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वर्ल्ड रिकॉर्ड के आखिरी पड़ाव पर नरेंद्र: अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी विनसन पर पहुंचे, रोचक है कहानी
Fri, 20 Dec 2024 06:34 PM IST
अंकेश ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कोसली
संवाद न्यूज एजेंसी, कोसली
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Fri, 20 Dec 2024 06:34 PM IST
सार
हरियाणा के रेवाड़ी के कोसली के गांव नेहरूगढ़ के नरेंद्र सिंह यादव अपने 7 समिट प्रोजेक्ट के आखिरी पड़ाव को पूरा करने के लिए अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी विनसन मसिफ बेस कैंप पहुंच गए हैं।
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अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी विनसन मसिफ पर पहुंचे नरेंद्र सिंह यादव।
- फोटो : संवाद
विस्तार
अगर दिल में कुछ कर गुजरने का पक्का इरादा हो, तो हौसलों के आगे मुश्किल रास्ते भी आसान हो जाते हैं। ऐसा ही पक्का इरादा लेकर निकले हैं हरियाणा के रेवाड़ी के कोसली के गांव नेहरूगढ़ के नरेंद्र सिंह यादव, जो अपने 7 समिट प्रोजेक्ट के आखिरी पड़ाव को पूरा करने के लिए 20 दिसंबर को विनसन मसिफ बेस कैंप अंटार्कटिका पहुंच गए हैं। 18 दिसंबर को स्पार्क मिंडा के चेयरमैन अशोक मिंडा ने फ्लैग ऑफ कर शुभकामनाएं देकर रवाना किया था। अब भारत और विश्व के पहले युवा पुरुष पर्वतारोही होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम करेंगे।
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नरेंद्र सिंह यादव के इस अभियान में पूरे विश्व से पर्वतारोही शामिल होंगे। अभियान में नरेंद्र भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। अभियान को स्पार्क मिंडा ने स्पॉन्सर किया है। विनसन को शरीर को जमा देने वाला पर्वत भी कहा जाता है। क्योंकि यहां का तापमान हर समय शून्य से लगभग माइनस 50 से 60 डिग्री रहता है। यह पर्वत तकनीकी तौर पर बहुत ही दुर्गम है। अत्याधिक ठंड और तेज बर्फिली हवा से यह पर्वत और खतरनाक बना देते हैं। बहुत कम पर्वतारोही इस पर्वत को चढ़ने में कामयाब हुए हैं क्योंकि इस पर्वत की चढ़ाई बहुत ही खतरनाक और जोखिमों से भरी हुई है।
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अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी है विनसन मसिफ
अंटार्कटिका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी विनसन मसिफ (4892 मीटर) है। विंसन मसिफ अंटार्कटिका में एक बड़ा पर्वतीय मासिफ है, जो 21 किमी (13 मील) लंबा और 13 किमी (8 मील) चौड़ा है और एल्सवर्थ पर्वत की सेंटिनल रेंज में स्थित है। यह अंटार्कटिक प्रायद्वीप के आधार के पास रोने आइस शेल्फ को देखता है। यह मासिफ दक्षिणी ध्रुव से लगभग 1,200 किलोमीटर (750 मील) की दूरी पर स्थित है।
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सात महाद्वीपों पर फतेह करने का है सपना
सेना के जवान कृष्णचंद के बेटे नरेंद्र का सपना सभी सात महाद्वीपों को फतह कर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाना चाहते हैं। नरेंद्र पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर फतह कर कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने 2012 में बेसिक्स ऑफ माउंटेनियरिंग, 2013 में एडवांस, 2015 में एमओआई (मेथड्स ऑफ इंस्ट्रक्शन) और 2022 में सर्च एंड रेस्क्यू समेत सभी प्रमुख पर्वतारोहण पाठ्यक्रम पूरे कर लिए हैं।
सेना के जवान कृष्णचंद के बेटे नरेंद्र का सपना सभी सात महाद्वीपों को फतह कर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाना चाहते हैं। नरेंद्र पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर फतह कर कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने 2012 में बेसिक्स ऑफ माउंटेनियरिंग, 2013 में एडवांस, 2015 में एमओआई (मेथड्स ऑफ इंस्ट्रक्शन) और 2022 में सर्च एंड रेस्क्यू समेत सभी प्रमुख पर्वतारोहण पाठ्यक्रम पूरे कर लिए हैं।
एकॉनकागुआ चोटी को भी कर चुके फतह
नरेंद्र ने 2016 और 2022 दोनों ही बार बिना किसी अनुकूलन के सिर्फ छह दिनों में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। उन्होंने माउंट किलिमंजारो को चार बार, माउंट एल्ब्रस को दो बार ट्रैवर्स के जरिए और माउंट कोसियसको सहित ऑस्ट्रेलिया की दस सबसे ऊंची चोटियों पर तीन बार फतह किया है। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी एकॉनकागुआ और उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी डेनाली पर भी फतह की है।
नरेंद्र ने 2016 और 2022 दोनों ही बार बिना किसी अनुकूलन के सिर्फ छह दिनों में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। उन्होंने माउंट किलिमंजारो को चार बार, माउंट एल्ब्रस को दो बार ट्रैवर्स के जरिए और माउंट कोसियसको सहित ऑस्ट्रेलिया की दस सबसे ऊंची चोटियों पर तीन बार फतह किया है। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी एकॉनकागुआ और उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी डेनाली पर भी फतह की है।
12 वर्ष की उम्रे में शुरू हुई पर्वतारोहण यात्रा
नरेंद्र की पर्वतारोहण यात्रा 12 वर्ष की आयु में उनके स्कूल के दिनों में शुरू हुई, जब उन्होंने जम्मू और कश्मीर की पहाड़ियों पर चढ़ना शुरू किया था। उन्होंने 2008 में नियमित रूप से पर्वतारोहण का अभ्यास करना शुरू किया था। 19 वर्ष की आयु में वे 6,512 मीटर ऊंची भागीरथी-2 और 5,612 मीटर ऊंची डीकेडी-2 पर चढ़ने वाले सबसे कम उम्र के पर्वतारोही बन गए थे। उन्होंने कालिंदी दर्रा, वासुकी ताल दर्रा को भी सफलतापूर्वक पार किया और लेह और गढ़वाल में चोटियों पर चढ़े। नरेंद्र को विभिन्न वैश्विक रिकॉर्ड संस्थानों द्वारा विश्व सम्राट के रूप में सम्मानित किया गया है और उन्होंने पर्वतारोहण में 22 प्रभावशाली विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं।
नरेंद्र की पर्वतारोहण यात्रा 12 वर्ष की आयु में उनके स्कूल के दिनों में शुरू हुई, जब उन्होंने जम्मू और कश्मीर की पहाड़ियों पर चढ़ना शुरू किया था। उन्होंने 2008 में नियमित रूप से पर्वतारोहण का अभ्यास करना शुरू किया था। 19 वर्ष की आयु में वे 6,512 मीटर ऊंची भागीरथी-2 और 5,612 मीटर ऊंची डीकेडी-2 पर चढ़ने वाले सबसे कम उम्र के पर्वतारोही बन गए थे। उन्होंने कालिंदी दर्रा, वासुकी ताल दर्रा को भी सफलतापूर्वक पार किया और लेह और गढ़वाल में चोटियों पर चढ़े। नरेंद्र को विभिन्न वैश्विक रिकॉर्ड संस्थानों द्वारा विश्व सम्राट के रूप में सम्मानित किया गया है और उन्होंने पर्वतारोहण में 22 प्रभावशाली विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं।
सात चोटियों को फतह करने वाले सबसे युवा होंगे नरेंद्र
सात शिखरों को पूरा करने के लिए उनका अंतिम अभियान अंटार्कटिका में विनसन मैसिफ है। इस चढ़ाई को पूरा करके वह सात शिखरों को प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के पुरुष पर्वतारोही बन जाएंगे। वर्तमान में सात शिखरों को पूरा करने का रिकॉर्ड एक पर्वतारोही के पास है, जिसकी उम्र 31 वर्ष, 1 महीने और 25 दिन थी। नरेंद्र का लक्ष्य 30 वर्ष और लगभग 16 दिन की आयु में इस रिकॉर्ड को तोड़ना है और यह अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल करने वाले विश्व के पहले युवा पुरुष पर्वतारोही बनना है।
सात शिखरों को पूरा करने के लिए उनका अंतिम अभियान अंटार्कटिका में विनसन मैसिफ है। इस चढ़ाई को पूरा करके वह सात शिखरों को प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के पुरुष पर्वतारोही बन जाएंगे। वर्तमान में सात शिखरों को पूरा करने का रिकॉर्ड एक पर्वतारोही के पास है, जिसकी उम्र 31 वर्ष, 1 महीने और 25 दिन थी। नरेंद्र का लक्ष्य 30 वर्ष और लगभग 16 दिन की आयु में इस रिकॉर्ड को तोड़ना है और यह अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल करने वाले विश्व के पहले युवा पुरुष पर्वतारोही बनना है।