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दिल्ली-जयपुर हाईवे पर 40 किलोमीटर के अंतराल पर खुले हैं 150 से ज्यादा मौत के कट
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हाईवे पर होटलों व ढाबों की ओर से बनाए गए कट।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। शॉर्टकट अपनाने के चक्कर में दिल्ली-जयुपर हाईवे नंबर 48 पर जयसिंहपुर खेड़ा बैरियर से कापड़ीवास गांव के बीच 40 किलोमीटर के अंतराल में 150 से ज्यादा अवैध कट बना लिए गए हैं। इन कटों पर जब लोग रोड क्रॉस करते हैं तो जान पर खतरा मंडराता रहता है। अवैध रूप से बनाए गए इन मौत के कटों पर पिछले एक माह के दौरान आधा दर्जन व्यक्ति अकाल मौत का शिकार बन चुके हैं, लेकिन नेशनल हाईवे एथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) मामले को लेकर कतई गंभीर नहीं है। पुलिस भी हाईवे तोड़कर फांद रहे दोपहिया वाहन चालकों की तमाशबीन बनी हुई है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से एनएचएआई को इस संबंध में पत्र लिखा है।
अमर उजाला ने वीरवार को जिले के खेड़ा बॉर्डर से कापड़ीवास गांव के बीच हाईवे की पड़ताल की। इस दौरान आंखें खोलने वाला सच सामने आया। करीब 40 किलोमीटर लंबे इस सफर में नेशनल हाईवे पर लोगों अपनी सुविधा के अनुसार मौत के 150 से ज्यादा अवैध शॉर्टकट बना रखे है, लेकिन एनएचएआई ने इस पर गौर करना मुनासिब नहीं समझा है। दिल्ली-जयपुर हाईवे-48 पर कापड़ीवास से लेकर खेड़ा बॉर्डर तक वाहन चालकों की डगर आसान नहीं है। जिले में हाईवे पर बने कटों के चलते हर साल औसतन 250 से ज्यादा लोगों की मौत होती है, जबकि 350 से अधिक लोग घायल होते हैं। वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से प्रत्येक माह सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कटों को खत्म करने और गड्ढों को भरने के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन एनएचएआई के अधिकारी पर ध्यान तक नहीं देते हैं। इसे लेकर डीसी कई बार निर्देश दे चुके हैं।
हाईवे पर जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर से कापड़ीवास गांव तक 150 स्थानों पर नेशनल हाईवे को काटकर अवैध रास्ते बनाए गए हैं। यह रास्ते लंबे समय से चले आ रहे हैं, जो नियमों का उल्लंघन है, लेकिन इस ओर एनएसएआई ने कभी ध्यान ही नहीं दिया। अवैध कटों में बनीपुर चौक, नैचाना कट, सांजरपुर के समीप, ओढ़ी कट, जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर, आसलवास गांव के समीप, काठूवास के समीप, संगवाड़ी के समीप, एनएच 71 के कट के समीप, साहबी पुल, खरखड़ा कट, मालपुरा के समीप व कापड़ीवास सहित बड़ी संख्या में छोटे व बड़े कट शामिल हैं।
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अपनी सुविधा अनुसार बनाते हैं लोग कट
हाईवे पर पेट्रोल पंप, होटल-रेस्टोरेंट व ढाबे खोले गए हैं। इसके चलते सभी लोगों ने अपनी सुविधा के लिए हाईवे पर अवैध कट बना रखे हैं। इसके चलते हाईवे के पास के ग्रामीण और वाहन चालक इन कटों का इस्तेमाल करते हैं। इस दौरान अक्सर हादसे होते हैं। इसको लेकर डीसी ने इसी माह में अधिकारियों के साथ एक बैठक भी की थी। इसमें उन्होंने अवैध कटों को बंद करने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन आज तक एक भी कट बंद नहीं किया गया।
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9 स्थानों को अति दुर्घटना क्षेत्र के रूप में किया गया है चिह्नित
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार जिले में हर साल हादसों से 500 से अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं। इनमें हर वर्ष करीब 300 लोगों की जान जाती है। इसमें 250 से अधिक लोगों की जान अकेले दिल्ली-जयपुर हाईवे (राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या)-48 पर जाते हैं। प्रशासन की तरफ से राजमार्ग पर अलग-अलग 9 स्थानों को अति दुर्घटना क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। इनको समाप्त करने के प्रयास भी हुए पर राजमार्ग का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी की लापरवाही इन पर भारी पड़ रही है। हालात यह है कि जिले की सीमा में राजमार्ग के 40 किमी दूरी में अवैध रूप से बनाए कट, टूटे डिवाइडर, नाले और जानलेवा गड्ढे मौजूद हैं।
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न कोई साइन बोर्ड, बस सीमेंट से बने बैरिकेड से ही बचाव
राजमार्ग प्राधिकरण की एजेंसी और जिला प्रशासन की तरफ से गठित कमेटी की जांच के बाद अति दुर्घटना क्षेत्र में बचाव के लिए सीमेंट के बैरिकेड लगा दिए हैं। फिर भी हादसे होते रहते हैं। इसी वर्ष जनवरी में एक होटल में कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे कोसली के तीन युवक कार सहित नहर में जा गिरे थे। गनीमत रही कि होटल के पास खड़े लोगों ने उन्हें तुरंत ही मौके पर पहुंच कर बाहर निकाला था। इससे पहले इस नहर में 3 बाइक, एक एंबुलेंस, एक निजी बस गिर चुकी है। लापरवाही का आलम यह है कि दुर्घटना के बाद भी प्राधिकरण की ओर से अब तक कोई साइन बोर्ड तक नहीं लगाया है। इनके अलावा राजमार्ग पर ओढ़ी कट, जयसिंह पुर खेड़ा बॉर्डर सहित अन्य स्थानों पर मेन लेन के अवैध कट भी हादसों की वजह बन रहे हैं।
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पिछले चार साल में यहां हुए हादसे
सड़क दुर्घटनाओं में वर्ष 2019 में 371 लोग घायल हुए, 212 की मृत्यु हो गई। वर्ष 2020 में 396 लोग घायल हुए और 215 की मृत्यु हो गई। वर्ष 2021 में अगस्त तक 263 व्यक्ति घायल हुए और 125 की मृत्यु हो चुकी है। इस साल 2022 में नवंबर तक 311 लोग घायल हुए और 200 लोगों की मौत हो चुकी है।
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वर्जन:
मामले में एनएचएआई के अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। जल्द ही हाईवे पर बने अवैध कटों को बंद कराया जाएगा। इसके साथ ही अवैध कट बनाने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
-अशोक गर्ग, डीसी रेवाड़ी।
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अमर उजाला ने वीरवार को जिले के खेड़ा बॉर्डर से कापड़ीवास गांव के बीच हाईवे की पड़ताल की। इस दौरान आंखें खोलने वाला सच सामने आया। करीब 40 किलोमीटर लंबे इस सफर में नेशनल हाईवे पर लोगों अपनी सुविधा के अनुसार मौत के 150 से ज्यादा अवैध शॉर्टकट बना रखे है, लेकिन एनएचएआई ने इस पर गौर करना मुनासिब नहीं समझा है। दिल्ली-जयपुर हाईवे-48 पर कापड़ीवास से लेकर खेड़ा बॉर्डर तक वाहन चालकों की डगर आसान नहीं है। जिले में हाईवे पर बने कटों के चलते हर साल औसतन 250 से ज्यादा लोगों की मौत होती है, जबकि 350 से अधिक लोग घायल होते हैं। वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से प्रत्येक माह सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कटों को खत्म करने और गड्ढों को भरने के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन एनएचएआई के अधिकारी पर ध्यान तक नहीं देते हैं। इसे लेकर डीसी कई बार निर्देश दे चुके हैं।
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हाईवे पर जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर से कापड़ीवास गांव तक 150 स्थानों पर नेशनल हाईवे को काटकर अवैध रास्ते बनाए गए हैं। यह रास्ते लंबे समय से चले आ रहे हैं, जो नियमों का उल्लंघन है, लेकिन इस ओर एनएसएआई ने कभी ध्यान ही नहीं दिया। अवैध कटों में बनीपुर चौक, नैचाना कट, सांजरपुर के समीप, ओढ़ी कट, जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर, आसलवास गांव के समीप, काठूवास के समीप, संगवाड़ी के समीप, एनएच 71 के कट के समीप, साहबी पुल, खरखड़ा कट, मालपुरा के समीप व कापड़ीवास सहित बड़ी संख्या में छोटे व बड़े कट शामिल हैं।
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अपनी सुविधा अनुसार बनाते हैं लोग कट
हाईवे पर पेट्रोल पंप, होटल-रेस्टोरेंट व ढाबे खोले गए हैं। इसके चलते सभी लोगों ने अपनी सुविधा के लिए हाईवे पर अवैध कट बना रखे हैं। इसके चलते हाईवे के पास के ग्रामीण और वाहन चालक इन कटों का इस्तेमाल करते हैं। इस दौरान अक्सर हादसे होते हैं। इसको लेकर डीसी ने इसी माह में अधिकारियों के साथ एक बैठक भी की थी। इसमें उन्होंने अवैध कटों को बंद करने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन आज तक एक भी कट बंद नहीं किया गया।
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9 स्थानों को अति दुर्घटना क्षेत्र के रूप में किया गया है चिह्नित
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार जिले में हर साल हादसों से 500 से अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं। इनमें हर वर्ष करीब 300 लोगों की जान जाती है। इसमें 250 से अधिक लोगों की जान अकेले दिल्ली-जयपुर हाईवे (राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या)-48 पर जाते हैं। प्रशासन की तरफ से राजमार्ग पर अलग-अलग 9 स्थानों को अति दुर्घटना क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। इनको समाप्त करने के प्रयास भी हुए पर राजमार्ग का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी की लापरवाही इन पर भारी पड़ रही है। हालात यह है कि जिले की सीमा में राजमार्ग के 40 किमी दूरी में अवैध रूप से बनाए कट, टूटे डिवाइडर, नाले और जानलेवा गड्ढे मौजूद हैं।
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न कोई साइन बोर्ड, बस सीमेंट से बने बैरिकेड से ही बचाव
राजमार्ग प्राधिकरण की एजेंसी और जिला प्रशासन की तरफ से गठित कमेटी की जांच के बाद अति दुर्घटना क्षेत्र में बचाव के लिए सीमेंट के बैरिकेड लगा दिए हैं। फिर भी हादसे होते रहते हैं। इसी वर्ष जनवरी में एक होटल में कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे कोसली के तीन युवक कार सहित नहर में जा गिरे थे। गनीमत रही कि होटल के पास खड़े लोगों ने उन्हें तुरंत ही मौके पर पहुंच कर बाहर निकाला था। इससे पहले इस नहर में 3 बाइक, एक एंबुलेंस, एक निजी बस गिर चुकी है। लापरवाही का आलम यह है कि दुर्घटना के बाद भी प्राधिकरण की ओर से अब तक कोई साइन बोर्ड तक नहीं लगाया है। इनके अलावा राजमार्ग पर ओढ़ी कट, जयसिंह पुर खेड़ा बॉर्डर सहित अन्य स्थानों पर मेन लेन के अवैध कट भी हादसों की वजह बन रहे हैं।
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पिछले चार साल में यहां हुए हादसे
सड़क दुर्घटनाओं में वर्ष 2019 में 371 लोग घायल हुए, 212 की मृत्यु हो गई। वर्ष 2020 में 396 लोग घायल हुए और 215 की मृत्यु हो गई। वर्ष 2021 में अगस्त तक 263 व्यक्ति घायल हुए और 125 की मृत्यु हो चुकी है। इस साल 2022 में नवंबर तक 311 लोग घायल हुए और 200 लोगों की मौत हो चुकी है।
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वर्जन:
मामले में एनएचएआई के अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। जल्द ही हाईवे पर बने अवैध कटों को बंद कराया जाएगा। इसके साथ ही अवैध कट बनाने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
-अशोक गर्ग, डीसी रेवाड़ी।