कम समय में सटीक रिपोर्ट देने में सक्षम हैं।
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जिले के प्रत्येक उप-केंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिरम पर प्रारंभिक स्क्रीनिंग जारी है। पीएचसी स्तर पर न केवल स्क्रीनिंग हो रही है बल्कि मरीजों के बलगम के सैंपल भी लिए जा रहे हैं। सैंपल को डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर (डीएमसी) भेजा जाता है जहां एएफबी माइक्रोस्कोपिक जांच होती है। कोसली और रेवाड़ी में एडवांस सीबीनॉट तकनीक से जांच की सुविधा मौजूद है।
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हाई रिस्क क्षेत्रों को प्राथमिकता
स्वास्थ्य विभाग ने हाई रिस्क क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। सबसे पहले सीएचसी और हाई लोड पीएचसी में मशीनें लगाई जाएंगी जबकि टीबी मुक्त घोषित गांवों में फिलहाल नई मशीनें नहीं भेजी जाएंगी। बावल ब्लॉक में विशेष स्क्रीनिंग कैंप चलाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। जिला क्षय रोग नोडल अधिकारी डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि इस पहल से न केवल टीबी जांच की गति बढ़ेगी बल्कि समय पर इलाज मिलने से संक्रमण पर भी नियंत्रण संभव होगा। यह कदम जिले को टीबी मुक्त करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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फिलहाल जिले में सीबीनॉट जांच केवल जिला सिविल अस्पताल और एसडीएच कोसली तक सीमित थी जिससे ग्रामीण मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। जनवरी से मार्च 2026 तक जिले में कुल 664 टीबी मामले सामने आए जिनमें 394 निजी अस्पतालों और 270 सरकारी केंद्रों से दर्ज हुए।
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इनमें 381 पुरुष, 283 महिलाएं और 14 वर्ष से कम उम्र के 30 बच्चे शामिल हैं। नई टू-नॉट मशीनें अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं और कम समय में सटीक रिपोर्ट देने में सक्षम हैं।
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जिले के प्रत्येक उप-केंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिरम पर प्रारंभिक स्क्रीनिंग जारी है। पीएचसी स्तर पर न केवल स्क्रीनिंग हो रही है बल्कि मरीजों के बलगम के सैंपल भी लिए जा रहे हैं। सैंपल को डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर (डीएमसी) भेजा जाता है जहां एएफबी माइक्रोस्कोपिक जांच होती है। कोसली और रेवाड़ी में एडवांस सीबीनॉट तकनीक से जांच की सुविधा मौजूद है।
हाई रिस्क क्षेत्रों को प्राथमिकता
स्वास्थ्य विभाग ने हाई रिस्क क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। सबसे पहले सीएचसी और हाई लोड पीएचसी में मशीनें लगाई जाएंगी जबकि टीबी मुक्त घोषित गांवों में फिलहाल नई मशीनें नहीं भेजी जाएंगी। बावल ब्लॉक में विशेष स्क्रीनिंग कैंप चलाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। जिला क्षय रोग नोडल अधिकारी डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि इस पहल से न केवल टीबी जांच की गति बढ़ेगी बल्कि समय पर इलाज मिलने से संक्रमण पर भी नियंत्रण संभव होगा। यह कदम जिले को टीबी मुक्त करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।