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Rewari News: शौर्य दिवस के रूप में मनाया नव वर्ष
Tue, 02 Jan 2024 10:02 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 02 Jan 2024 10:02 PM IST
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रेवाड़ी। सेवा स्तंभ एवं धम्म भूमि श्रेष्ठ जीवन के लिए एक आंदोलन की ओर से डॉ. बीआर आंबेडकर पार्क एवं लाइब्रेरी में जिला प्रधान भगत सिंह सांभरिया की अध्यक्षता में 1 जनवरी को शौर्य दिवस के रूप में मनाया गया।
जिला प्रधान ने बताया कि इसी दिन आज से लगभग 200 साल पहले 1 जनवरी 1818 को भीमा नदी के तट पर बसे गांव भीमा-कोरे गांव (पुणे, महाराष्ट्र राज्य) में महार और पेशवाओं के बीच संग्राम हुआ था। इस युद्ध में महज 500 महार योद्धाओं ने 28000 पेशवाओं को धूल चटा दी। जिस कौम को उस समय पेशवा कामगार मात्र समझते थे, जिन्हें सेना में भर्ती तक न किया जाता था, उस कौम ने अपने सामर्थ्य का लौहा पूरे विश्व के सामने मनवाया और उन्हीं पेशवाओं को धूल चटाई। ऐसा पराक्रम न कभी हुआ है और न ही होगा, जिसमें मात्र 500 महार योद्धाओं ने 28000 पेशवाओं की विशाल सेना को मात दी हो। इसी युद्ध की याद में यहां भीमा नदी के तट पर विजय-स्तंभ स्थापित किया गया है, जिस पर इस युद्ध में शहीद हुए वीरों के नाम अंकित हैं। इसी पराक्रम को याद करते हुए, बहुजन इस दिन को शौर्य दिवस के रूप में खुशी से मनाते हैं। बाबा साहेब इस दिन प्रत्येक वर्ष विजय स्तंभ पर इन शहीदों को नमन करने यहां आते थे। तभी से लाखों की संंख्या में भीम सैनिक यहां उन 500 बहादुर सिपाहियों की याद में 1 जनवरी को एकत्र होते हैं। इस कार्यक्रम में जिला प्रधान भगत सिंह सांभरिया, आरपी सिंह दहिया, धनपत सिंह गिरदावर, गजराज सिंह भुड़पुर, होशियार सिंह अहरोदिया, रामनिवास गोठवाल, नरेंद्र मेहरा, उमाशंकर सभरवाल, अनिल भाटिया, मैडम लक्ष्मीबाई लिसाना, बीरेंद्र सिंह डहीनवाल, राजेश थिरान सुलखा, घनश्याम आदि सहयोगी साथी उपस्थित रहे।
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जिला प्रधान ने बताया कि इसी दिन आज से लगभग 200 साल पहले 1 जनवरी 1818 को भीमा नदी के तट पर बसे गांव भीमा-कोरे गांव (पुणे, महाराष्ट्र राज्य) में महार और पेशवाओं के बीच संग्राम हुआ था। इस युद्ध में महज 500 महार योद्धाओं ने 28000 पेशवाओं को धूल चटा दी। जिस कौम को उस समय पेशवा कामगार मात्र समझते थे, जिन्हें सेना में भर्ती तक न किया जाता था, उस कौम ने अपने सामर्थ्य का लौहा पूरे विश्व के सामने मनवाया और उन्हीं पेशवाओं को धूल चटाई। ऐसा पराक्रम न कभी हुआ है और न ही होगा, जिसमें मात्र 500 महार योद्धाओं ने 28000 पेशवाओं की विशाल सेना को मात दी हो। इसी युद्ध की याद में यहां भीमा नदी के तट पर विजय-स्तंभ स्थापित किया गया है, जिस पर इस युद्ध में शहीद हुए वीरों के नाम अंकित हैं। इसी पराक्रम को याद करते हुए, बहुजन इस दिन को शौर्य दिवस के रूप में खुशी से मनाते हैं। बाबा साहेब इस दिन प्रत्येक वर्ष विजय स्तंभ पर इन शहीदों को नमन करने यहां आते थे। तभी से लाखों की संंख्या में भीम सैनिक यहां उन 500 बहादुर सिपाहियों की याद में 1 जनवरी को एकत्र होते हैं। इस कार्यक्रम में जिला प्रधान भगत सिंह सांभरिया, आरपी सिंह दहिया, धनपत सिंह गिरदावर, गजराज सिंह भुड़पुर, होशियार सिंह अहरोदिया, रामनिवास गोठवाल, नरेंद्र मेहरा, उमाशंकर सभरवाल, अनिल भाटिया, मैडम लक्ष्मीबाई लिसाना, बीरेंद्र सिंह डहीनवाल, राजेश थिरान सुलखा, घनश्याम आदि सहयोगी साथी उपस्थित रहे।
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