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10 साल में बढ़ने वाली चार लाख आबादी की आवासीय जरूरतों के लिए कुल एक सेक्टर
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आपत्ति दर्ज कराते प्रो. आरएस यादव और बाबू जगजीत सिंह
- फोटो : Rewari
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नगर एवं ग्राम योजनाकार विभाग की ओर से 22 अगस्त को रेवाड़ी मास्टर प्लान 2031 के गजट नोटिफिकेशन के बाद शहरवासियों ने आपत्तियां व सुझाव ही नहीं प्लान के प्रारुप को ही सिरे से खारिज कर दिया है। लोगों का कहना है कि मास्टर प्लान 2021 में शहर की कुल आबादी 3 लाख 41 हजार का आकलन करते हुए कुल 39 सेक्टरों की जरुरत को दर्शाया गया था। लेकिन अगले दस साल अर्थात 2031 के मास्टर प्लान के प्रारूप में शहरी आबादी बढ़कर 7 लाख तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। जबकि सेक्टरों की जरूरत महज 40 बताई है। ऐसे में 10 साल के दौरान बढ़ी 4 लाख की आबादी के लिए सेक्टरों की संख्या में महज एक की बढ़ोतरी अतार्किक लग रही है। ऐसे में लोगों की ओर से सवाल उठना भी स्वाभाविक था।
पुराने शहर की जरूरत के लिए मास्टर प्लान में जिक्र तक नहीं
शहर के दक्षिण हरियाणा विकास लोक मंच के रिटायर्ड प्रोफेसर रणबीर सिंह व बाबू जगजीत सिंह की ओर से इस प्लान को खारिज करते हुए कहा गया है कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने पुराने शहर को मास्टर प्लान-2031 के प्रारूप में शामिल ही नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम नगर निगम ने पुराने गुरुग्राम शहर की प्रारुप विकास प्लान 2031 तैयार किया है। उसी की तर्ज पर रेवाड़ी का मास्टर प्लान 2031 बनना चाहिए।
-नाईवाली व ट्रॉमा सेंटर के पास अंडरपास की जरुरत
शहर का नाईवाली चौक सबसे व्यस्तम चौक में से एक है। यहां पर पुरे दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में यहां पर यदि अंडरपास का निर्माण होता तो लगने वाले जाम से मुक्ति मिल सकती थी। इसके अलावा शहर के ट्रॉमा सेंटर पर अंडरपास, मोती चौक पर अंडरग्राउंड बहुमंजिला पार्किंग को भी शामिल किया जाना था। हालांकि अमृत योजना के तहत इन सभी जरुरतों को ध्यान में रखा गया था, लेकिन पांच साल बीत बीते जाने के बाद ये सभी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में बंद पड़े हुए हैं।
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-दिल्ली रोड पर शिक्षण संस्थानों को मिले एक सेक्टर
शहरवासियों का कहना है कि नये मास्टर प्लान के प्रारूप में 4 कॉलेजों की जरुरत बताई गई है। लेकिन वर्तमान में ही शहर में 5 कॉलेज कार्यरत हैं। लोगों का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए दिल्ली रोड पर एक पुरा सेक्टर विकसित किया जाना चाहिए। इसको नये मास्टर प्लान में समायोजित किये जाने की जरूरत है। ऐसे में एक मेडिकल कॉलेज के लिए भी सेक्टर विकसित करने पर ध्याना देना जरूरी है।
रेवाड़ी-धारुहेड़ा व बावल मिलकर आबादी होगी 25 लाख
गुरुग्राम से सटा होने के कारण आने वाले अगले 10 सालों में बावल, धारुहेड़ा व रेवाड़ी आपस में मिल जायेेंगे। ऐसे में तीनों का अलग-अलग मास्टर प्लान बनाने की बजाय एक संयुक्त मास्टर प्लान बनाये जाने की जरुरत है। लोगों का मानना है कि अगले 10 सालों में संयुक्त आबादी 25 लाख तक पहुंच सकती है। ऐसे में मास्टर प्लान 2031 में इन जरूरतों को शामिल किया जाये।
मेट्रो को भूल गये नगर योजनाकार
लोगों का कहना है कि मास्टर प्लान 2021 में मेट्रो रेल परियोजना को भी शामिल किया गया था। गांव माजरा गुरदास में मेट्रो का जंक्शन बनना था। लेकिन आश्चर्य की बात है कि प्रारुप 2031 में मेट्रो परियोजना उल्लेख नहीं किया गया है। रिटायर्ड प्रो. रणबीर सिंह का कहना है कि शहर की जरुरतों के हिसाब से मास्टर प्लान में परियोजनाओं को शामिल किया जाना जरुरी है।
22 तक मांगे हैं आपत्ति व सुझाव : नगर योजनाकार
नगर योजनाकार मनीष यादव ने कहा कि 22 सितंबर तक आपत्तियां व सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद भी आपत्तियों व सुक्षावों के बारे में विभाग की ओर से अपनी राय देते हुए पूरी रिपोर्ट चंडीगढ़ स्थित उच्चाधिकारियों को भेज दी जायेगी। जो सुझाव ठीक होते हैं, उनको शामिल भी किया जाता है।
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पुराने शहर की जरूरत के लिए मास्टर प्लान में जिक्र तक नहीं
शहर के दक्षिण हरियाणा विकास लोक मंच के रिटायर्ड प्रोफेसर रणबीर सिंह व बाबू जगजीत सिंह की ओर से इस प्लान को खारिज करते हुए कहा गया है कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने पुराने शहर को मास्टर प्लान-2031 के प्रारूप में शामिल ही नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम नगर निगम ने पुराने गुरुग्राम शहर की प्रारुप विकास प्लान 2031 तैयार किया है। उसी की तर्ज पर रेवाड़ी का मास्टर प्लान 2031 बनना चाहिए।
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-नाईवाली व ट्रॉमा सेंटर के पास अंडरपास की जरुरत
शहर का नाईवाली चौक सबसे व्यस्तम चौक में से एक है। यहां पर पुरे दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में यहां पर यदि अंडरपास का निर्माण होता तो लगने वाले जाम से मुक्ति मिल सकती थी। इसके अलावा शहर के ट्रॉमा सेंटर पर अंडरपास, मोती चौक पर अंडरग्राउंड बहुमंजिला पार्किंग को भी शामिल किया जाना था। हालांकि अमृत योजना के तहत इन सभी जरुरतों को ध्यान में रखा गया था, लेकिन पांच साल बीत बीते जाने के बाद ये सभी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में बंद पड़े हुए हैं।
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-दिल्ली रोड पर शिक्षण संस्थानों को मिले एक सेक्टर
शहरवासियों का कहना है कि नये मास्टर प्लान के प्रारूप में 4 कॉलेजों की जरुरत बताई गई है। लेकिन वर्तमान में ही शहर में 5 कॉलेज कार्यरत हैं। लोगों का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए दिल्ली रोड पर एक पुरा सेक्टर विकसित किया जाना चाहिए। इसको नये मास्टर प्लान में समायोजित किये जाने की जरूरत है। ऐसे में एक मेडिकल कॉलेज के लिए भी सेक्टर विकसित करने पर ध्याना देना जरूरी है।
रेवाड़ी-धारुहेड़ा व बावल मिलकर आबादी होगी 25 लाख
गुरुग्राम से सटा होने के कारण आने वाले अगले 10 सालों में बावल, धारुहेड़ा व रेवाड़ी आपस में मिल जायेेंगे। ऐसे में तीनों का अलग-अलग मास्टर प्लान बनाने की बजाय एक संयुक्त मास्टर प्लान बनाये जाने की जरुरत है। लोगों का मानना है कि अगले 10 सालों में संयुक्त आबादी 25 लाख तक पहुंच सकती है। ऐसे में मास्टर प्लान 2031 में इन जरूरतों को शामिल किया जाये।
मेट्रो को भूल गये नगर योजनाकार
लोगों का कहना है कि मास्टर प्लान 2021 में मेट्रो रेल परियोजना को भी शामिल किया गया था। गांव माजरा गुरदास में मेट्रो का जंक्शन बनना था। लेकिन आश्चर्य की बात है कि प्रारुप 2031 में मेट्रो परियोजना उल्लेख नहीं किया गया है। रिटायर्ड प्रो. रणबीर सिंह का कहना है कि शहर की जरुरतों के हिसाब से मास्टर प्लान में परियोजनाओं को शामिल किया जाना जरुरी है।
22 तक मांगे हैं आपत्ति व सुझाव : नगर योजनाकार
नगर योजनाकार मनीष यादव ने कहा कि 22 सितंबर तक आपत्तियां व सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद भी आपत्तियों व सुक्षावों के बारे में विभाग की ओर से अपनी राय देते हुए पूरी रिपोर्ट चंडीगढ़ स्थित उच्चाधिकारियों को भेज दी जायेगी। जो सुझाव ठीक होते हैं, उनको शामिल भी किया जाता है।