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1946 में ही नेताजी ने कह दिया था बेटियों को पढ़ाओ
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
Updated Sat, 16 Jan 2016 12:03 AM IST
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जिले के गांव जीतपुरा में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चार साल तक गनमैन रहे 101 साल के स्वतंत्रता सेनानी चंद्रभान के चेहरे पर भले ही बेशुमार झुर्रियां हों आंखों की रोशनी और सुनने की क्षमता कम हो गई हो , लेकिन देशप्रेम का जज्बा आज भी बरकरार है।
चंद्रभान बताते हैं कि आज भले ही राज्य में बेटियों को बचाने और पढ़ाने की बात होती हो लेकिन सन 1943 में नेताजी ने अपने सभी साथियों से कहा था कि लड़कियों की पढ़ाई बेहद जरूरी है।
सिंगापुर जेल में मिली थीं कई यातनाएं
1940 में अंग्रेजों के जमाने में भर्ती हुए चंद्रभान बताते हैं कि वे जून के महीने में आजाद हिंद फौज में शामिल हुए, इसके बाद वे नेताजी सुभाष से मिले और उनकी सेना का हिस्सा बन गए। इस दौरान वे जापान और सिंगापुर की जेल में भी बंद हुए, जहां उनके और अन्य युद्ध बंदियों के पेट तक पाइप से पानी भर दिया जाता। यही नहीं खाने के लिए महज नमक के साथ एक से डेढ़ रोटी। कभी-कभार 150 ग्राम चावल और एक पाउंट सब्जी मिलती थी।
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विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत फैलाई अफवाह
चंद्रभान बताते हैं कि दुनिया भले ही मानती है कि नेताजी की मौत विमान दुर्घटना में हुई है, लेकिन उन्हें आज भी यह बात झूठ और फैलाई हुई अफवाह दिखती है। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी से ताम्रपत्र हासिल करने वाले 101 साल के युवा चंद्रभान नेता जी सुभाष चंद्र बोस के बारे में कहते हैं कि नेताजी सिर्फ किसी भी कीमत पर देश की आजादी चाहते थे, उन्हें आजादी के बाद किसी राजनैतिक पद की लालसा भी नहीं थी।
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पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा लेने को तैयार
बंटवारे के लिए मोहम्मद अली जिन्ना को दोषी बताते हुए चंद्रभान कहते हैं कि आज पाकिस्तान आए दिन हमला कर देता है। हमें ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा। यही नहीं इतनी उम्र में भी अपने बल पर चल-फिरकर खुद काम करने वाले स्वतंत्रता सेनानी कहते हैं कि उम्र भले ही हो गई, लेकिन पाकिस्तान से युद्ध के लिए वह खुद बार्डर पर जाकर मोर्चा लेने के लिए तैयार हैं।
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चंद्रभान बताते हैं कि आज भले ही राज्य में बेटियों को बचाने और पढ़ाने की बात होती हो लेकिन सन 1943 में नेताजी ने अपने सभी साथियों से कहा था कि लड़कियों की पढ़ाई बेहद जरूरी है।
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सिंगापुर जेल में मिली थीं कई यातनाएं
1940 में अंग्रेजों के जमाने में भर्ती हुए चंद्रभान बताते हैं कि वे जून के महीने में आजाद हिंद फौज में शामिल हुए, इसके बाद वे नेताजी सुभाष से मिले और उनकी सेना का हिस्सा बन गए। इस दौरान वे जापान और सिंगापुर की जेल में भी बंद हुए, जहां उनके और अन्य युद्ध बंदियों के पेट तक पाइप से पानी भर दिया जाता। यही नहीं खाने के लिए महज नमक के साथ एक से डेढ़ रोटी। कभी-कभार 150 ग्राम चावल और एक पाउंट सब्जी मिलती थी।
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विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत फैलाई अफवाह
चंद्रभान बताते हैं कि दुनिया भले ही मानती है कि नेताजी की मौत विमान दुर्घटना में हुई है, लेकिन उन्हें आज भी यह बात झूठ और फैलाई हुई अफवाह दिखती है। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी से ताम्रपत्र हासिल करने वाले 101 साल के युवा चंद्रभान नेता जी सुभाष चंद्र बोस के बारे में कहते हैं कि नेताजी सिर्फ किसी भी कीमत पर देश की आजादी चाहते थे, उन्हें आजादी के बाद किसी राजनैतिक पद की लालसा भी नहीं थी।
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पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा लेने को तैयार
बंटवारे के लिए मोहम्मद अली जिन्ना को दोषी बताते हुए चंद्रभान कहते हैं कि आज पाकिस्तान आए दिन हमला कर देता है। हमें ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा। यही नहीं इतनी उम्र में भी अपने बल पर चल-फिरकर खुद काम करने वाले स्वतंत्रता सेनानी कहते हैं कि उम्र भले ही हो गई, लेकिन पाकिस्तान से युद्ध के लिए वह खुद बार्डर पर जाकर मोर्चा लेने के लिए तैयार हैं।