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शहर की 457 किमी लंबी सीवर लाइन की सफाई नहीं, लोगों का घरों से निकलना मुश्किल
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भाड़ावास गेट के पास भरा बारिश का पानी।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। बारिश से पहले 457 किमी लंबी सीवर लाइन की सफाई नहीं होने से वर्षा व सीवर का पानी शहर की गलियों में भर गया है। इसके चलते लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। शहर के सेक्टरों से लेकर कॉलोनी की गलियों में एक जैसे हालात हैं। सोमवार सुबह पांच बचे से सात बजे तक दो घंटे में 51 एमएम की बारिश से हालात और ज्यादा बदतर हो गए हैैं।
बता दें कि जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से फरवरी- मार्च में शहर में सीवर लाइन की सफाई की जानी थी। लेकिन इस बार सीवर सफाई का टेंडर तक ही नहीं हो पाया है। जलभराव की शिकायत वार्ड-23 के कंपनी बाग, इंद्र कॉलोनी, दुर्गा कॉलोनी व मॉडल टाऊन सहित 15 कॉलोनियों सबसे ज्यादा रहती है। आमतौर पर बारिश से पहले सीवर की सफाई के लिए फरवरी में ही करीब 20 लाख रुपये का टेंडर दिया जाता है। फरवरी से मार्च तक यह कार्य पूरा कर लिया जाता है।
अम्रुत योजना के तहत 66 करोड़ रुपये मिले, समाधान नहीं
शहर में सीवर व पानी की समस्या के समाधान के लिए अम्रुत योजना के तहत रेवाड़ी शहर को करीब 66 लाख रुपये की राशि मिली थी। 31 मार्च को योजना की समयसीमा खत्म हो चुकी है। हालांकि इसको आगे बढ़ाने को लेकर भी बात चल रही है। लेकिन सवाल है कि महज सीवर लाइन के लिए 33 करोड़ मिलने के बाद भी शहर में सीवर ओवरफ्लो की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया है। पुराने शहर में करीब 50 साल पुरानी सीवर लाइन है। अम्रुत योजना के तहत 4 व 6 ईंच की सीवर लाइन को आठ इंच में तब्दील करने के लिए राशि दी गई। लेकिन शहर के अंदर कुछ प्वाइंट पर काम नहीं हो पाया। इसके चलते जल निकासी ठीक से नहीं हो पाती है।
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जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों के चलते सीवर छंटाई में देरी हुई थी। इसके बाद सफाई कराई गई है। कुछ निचले क्षेत्रों में पानी निकालने के लिए मोटर लगाई गई हैं। यदि कहीं पर ज्यादा समस्या है तो लोग शिकायत कर सकते हैं। समाधान किया जाएगा।
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बता दें कि जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से फरवरी- मार्च में शहर में सीवर लाइन की सफाई की जानी थी। लेकिन इस बार सीवर सफाई का टेंडर तक ही नहीं हो पाया है। जलभराव की शिकायत वार्ड-23 के कंपनी बाग, इंद्र कॉलोनी, दुर्गा कॉलोनी व मॉडल टाऊन सहित 15 कॉलोनियों सबसे ज्यादा रहती है। आमतौर पर बारिश से पहले सीवर की सफाई के लिए फरवरी में ही करीब 20 लाख रुपये का टेंडर दिया जाता है। फरवरी से मार्च तक यह कार्य पूरा कर लिया जाता है।
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अम्रुत योजना के तहत 66 करोड़ रुपये मिले, समाधान नहीं
शहर में सीवर व पानी की समस्या के समाधान के लिए अम्रुत योजना के तहत रेवाड़ी शहर को करीब 66 लाख रुपये की राशि मिली थी। 31 मार्च को योजना की समयसीमा खत्म हो चुकी है। हालांकि इसको आगे बढ़ाने को लेकर भी बात चल रही है। लेकिन सवाल है कि महज सीवर लाइन के लिए 33 करोड़ मिलने के बाद भी शहर में सीवर ओवरफ्लो की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया है। पुराने शहर में करीब 50 साल पुरानी सीवर लाइन है। अम्रुत योजना के तहत 4 व 6 ईंच की सीवर लाइन को आठ इंच में तब्दील करने के लिए राशि दी गई। लेकिन शहर के अंदर कुछ प्वाइंट पर काम नहीं हो पाया। इसके चलते जल निकासी ठीक से नहीं हो पाती है।
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जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों के चलते सीवर छंटाई में देरी हुई थी। इसके बाद सफाई कराई गई है। कुछ निचले क्षेत्रों में पानी निकालने के लिए मोटर लगाई गई हैं। यदि कहीं पर ज्यादा समस्या है तो लोग शिकायत कर सकते हैं। समाधान किया जाएगा।