{"_id":"6999f55fe2becbd6fd0e3c79","slug":"ngt-questions-hspcbs-role-seeks-report-in-four-weeks-rewari-news-c-198-1-rew1001-233931-2026-02-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: एनजीटी ने एचएसपीसीबी की भूमिका पर उठाए सवाल, चार सप्ताह में मांगी रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: एनजीटी ने एचएसपीसीबी की भूमिका पर उठाए सवाल, चार सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
Sat, 21 Feb 2026 11:41 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 21 Feb 2026 11:41 PM IST
विज्ञापन
एनजीटी के आदेशों के बावजूद गांव खरखड़ा में भारी मात्रा में पड़ा कूड़े का ढेर। संवाद
रेवाड़ी। हरियाणा में अवैध कचरा डंपिंग और ठोस कचरा प्रबंधन की विफल व्यवस्था के खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। अवैध कचरा डंपिंग के एक मामले में एनजीटी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अधिकरण ने संबंधित विभागों को चार सप्ताह में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की प्रधान पीठ में शामिल जस्टिस अरुण कुमार त्यागी व ज्यूडिशियल मेंबर अफरोज अहमद ने राज्य सरकार, नगर निकायों, ग्राम पंचायतों और संबंधित विभागों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण कानूनों का पालन केवल कागजों तक सीमित नहीं रह सकता। इसे जमीन पर लागू करना अनिवार्य है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित विभागों ने रिपोर्ट प्रस्तुत की।
विज्ञापन
रिपोर्ट में यह स्वीकार किया कि कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है लेकिन प्रभावी और स्थायी समाधान लागू नहीं हो पाया है। इस पर अधिकरण ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि औपचारिकताओं से काम नहीं चलेगा बल्कि जवाबदेही तय होगी।
एनजीटी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि बोर्ड एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है और उसका दायित्व है कि वह पर्यावरण नियमों को सख्ती से लागू कराए।
यदि बोर्ड या अन्य अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ पर्यावरण क्षतिपूर्ति और अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकरण ने सभी संबंधित विभागों को अंतिम अवसर देते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। चेतावनी दी है कि आदेशों की अनदेखी करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
--
लंबे समय से प्रभावी निगरानी का दिखा अभाव
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार अवैध कचरा डंपिंग के मामलों में 7705 चालान किए गए और 63.19 लाख का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया। इसमें से अधिकांश राशि की वसूली भी हो चुकी है। विभिन्न निकायों और विभागों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह दर्शाता है कि समस्या व्यापक स्तर पर फैली हुई है और लंबे समय से प्रभावी निगरानी का अभाव है।
-
धारूहेड़ा से शुरू हुआ था मामला, अब राज्यस्तरीय हुआ
गांव खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव की इस याचिका ने एक स्थानीय मुद्दे को प्रदेश स्तरीय पर्यावरणीय बहस में बदल दिया है। यह आदेश अब केवल धारूहेड़ा तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे हरियाणा की ग्राम पंचायतों, नगर निकायों और सरकारी विभागों की जवाबदेही तय करने वाला निर्णय बन गया है। मामला धारूहेड़ा स्थित खेल स्टेडियम के सामने अवैध रूप से कचरा डालने से शुरू हुआ था लेकिन सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि समस्या केवल एक स्थान की नहीं बल्कि पूरे हरियाणा की है। सड़कों, नालों, ग्राम पंचायत भूमि, तालाबों, नहरों और अन्य सरकारी जमीनों पर खुलेआम कचरा डाला जा रहा है। अधिकरण ने इसे पर्यावरण संरक्षण कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह नागरिकों के स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में जीने के मौलिक अधिकार का हनन है।
विज्ञापन
गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की प्रधान पीठ में शामिल जस्टिस अरुण कुमार त्यागी व ज्यूडिशियल मेंबर अफरोज अहमद ने राज्य सरकार, नगर निकायों, ग्राम पंचायतों और संबंधित विभागों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
विज्ञापन
अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण कानूनों का पालन केवल कागजों तक सीमित नहीं रह सकता। इसे जमीन पर लागू करना अनिवार्य है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित विभागों ने रिपोर्ट प्रस्तुत की।
विज्ञापन
रिपोर्ट में यह स्वीकार किया कि कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है लेकिन प्रभावी और स्थायी समाधान लागू नहीं हो पाया है। इस पर अधिकरण ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि औपचारिकताओं से काम नहीं चलेगा बल्कि जवाबदेही तय होगी।
एनजीटी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि बोर्ड एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है और उसका दायित्व है कि वह पर्यावरण नियमों को सख्ती से लागू कराए।
यदि बोर्ड या अन्य अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ पर्यावरण क्षतिपूर्ति और अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकरण ने सभी संबंधित विभागों को अंतिम अवसर देते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। चेतावनी दी है कि आदेशों की अनदेखी करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लंबे समय से प्रभावी निगरानी का दिखा अभाव
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार अवैध कचरा डंपिंग के मामलों में 7705 चालान किए गए और 63.19 लाख का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया। इसमें से अधिकांश राशि की वसूली भी हो चुकी है। विभिन्न निकायों और विभागों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह दर्शाता है कि समस्या व्यापक स्तर पर फैली हुई है और लंबे समय से प्रभावी निगरानी का अभाव है।
-
धारूहेड़ा से शुरू हुआ था मामला, अब राज्यस्तरीय हुआ
गांव खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव की इस याचिका ने एक स्थानीय मुद्दे को प्रदेश स्तरीय पर्यावरणीय बहस में बदल दिया है। यह आदेश अब केवल धारूहेड़ा तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे हरियाणा की ग्राम पंचायतों, नगर निकायों और सरकारी विभागों की जवाबदेही तय करने वाला निर्णय बन गया है। मामला धारूहेड़ा स्थित खेल स्टेडियम के सामने अवैध रूप से कचरा डालने से शुरू हुआ था लेकिन सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि समस्या केवल एक स्थान की नहीं बल्कि पूरे हरियाणा की है। सड़कों, नालों, ग्राम पंचायत भूमि, तालाबों, नहरों और अन्य सरकारी जमीनों पर खुलेआम कचरा डाला जा रहा है। अधिकरण ने इसे पर्यावरण संरक्षण कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह नागरिकों के स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में जीने के मौलिक अधिकार का हनन है।