Haryana: साहबी नदी को नजफगढ़ ड्रेन बनाए जाने पर एनजीटी सख्त, केंद्र, हरियाणा और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
एनजीटी ने कहा कि अब यह मामला केवल फाइलों में अटका हुआ औपचारिक विवाद नहीं रह सकता। केंद्र, दिल्ली और हरियाणा सरकार को स्पष्ट करना होगा कि साहबी नदी के पुनरुद्धार की कार्ययोजना क्या है?
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कभी जीवनदायिनी और स्वच्छ जलधारा के रूप में जानी जाने वाली साहबी नदी आज नजफगढ़ ड्रेन के नाम से जानी जाती है। इस नदी की पारिस्थितिक और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करने की मांग पर दाखिल याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सख्त रूख अपनाते हुए केंद्र, दिल्ली और हरियाणा सरकारों से विस्तृत जवाब मांगा है।
यह मामला खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव बनाम राज्य हरियाणा एवं अन्य से संबंधित है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी (न्यायिक सदस्य) और डॉ. अफरोज अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ के समक्ष हुई। एनजीटी ने कहा कि साहबी नदी का नाम नजफगढ़ ड्रेन रख देना केवल एक प्रशासनिक परिवर्तन नहीं, बल्कि यह एक पारिस्थितिकीय और सांस्कृतिक विनाश का उदाहरण है।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह केवल प्रदूषण का मामला नहीं, बल्कि नदी की पहचान का संकट है। जब कोई नदी नाले में तब्दील हो जाती है तो यह पर्यावरण नहीं, पूरी सभ्यता के लिए खतरे की घंटी है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा कि नदियों का प्रबंधन राज्य सरकारों का विषय है।
मंत्रालय ने नजफगढ़ झील और वेटलैंड संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों का उल्लेख किया, लेकिन साहबी नदी के पुनरुद्धार और नाम पुनर्स्थापन पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया। इस पर एनजीटी ने कहा कि जब मामला राष्ट्रीय जल निकाय और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़ा है, तो केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। पीठ ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें जिसमें नदी, ड्रेन की वर्तमान स्थिति, पुनरुद्धार पर कार्य कर रहे विभाग और नाम पुनर्स्थापन की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी हो। हरियाणा सरकार और उसके विभाग हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को भी इसी अवधि में जवाब देना होगा।
अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित की
एनजीटी ने कहा कि अब यह मामला केवल फाइलों में अटका हुआ औपचारिक विवाद नहीं रह सकता। केंद्र, दिल्ली और हरियाणा सरकार को स्पष्ट करना होगा कि साहबी नदी के पुनरुद्धार की कार्ययोजना क्या है? नजफगढ़ झील और नदी के बीच जल प्रवाह की वास्तविक स्थिति क्या है? क्या केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय महत्व की नदी घोषित करेगी? अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित की गई है, जिसमें सभी संबंधित विभागों को प्रमाणिक और विस्तृत जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
एचएसवीपी की रिपोर्ट पर उठे सवाल
एचएसवीपी ने दावा किया कि धारूहेड़ा में स्थित उनके 5 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। लेकिन याचिकाकर्ता प्रकाश यादव ने बताया कि इन प्लांट्स का सीटीओ 1 अक्तूबर 2023 से समाप्त हो चुका है, फिर भी इन्हें संचालित किया जा रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्टों में कई जरूरी पैरामीटर्स शामिल नहीं हैं और परीक्षण मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से नहीं कराया गया। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि जब संचालन की अनुमति ही समाप्त हो चुकी है, तो रिपोर्टों को वैध कैसे माना जा सकता है। यह केवल कागजी खानापूर्ति है।
पर्यावरणविदों का मत-पहले नदी को उसका जीवन लौटाओ
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि साहबी नदी को फिर नदी बनाना केवल नाम बदलने की बात नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिस्थितिक पुनर्जागरण का प्रयास है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रदूषण स्रोतों की पहचान कर तत्काल रोका जाए, सभी एसटीपी को वैध अनुमति के साथ संचालित किया जाए। नदी तटों पर पौधरोपण और जल संचयन कार्य हो तथा स्थानीय समुदायों को पुनर्जीवन अभियान से जोड़ा जाए।
रेवाड़ी के मसानी बैराज से निकलती है साहबी नदी
साहबी नदी रेवाड़ी के मसानी बैराज से निकलकर दिल्ली के नजफगढ़ झील क्षेत्र में पहुंचती है। पहले यह नदी प्राकृतिक रूप से यमुना से जुड़ी थी, लेकिन समय के साथ इसमें औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज का प्रवाह शुरू हो गया। आज स्थिति यह है कि हरियाणा के कई एसटीपी और औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी सीधे इस नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे यह भूजल और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा बन गई है।